L1 पर पहुंचने से पहले आदित्य यान ने शुरू कर दिया काम, पृथ्वी की कक्षा को लेकर भेजा अहम डेटा
चंद्रयान-3 की सफलता के बाद इसरो ने आदित्य एल1 लॉन्च किया था। जिसने गंतव्य पर पहुंचने से पहले ही अपना काम शुरू कर दिया है। इसरो के मुताबिक यान के पेलोड डेटा इकट्ठा कर कमांड सेंटर को भेज रहे हैं।
दरअसल आदित्य एल1 पृथ्वी से 15 लाख किमी दूर स्थित लैग्रेंज पॉइंट तक जाएगा। वैसे तो उसमें करीब चार महीने का वक्त लगना है, लेकिन उससे पहले ही उसके उपकरणों ने काम करना शुरू कर दिया।

इसरो के ताजा अपडेट के मुताबिक सुप्रा थर्मल एंड एनर्जेटिक पार्टिकल स्पेक्ट्रोमीटर (STEPS) उपकरण, जो आदित्य सोलर विंड पार्टिकल एक्सपेरिमेंट (ASPEX) पेलोड का एक हिस्सा है, उसने वैज्ञानिक डेटा इकट्ठा करना शुरू कर दिया है।
STEPS में छह सेंसर शामिल हैं। ये अलग-अलग दिशाओं का निरीक्षण करते हैं। उपकरण के सेंसर ने पृथ्वी से 50,000 किमी से अधिक दूरी पर सुपर-थर्मल और ऊर्जावान आयनों और इलेक्ट्रॉनों को मापना शुरू कर दिया है।
पृथ्वी की कक्षा के आसपास के डेटा से वैज्ञानिकों को हमारे आसपास के कणों के व्यवहार (खासकर पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की उपस्थिति) का विश्लेषण करने में मदद मिलती है। इसरो के मुताबिक STEPS की प्रत्येक इकाई सामान्य मापदंडों के भीतर काम कर रही है। एक आंकड़ा पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर के भीतर ऊर्जावान कण वातावरण में भिन्नता को दर्शाने वाले माप को प्रदर्शित करता है।
अच्छी बात ये है कि ये STEPS माप आदित्य-L1 मिशन के क्रूज चरण के दौरान जारी रहेंगे। इस दौरान यान L1 की ओर बढ़ेगा। जब वो तय कक्षा में स्थापित हो जाएगा, तो भी वो डेटा भेजता रहेगा।
भारत में बना है ये पेलोड
सबसे अहम बात STEPS पूरी तरह से भारत में निर्मित है। इसे भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) द्वारा अहमदाबाद में विकसित किया गया। इसमें अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (SAC) ने भी मदद की।
चौथा EBM पूरा किया
हाल ही में इसरो ने अपना चौथा अर्थ बाउंड मैन्यूवर पूरा किया। उसकी नई आर्बिट अब 256 km x 121973 km की हो गई है। अब उसका अगला मैन्यूवर 19 सितंबर को होगा, जिसके बाद वो L1 की तरफ बढ़ेगा।












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