ISRO का पहला सोलर मिशन Aditya-L1सफलतापूर्वक हुआ लॉन्च, बढ़ा अनंत आसमान की ओर
चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के बाद आज इसरो ने सूर्य मिशन Aditya-L1 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। श्रीहरिकोटा के लॉन्चिंग सेंटर से आदित्य-L1 मिशन को आज 11.50 बजे लॉन्च किया गया। लॉन्चिंग के बाद राकेट का पहला, दूसरा और तीसरा चरण सफल रहा।
पीएसएलवी सी57 रॉकेट के सभी उपकरण सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। यान घने वातावरण से बाहर निकलकर अपने पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसरो ने कहा है कि आदित्य-एल1 ने बिजली पैदा करना शुरू कर दिया। सौर पैनल तैनात हैं। कक्षा को ऊपर उठाने के लिए पहली अर्थबाउंड फायरिंग तीन सितंबर को लगभग 11:45 बजे होगा।

भारत का यह पहला सौर मिशन सूर्य और पृथ्वी के बीच मौजूद L1 पॉइंट पर पहुंचने के लिए 125 दिन लेगा। ये 125 दिन 3 जनवरी 2024 को पूरे होंगे।अगले लगभग चार महीनों में करीब 15 लाख किलोमीटर की यात्रा कर यह L1 पॉइंट तक पहुंचेगा।
अगर मिशन सफल रहा और आदित्य स्पेसक्राफ्ट लैग्रेंजियन पॉइंट 1 पर पहुंच गया, तो नए साल में इसरो के नाम ये बड़ी उपलब्धि होगी। लैग्रेंजियन पॉइंट 1 धरती से सूरज की दूरी का मात्र 1% है।
आदित्य एल1 की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग के बाद इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा- मैं आदित्य-एल1 मिशन लिए पीएसएलवी को बधाई देता हूं। अब से, मिशन अपनी यात्रा शुरू करेगा। यह लगभग 125 दिनों की बहुत लंबी यात्रा है।

आदित्य-L1 में सात पेलोड यानी उपकरण लगे हैं। इनके जरिए फोटोस्फेयर, क्रोमोस्फेयर और सूरज की सबसे बाहरी परतों यानी कोरोना की स्टडी करेंगे। ISRO के अनुसार, आदित्य-एल1 से कोरोनल हीटिंग, कोरोनल मास इजेक्शन, प्री-फ्लेयर और फ्लेयर गतिविधियों और उनकी विशेषताओं, अंतरिक्ष मौसम की गतिशीलता, पार्टिकल्स के प्रसार आदि को समझने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पहले सौर मिशन, आदित्य-एल1 के सफल प्रक्षेपण के लिए इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए ब्रह्मांड की बेहतर समझ विकसित करने के लिए हमारे अथक वैज्ञानिक प्रयास जारी रहेंगे।












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