MEA S Jaishankar: क्या भारत के लिए एक ही विदेश मंत्री काफी है? एस. जयशंकर का एक जवाब बना चर्चा का विषय
S Jaishankar Pune Book Festival: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पुणे बुक फेस्टिवल (Pune Book Festival) में दिए अपने बयान से राजनीतिक और बौद्धिक हलकों में नई बहस छेड़ दी। उन्होंने साफ कहा कि देश को एक जयशंकर की नहीं, बल्कि एक मजबूत नेतृत्व की जरूरत होती है।
पुणे बुक फेस्टिवल कार्यक्रम के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या "भारत के लिए एक एस. जयशंकर ही काफी हैं?", तो उन्होंने बेहद शालिनता के साथ सवाल को ही गलत ठहराते हुए अपने जवाब दे दिए। विदेश मंत्री के इस 'इपिक रिप्लाई' के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई।

विदेश मंत्रा ने क्या जवाब दिया?
जयशंकर ने कहा कि सही सवाल यह होना चाहिए कि "देश के लिए एक मोदी ही क्यों काफी हैं?" उन्होंने समझाया कि मंत्री और राजनयिक भी सेवा करने वाले होते हैं, जैसे भगवान राम के प्रति हनुमान की सेवा। जयशंकर ने कहा कि आखिरकार देश को दिशा देने का काम नेतृत्व करता है, बाकी लोग उस विज़न को जमीन पर उतारते हैं। हालांकि उन्होंने प्रभु राम का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन संदर्भ स्पष्ट था।
नेतृत्व ही देशों को परिभाषित करती है
विदेश मंत्री ने आगे कहा कि किसी भी देश की पहचान उसके नेताओं और उनकी दृष्टि से होती है। उन्होंने कहा कि नीति को अमल में लाने वाले लोग जरूरी हैं, लेकिन असली फर्क नेतृत्व, विज़न और आत्मविश्वास से पड़ता है। जयशंकर ने कहा कि,"देश नेताओं और उनकी सोच से परिभाषित होते हैं। लोग उसे लागू करते हैं, लेकिन अंततः विज़न, नेतृत्व और आत्मविश्वास ही आज अंतर पैदा करता है। उनका यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की ओर इशारा करता है, जिसे वे भारत की मौजूदा वैश्विक स्थिति का मुख्य आधार मानते हैं।
कृष्ण और हनुमान को बताया महान राजनयिक
जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत के पास रणनीति और कूटनीति की बहुत पुरानी और समृद्ध परंपरा है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर रणनीतिक किताबें पश्चिमी लेखकों की हैं, जिनमें भारत को रणनीतिक सोच से दूर बताया जाता है, जबकि यह सच नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति, अपने शब्दों और अपने नजरिए को दुनिया के सामने रखना चाहिए।
विदेश मंत्री ने महाभारत और रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि इन ग्रंथों में गहरी रणनीति और कूटनीति छिपी है। उन्होंने भगवान कृष्ण और हनुमान को दुनिया के सबसे बड़े राजनयिक बताया। जयशंकर के अनुसार, भगवान कृष्ण ने महाभारत में और हनुमान ने रामायण में अपनी बुद्धि, संवाद और रणनीति से असंभव कामों को संभव किया।
दुनिया से भारतीय नजरिए से बात करने की जरूरत
जयशंकर ने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत अपनी सोच, अपनी संस्कृति और अपने नजरिए के साथ दुनिया से बात करे। केवल पश्चिमी सोच पर निर्भर रहने के बजाय भारत को अपनी सभ्यतागत ताकत को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की असली ताकत किसी एक व्यक्ति में नहीं, बल्कि उस मजबूत नेतृत्व और विज़न में है, जो पूरे देश को एक दिशा देता है। जयशंकर का यह बयान न सिर्फ राजनीतिक संदेश देता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत की विदेश नीति को वे सांस्कृतिक आत्मविश्वास और मजबूत नेतृत्व से जोड़कर देखते हैं।












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