ISRO Chairmans List: 62 साल में इसरों ने 11 चेयरमेन देखे, 9 साउथ से, जानें देश को किसने क्या दिया?
ISRO Chairmans List: क्या आप जानते हैं कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब एक नए अध्याय में प्रवेश करने जा रहा है? 14 जनवरी 2025 को, वी. नारायणन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के नए प्रमुख बनेंगे। वह एस. सोमनाथ का स्थान लेंगे और अंतरिक्ष विभाग के सचिव का पद भी संभालेंगे। वी. नारायणन को रॉकेट और अंतरिक्ष प्रणोदन के क्षेत्र में 40 साल का शानदार अनुभव है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने स्थापना के बाद से ही दुनिया भर में अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। इसके पीछे एक मजबूत नेतृत्व का हाथ रहा है। इसरो में अब तक 11 प्रमुख बने हैं, जिनमें से अधिकांश दक्षिण भारत से रहे हैं। हालांकि, कोई भी महिला इसरो प्रमुख नहीं बनी है। आइए, उन प्रमुख चेहरों पर नजर डालते हैं, जिन्होंने इसरो को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया...

इसरो के अध्यक्षों की सूची...
- डॉ. विक्रम साराभाई (1963-1971): इसरो के संस्थापक अध्यक्ष।
- प्रो. एम.जी.के. मेनन (जनवरी 1972 - सितंबर 1972): अंतरिम अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला।
- प्रो. सतीश धवन (1972-1984): इसरो के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- प्रो. यू.आर. राव (1984-1994): उपग्रह प्रौद्योगिकी में योगदान दिया।
- डॉ. के. कस्तूरीरंगन (1994-2003): पीएसएलवी और जीएसएलवी कार्यक्रमों का नेतृत्व किया।
- श्री जी. माधवन नायर (2003-2009): चंद्रयान-1 मिशन के दौरान अध्यक्ष रहे।
- डॉ. के. राधाकृष्णन (2009-2014): मंगलयान मिशन का सफल प्रक्षेपण।
- श्री ए.एस. किरण कुमार (2015-2018): उपग्रह प्रक्षेपण में सफलता प्राप्त की।
- डॉ. के. सिवन (2018-2022): चंद्रयान-2 मिशन का नेतृत्व किया।
- डॉ. एस. सोमनाथ (2022-2025): चंद्रयान-3 मिशन के दौरान अध्यक्ष रहे।
- श्री वी. नारायणन (14 जनवरी 2025 से वर्तमान): वर्तमान अध्यक्ष।
आइए विस्तार से रूबरू कराते हैं आपको...

1- डॉ. विक्रम साराभाई (कार्यकाल: 1963-1971): भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक
- जन्म: 12 अगस्त 1919 को पश्चिमी भारत के गुजरात राज्य के अहमदाबाद में
- देहांत: 1971 को केरल के तिरुवनंतपुरम में
- प्रोफाइल: डॉ. विक्रम साराभाई को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक कहा जाता है। उन्होंने अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) की स्थापना की और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की नींव रखी। उनके नेतृत्व में भारत ने 21 नवंबर 1963 को थुंबा, केरल से पहला रॉकेट लॉन्च किया।
- उनकी दूरदृष्टि का उदाहरण उनके ये शब्द हैं: 'हम अंतरिक्ष तकनीक का उपयोग गरीबी और शिक्षा जैसी समस्याओं को हल करने के लिए करेंगे, न कि केवल चंद्रमा और ग्रहों पर जाने के लिए।' उनकी पहल पर भारत ने 1975 में अपना पहला उपग्रह, "आर्यभट्ट," लॉन्च किया।
2- प्रो. एमजीके मेनन (1972): अंतरिक्ष क्षेत्र के विज्ञानविद
- जन्म: 28 अगस्त, 1928 मैंगलूर
- देहांत: 22 नवंबर , 2016 नई दिल्ली
