International Yoga Day 2024: भारत के इन 10 योगगुरुओं ने दुनियाभर में योग को दिया बढ़ावा

International Yoga Day: दुनियाभर में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा। साल 2015 में भारत की पहल के बाद इंटरनेशन योगा डे मनाने की शुरुआत हुई है। भारत सरकार की आयुष मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक योग की अवधारणा और इसकी उत्पत्ति भारत में लगभग कई हजार साल पहले हुई थी। योग वैदिक दर्शन की छह प्रणालियों में से एक है। भारत में योग की शुरुआत हजारों साल पहले महान संत और ऋषियों ने की थी। लेकिन योगा अब सिर्फ साधुओं, संतों तक ही सीमित नहीं है, ये हमारी दैनिक जीवन का हिस्सा है। योग विज्ञान और इसकी तकनीकों ने जीवन को फिर से जीने की नई दिशा दी है। योग आज चिकित्सा विज्ञान का हिस्सा है। इस योगा डे हम आपको भारत के ऐसे योगगुरुओं के बारे में बताएंगे, जिन्होंने सिर्फ भारत में ही बल्कि दुनियाभर में योगा को बढ़ावा दिया है।

महर्षि पतंजलि: जिन्हें योग का जनक कहा जाता है

महर्षि पतंजलि: जिन्हें योग का जनक कहा जाता है

योग के जनक कहे जाने वाले महर्षि पतंजलि ने अपने "योगसूत्र" में व्यवस्थित रूप से योग के कई विभिन्न पहलुओं का जिक्र किया है। महर्षि पतंजलि एक महान चिकित्सक थे, इन्हें 'चरक संहिता' और योग का प्रणेता माना जाता है। "योगसूत्र" महर्षि पतंजलि का महान अवदान है। आयुष मंत्रालय के मुताबिक मनुष्य के सर्वांगीण विकास के लिए महर्षि पतंजलि ने ''अष्टांग योग" के रूप में योग के आठ चरणों के बारे में बताया है। वे आठ चरण हैं, यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। इन योग को करने से स्वास्थ्य में बहुत सुधार होता है। महर्षि पतंजलि ने कहा है योग का प्रतिदिन अभ्यास मनोदैहिक (मन और शरीर) विकारों को रोकता है। योग आपको तनावपूर्ण स्थितियों को सहन करने की क्षमता देता है।

आइए जानें भारत के इन 10 योगगुरुओं के बारे में?

1. बीकेएस अयंगर (1918 -2014)

1. बीकेएस अयंगर (1918 -2014)

बीकेएस अयंगर का पूरा नाम बेल्लूर कृष्णमचारी सुंदरराज अयंगार है। जिनका जन्म 14 दिसंबर 1918 को हुआ था और 20 अगस्त 2014 को इनका निधन हुआ। बीकेएस अयंगर एक विश्व प्रसिद्ध योग शिक्षक थे, अपनी योग शैली के लिए दुनियाभर मशहूर थे। उन्हें उनकी योग कला को देखते हुए "अयंगर योग" कहा जाता है। शरुआत में बीकेएस अयंगर ने योगा सिर्फ अपने शारीरिक स्वास्थ्य को सही करने के लिए किया लेकिन उन्हें धीरे-धीरे ये महसूस हो गया कि इसमें कई और बातें भी छिपी हैं। अयंगर ने राममणि अयंगर मेमोरियल योग संस्थान की भी स्थापना की है।

बीकेएस अयंगर ने एक बार कहा था, योग के अभ्यास से वह उस स्तर पर पहुंच गए थे, जहां उनके शरीर की सभी कोशिकाएं योग की घंटी बजाती थीं। वह शरीर और मन को कंट्रोल करने को लेकर बहुत उत्सुक थे।

अयंगर ने पुणे में त्योहारों के दौरान सड़कों पर प्रदर्शन करके योग का प्रचार किया और लाखों लोगों को प्रभावित किया। उनका कहना था कि "योग सभी के लिए है।" 50 के दशक के मध्य में जब रोगी अयंगर के पास अपनी समस्याओं को लेकर आते थे तो अयंगर उनकी त्वचा और आंखों को देखकर इलाज कर देते थे।

