क्या NeoCoV कोरोना का नया वैरिएंट है? दक्षिण अफ्रीका के चमगादड़ों में होता है ये वायरस, जानें सबकुछ

क्या NeoCoV कोरोना का नया वैरिएंट है? दक्षिण अफ्रीका के चमगादड़ों में होता है ये वायरस, जानें सबकुछ

नई दिल्ली , 29 जनवरी: कोरोना वायरस महामारी और उसके वैरिएंट को लेकर पिछले कुछ वर्षों में कई भयावह रिपोर्ट सामने आई हैं। कोरोना वायरस का पहली बार चीन में पता चला था जो कोविड-19 का कारण बना। अब एक नए वैरिएंट की बात की जा रही है, जिसे NeoCoV का नाम दिया जा रहा है। कई चीनी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि NeoCoV कोरोना का ही एक वैरिएंट है और वायरस के संभावित प्रकार की चेतावनी देती हैं जो मध्य पूर्व में 2012 और 2015 के प्रकोप से जुड़ी हैं। NeoCoV पुराना वायरस उसी परिवार का है जिसमें SARS-CoV-2 है। हालांकि जिस नए तथाकथित वैरिएंट के बारे में अभी बात की जा रही है जिसे NeoCoV करार दिया गया है, ये मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका के चमगादड़ों की आबादी में पाया गया था। आज तक, NeoCoV केवल इन जानवरों के बीच फैलने के लिए जाना जाता है।

NeoCoV को लेकर चीनी वैज्ञानिकों ने दी है चेतावनी?

NeoCoV को लेकर चीनी वैज्ञानिकों ने दी है चेतावनी?

चीनी शोधकर्ताओं ने दक्षिण अफ्रीका में चमगादड़ों में एक नए प्रकार के कोरोना वायरस का पता लगाया है और दावा किया है कि इसमें म्यूटेंट की क्षमता अधिक है। चीन के वुहान विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार, NeoCov सार्स-सीओवी-2 की तरह ही मानव कोशिकाओं में प्रवेश कर सकता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि NeoCoV एक समान तकनीक का उपयोग करके फैल सकता है। चीनी वैज्ञानिकों का कहना है कि ये एक नए प्रकार वायरस है। जिसके संक्रमण की मृत्यु दर सबसे अधिक है। हालांकि कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि NeoCoV एक "नया" संस्करण नहीं है और इसे बहुत पहले खोजा गया था।

अभी तक सिर्फ जानवरों में फैलने के सबूत

अभी तक सिर्फ जानवरों में फैलने के सबूत

नियोकोव (NeoCoV) को सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में चमगादड़ों में खोजा गया था। हालांकि इसके मानव शरीर में फैलने के फिलहाल कोई सबूत नहीं हैं। ये वायरस को अभी तक सिर्फ जानवरों में ही फैलता हुआ देखा गया है। बायोरेक्सिव वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नियोकोव (NeoCoV) और इसके करीबी म्यूटेंट पीडीएफ-2180-सीओवी मनुष्यों को संक्रमित कर सकते हैं। इसके संक्रमण की रफ्तार और इसे मृत्युदर काफी अधिक है। हालांकि अभी तक इसका पीयर-रिव्यू नहीं किया गया है।

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    क्या NeoCoV के बारे में चिंता करनी चाहिए?

    क्या NeoCoV के बारे में चिंता करनी चाहिए?

    नहीं, आपको फिलहाल इस नियोकोव (NeoCoV) वायरस को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। इस एमईआरएस (MERS) से जुड़े वायरस के जूनोटिक प्रभाव से गुजरने और जानवरों से मनुष्यों में संचारित होने की रिपोर्ट के बारे में कोई साक्ष्य नहीं है। इसका आखिरी प्रकोप साल 2015 में दर्ज किया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2019 में कहा था कि विश्व स्तर पर एमईआरएस (MERS) के मामलों में कमी आई है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है, "2016 के बाद से एमईआरएस-सीओवी के 1465 मामले सामने आए हैं और तेजी से वैश्विक प्रयासों के कारण 300 से 500 मौतों को टाला जा सकता है।" वायरस का अंतिम प्रकोप 2015 में कोरिया गणराज्य में 186 मामलों और 38 मौतों के साथ दर्ज किया गया था और इसका अनुमानित आर्थिक प्रभाव US$12 बिलियन था। विश्व स्वास्थ्य संगठनने कहा है कि इसकी क्षमता के और स्पष्टता के लिए फिलहाल रिसर्च की जरूरत है।

    NeoCoV क्या कोरोना वैरिएंट है?

    NeoCoV क्या कोरोना वैरिएंट है?

    नहीं, नियोकोव (NeoCoV) कोविड-19 का वैरिएंट नहीं है। अब तक हम केवल इतना जानते हैं कि नियोकोव संभवतः MERS-CoV वायरस से जुड़ा है और अब तक केवल चमगादड़ों के बीच में ही पाया गया है। एमईआरएस वायरस एक श्वसन वायरस है जो गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है और अब तक लगभग 35 प्रतिशत रोगियों में घातक रहा है।

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