- प्रोफाइल: प्रो. एम गोविंद कुमार मेनन ने इसरो का नेतृत्व केवल नौ महीने किया, लेकिन उनका योगदान भारत की विज्ञान नीतियों को मजबूत करने में अहम था। उन्होंने कॉस्मिक किरणों और कण भौतिकी पर कई शोध किए और भारत को विज्ञान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उन्हें पद्म विभूषण सहित कई पुरस्कार मिले।
3- प्रो. सतीश धवन (1972-1984): आधुनिक इसरो के निर्माता
- जन्म: 25 सितंबर, 1920- श्रीनगर
- निधन: 3 जनवरी, 2002 को बेंगलुरु
- प्रोफाइल: प्रो. सतीश धवन ने इसरो को तकनीकी और वैज्ञानिक रूप से मजबूत बनाया। उनके नेतृत्व में INSAT और PSLV जैसे उपग्रह और रॉकेट कार्यक्रम शुरू हुए। श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र उनके नाम पर ही है।
4- प्रो. उडुपी रामचंद्र राव (1984-1994): उपग्रह प्रौद्योगिकी के शिल्पकार
- जन्म: 10 मार्च, 1932 को कर्नाटक के उडुपी ज़िले के अडामारू में
- निधन: 85 वर्ष की उम्र में बेंगलुरु स्थित घर पर
- प्रोफाइल: प्रो. राव ने भारत के पहले उपग्रह "आर्यभट्ट" से लेकर 18 अन्य उपग्रहों को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। उनके कार्यकाल में PSLV और GSLV रॉकेटों का विकास हुआ। उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
5- डॉ. कृष्णस्वामी कस्तूरीरंगन(1994-2003): अंतरिक्ष विज्ञान के विकासकर्ता
- जन्म: 24 अक्टूबर, 1940 को एर्नाकुलम में
- निधन: 10 जुलाई 2023 को श्रीलंका में दिल का दौरा
- प्रोफाइल:डॉ. कस्तूरीरंगन ने भारत के पहले ऑपरेशनल PSLV और GSLV रॉकेट का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में INSAT और IRS जैसी प्रणालियों का विकास हुआ। उन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई।
6- श्री जी. माधवन नायर (2003-2009): चंद्रयान के मार्गदर्शक
- जन्म: 31 अक्टूबर, 1943 को नेय्याट्टिनकारा, तिरुवनंतपुरम, केरल में
- प्रोफाइल: वे भारत के पहले उपग्रह प्रक्षेपण यान, SLV-3 के विकास में शामिल थे। वे भारत के पहले चंद्र मिशन, चंद्रयान 1 के कार्यान्वयन के लिए भी जिम्मेदार थे। नायर ने चंद्रयान-1 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। उन्होंने एडुसैट और टेलीमेडिसिन जैसी योजनाओं को बढ़ावा दिया, जिससे गांवों और अस्पतालों को जोड़ा गया। उनके नेतृत्व में इसरो ने 25 सफल मिशन पूरे किए।
7- डॉ. के राधाकृष्णन (2009-2014)
जन्म: 29 अगस्त 1949 को केरल में
प्रोफाइल: डॉ. कोप्पिलिल राधाकृष्णन ने इसरो में अपनी कार्यकाल के दौरान संस्थान को कई बड़ी सफलताएं दिलाई। उन्होंने अंतरिक्ष तकनीक को सामाजिक और राष्ट्रीय जरूरतों के लिए उपयोगी बनाया। वे एक बेहतरीन टेक्नोक्रेट और प्रेरक नेता थे, जिनके नेतृत्व में इसरो ने नए मिशन, तकनीकी विकास और उद्योगों के साथ तालमेल को मजबूत किया। डॉ. राधाकृष्णन ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, प्रबंधन और डॉक्टरेट की पढ़ाई की। वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई प्रमुख पदों पर रहे। उनके कार्यकाल में इसरो ने कई सामाजिक और तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए काम किया।
8- श्री एएस किरण कुमार (2015-2018)
जन्म: 22 अक्टूबर 1952 को कर्नाटक में
