इरफान के निधन पर दुखी परिवार का बयान- 'ऐसा शख्स जो अंत तक लड़ा, वह अब स्वर्ग में रहने चला गया'
नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के बेमिसाल एक्टर इरफान खान ने आज दुनिया को अलविदा कह दिया, मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में इरफान खान ने 54 साल की उम्र में अंतिम सांस ली, इरफान काफी लंबे वक्त से बीमार थे और कल ही उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. दिग्गज कलाकार के जाने से बॉलीवुड में शोक का माहौल है, इरफान खान के परिवार ने अपना दुख जाहिर करते हुए कहा है कि ऐसा शख्स जो अंत तक लड़ा, हमेशा सबको प्रेरित किया, वह अब स्वर्ग में रहने चला गया है, परिवार की ओर से एक बयान भी जारी किया गया है।

'मुझे भरोसा है कि मैंने आत्मसमपर्ण कर दिया है'
ये इरफान ने 2018 में कैंसर से अपनी लड़ाई के बारे में लिखा था-'मैं कुछ शब्दों का एक आदमी और उसकी गहरी आंख हूं, स्क्रीन पर उसके यादगार कार्यों के साथ मूक भावों का एक अभिनेता', ये दुखद है कि इस दिन, हमें उनके निधन की खबर को आगे लाना है, इरफान एक मजबूत आत्मा थे, कोई ऐसा व्यक्ति जो अंत तक लड़ता रहा और जो भी उनके करीब आया, उसे हमेशा प्रेरित किया, साल 2018 में कैंसर जैसी खबर के साथ उन्होंने कई लड़ाइयां लड़ी, उनके प्यार से घिरे उनके प्यार के लिए, जिनकी वह सबसे ज्यादा परवाह करते थे, वह अब स्वर्ग में रहने चले गए हैं, वास्तव में खुद की विरासत को पीछे छोड़ते हुए, हम सभी प्रार्थना करते हैं और आशा करते हैं कि वह शांति से रहें, अपने शब्दों के साथ उन्होंने कहा था, 'जैसे कि मैं पहली बार जीवन चख रहा था, इसका जादुई पक्ष'।
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इरफान के जाने से आज फिल्मी कैनवस सूना
इरफान के जाने से आज फिल्मी कैनवस सूना हो गया है, भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपने अभिनय का डंका बजवा चुके बहुमुखी प्रतिभा के धनी इरफान खान को दो साल पहले 'न्यूरो इंडोक्राइन ट्यूमर' नामक बीमारी हुई थी, जिसके इलाज के लिए वो विदेश भी गए थे और लंबे इलाज के बाद उन्होंने वतन वापसी भी की थी और फिल्म ‘अंग्रेज़ी मीडियम' की शूटिंग की, उनकी फिल्म पिछले महीने ही रिलीज़ हुई थी।

बिना किसी गॉडफादर के बनाई अपनी पहचान
बता दें कि इरफान खान ने कड़ा संघर्ष करके अपनी फिल्मी दुनिया में अलग पहचान बनाई थी, बिना गॉड फॉदर के इरफान ने साबित किया था कि अगर हौसले बुलंद हो और इरादे नेक, तो कामयाबी जरूर कदम चूमती है।

'पान सिंह तोमर' के लिए बेस्ट एक्टर का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता
मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले इरफान नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के छात्र रह चुके थे। छोटे पर्दे पर उन्होंने ‘भारत एक खोज' में भी काम किया था। इसके बाद वो फिल्मों में आए। 'मकबूल', 'लाइफ इन अ मेट्रो', 'द लंच बॉक्स', 'पीकू', 'हिंदी मीडियम', 'हासिल', 'पान सिंह तोमर' जैसी फिल्मों ने उन्हें एक अलग मुकाम दिया और साल 2012 में उन्हें 'पान सिंह तोमर' के लिए बेस्ट एक्टर का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता।












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