जम्मू कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी रोमांस खत्म होने की ओर!
श्रीनगर। जम्मू कश्मीर में जुलाई में हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद से जो घमासान मचा हुआ है अब उसका असर यहां की राजनीति पर पड़ने लगा है। गुरुवार को श्रीनगर से पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के सांसद तारिक हामिद कारा का इस्तीफा इसी तरफ इशारा करता है। वहीं अब विशेषज्ञ मानने लगे हैं कि हो सकता है कि राज्य में बीजेपी और पीडीपी गठबंधन वाली सरकार के भी उल्टे दिन शुरू हो गए हों।

फरवरी 2015 में हुई थी 'शादी'
फरवरी 2015 में बीजेपी और पीडीपी ने सारे मतभेदों को भुलाते हुए राज्य में सरकार बनाई थी। अब 18 माह के बाद अब दोनों का गठबंधन मुश्किल में है और हो सकता है कि दोनों के बीच हुई यह 'शादी' 'तलाक' के मुकाम पर पहुंच जाए। सूत्रों की मानें तो दोनों ही पक्ष अब गठबंधन में रहने के इच्छुक नहीं हैं। दोनों बस मजबूरी में जम्मू कश्मीर की सत्ता में बनें हुए हैं।
पीएम मोदी पर एजेंडा बढ़ाने का आरोप
बीजेपी और पीडीपी दोनों ही एक मौके की तलाश कर रहे हैं कि कब वह दोनों एक दूसरे को अलविदा कहें। कारा का इस्तीफा हो सकता है कि वही पल बन जाए जब दोनों ही सरकार खत्म करने के लिए राजी हों।
कारा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर असहिष्णुता और हिंदुत्व का एजेंडा आगे बढ़ाने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस गठबंधन सरकार की तुलना नाजी शासन से कर डाली थी।
महबूबा की छवि को नुकसान
उनका बयान कहीं न कहीं पीडीपी के बाकी सदस्यों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने पीडीपी सदस्यों से अपील की कि वे उन्हें एक उदाहरण की तरह अपनाएं।
कारा ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के लिए स्थिति और दुविधाजनक कर दी है। वर्तमान हालातों ने कहीं न कहीं मुफ्ती की छवि को भी नुकसान पहुंचाया है जिन्हें उनके पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद की मौत के बाद सीएम की जिम्मेदारी मिली थी।
खो दिया है लोगों का भरोसा
महबूबा की मुश्किल यह है कि नई दिल्ली अब उनमें ज्यादा भरोसा नहीं रखता वहीं घाटी के लोग उन्हें एक ऐसा नेता मानने लगे हैं जिसने उन्हें सत्ता के लिए अकेला छोड़ दिया। ऐसे में विशेषज्ञों की नजर में अब महबूबा के पास गठबंधन को तोड़ने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है।












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