प्रोफाइल: श्री किरण कुमार एक प्रतिभाशाली वैज्ञानिक हैं जिन्होंने भारत के पहले मंगल मिशन को सफल बनाया। उन्होंने उपग्रहों के सेंसर डिज़ाइन और मिशन रणनीतियों में अहम भूमिका निभाई। वे मंगलयान मिशन की सफलता के मुख्य वास्तुकार माने जाते हैं। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं, जैसे पद्मश्री और चंद्रयान-1 के लिए प्रशंसा।
9- डॉ. के. सिवन (2018-2022)
- जन्म: 14 अप्रैल, 1957 को तमिलनाडु के कन्याकुमारी ज़िले के नागरकोइल के पास सरक्कलविलाई में
- प्रोफाइल: डॉ. कैलासवादिवू सिवन को 'रॉकेट मैन ऑफ इंडिया' कहा जाता है। उन्होंने पीएसएलवी, जीएसएलवी और रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल जैसे मिशनों में अहम योगदान दिया। वे मिशन डिजाइन और सिमुलेशन सॉफ्टवेयर के विशेषज्ञ हैं। उनके कार्यकाल में इसरो ने एक ही रॉकेट से 104 उपग्रह लॉन्च करने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। वे सादगी और मेहनत के प्रतीक हैं।
10- डॉ. एस. सोमनाथ (2022-2025)
- जन्म: जुलाई 1963 को केरल के अलाप्पुझा जिले के थुरवूर में
- प्रोफाइल: डॉ. श्रीधर पणिक्कर सोमनाथ ने चंद्रयान-3 की सफलता से भारत को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर उतारने वाला पहला देश बनाया। वे एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और प्रक्षेपण यान डिजाइन के विशेषज्ञ हैं। उन्हें जीएसएलवी एमके-III के लिए प्रदर्शन उत्कृष्टता पुरस्कार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर "विश्व अंतरिक्ष पुरस्कार" मिला।
11- डॉ. वी नारायणन (2025 से वर्तमान)
- जन्म: 1964 को नागरकोइल, कन्नियाकुमारी जिला, तमिलनाडु में
- प्रोफाइल: नारायणन 14 जनवरी 2025 को इसरो के अध्यक्ष का पदभार संभालेंगे। वे रॉकेट और अंतरिक्ष प्रणोदन तकनीक के विशेषज्ञ हैं। उनके नेतृत्व में इसरो नए मिशनों और तकनीकी विकास की ओर अग्रसर है। वे इसरो में 1984 से कार्यरत हैं और द्रव नोदन प्रणाली केंद्र (LPSC) के निदेशक रहे हैं। उनकी विशेषज्ञता इसरो के भविष्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की उम्मीदें बढ़ाती है।
दक्षिण भारत वैज्ञानिकों का गढ़
इसरो के अधिकांश अध्यक्ष दक्षिण भारत से रहे हैं। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि इसरो के कई प्रमुख केंद्र, जैसे विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) तिरुवनंतपुरम में स्थित हैं, जिससे दक्षिण भारतीय वैज्ञानिकों की भागीदारी स्वाभाविक रूप से अधिक रही है। इसके अतिरिक्त, दक्षिण भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान की मजबूत परंपरा भी इस प्रवृत्ति में योगदान करती है।
महिला अध्यक्ष की अनुपस्थिति
अब तक इसरो में कोई महिला अध्यक्ष नियुक्त नहीं हुई हैं। हालांकि, इसरो में कई महिला वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं और संगठन की सफलता में योगदान दिया है। भविष्य में महिला नेतृत्व की संभावनाएं बनी हुई हैं, और यह संगठन की समावेशिता और विविधता को और बढ़ा सकता है।
इसरो के नए युग की ओर
आज इसरो न केवल भारत को आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान भी मजबूत कर रहा है। वी. नारायणन के नेतृत्व में भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम नई ऊंचाइयों को छूने की ओर अग्रसर है।
(खबर का सोर्स- इसरो वेबसाइड)
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