2. स्वामी कुवलयानंद (1883-1966)

2. स्वामी कुवलयानंद (1883-1966)

स्वामी कुवलयानंद का योग पर वैज्ञानिक अनुसंधान के अग्रदूत थे। जिनका जन्म से नाम जगन्नाथ गणेश गुने था। इनका जन्म गुजरात में 30 अगस्त 1883 को हुआ था। 1900 के दशक में स्वामी कुवलयानंद ने योग के साथ प्रयोग करना शुरू किया। उन्होने 1920 के दशक में योग पर वैज्ञानिक अनुसंधान प्रारम्भ किया। उन्होंने लोनावला में कैवल्यधाम स्वास्थ्य और योग अनुसंधान केंद्र की स्थापना की, जहां वह प्राचीन योग कला और परंपरा को आधुनिक विज्ञान जोड़कर प्रयोग करते थे।

स्वामी कुवलयानंद ने योग की वैज्ञानिक जांच के लिए पहली वैज्ञानिक पत्रिका भी शुरू की, जिसका नाम ''योग मीमांसा'' है। स्वामी कुवलयानंद महात्मा गांधी के स्वास्थ्य सलाहकार भी थे। स्वामी कुवलयानंद से पंडित मोतीलाल नेहरू, पंडित जवाहरलाल नेहरू, पंडित मदनमोहन मालवीय और कई अन्य प्रमुख हस्तियों ने योग सीखा है। स्वामी कुवलयानंद के प्रयासों ने पश्चिम में आधुनिक योग को भी काफी प्रभावित किया।

3. तिरुमलाई कृष्णमचार्य (1888-1989)

3. तिरुमलाई कृष्णमचार्य (1888-1989)

तिरुमलाई कृष्णमचार्य का जन्म 18 नवंबर 1888 में हुआ था। इन्हें आधुनिक योग का जनक' कहा जाता है। तिरुमलाई कृष्णमचार्य वैदिक परंपरा, योग शिक्षाओं और अभ्यास पर भारत के सबसे सम्मानित लोगों में से एक हैं। कृष्णमाचार्य "विनयसा" की अवधारणा को पेश करने वाले पहले योग गुरु थे।

तिरुमलाई कृष्णमचार्य को योग करने में ऐसी महारत हासिल थी कि उन्होंने एक बार दिल की धड़कन को एक मिनट से अधिक समय तक रोकने की अपनी क्षमता दिखाई थी। इस बात का खुलासा उनकी एक छात्रा इंद्र देवी ने की है।

कृष्णमाचार्य ने मैसूर के महाराजा और कई गणमान्य व्यक्तियों को भी योग सिखाया है। मैसूर के महाराजा की मदद से कृष्णमाचार्य ने मैसूर के जगनमोहन पैलेस में योगशाला की शुरुआत भी की थी। जिसको 20 सालों तक उन्होंने चलाया। बीकेएस अयंगर, इंद्रा देवी जैसे महान योगी तिरुमलाई कृष्णमचार्य के छात्र थे।

4. मीनाक्षी देवी भवानी उर्फ अम्माजी

4. मीनाक्षी देवी भवानी उर्फ अम्माजी

मीनाक्षी देवी भवानी पुदुचेरी में विश्व प्रसिद्ध योग शिक्षा और अनुसंधान केंद्र की निदेशक और आचार्य हैं। अंतरराष्ट्रीय योगगुरु महर्षि डॉ. स्वामी गीतानंद गिरि गुरु महाराज की मीनाक्षी देवी भवानी धर्मपत्नी और वरिष्ठ शिष्या हैं। मीनाक्षी देवी भवानी ने अपना पूरा जीवन स्वामी गीतानंद गिरि गुरु की शिक्षाओं और उनके द्वारा स्थापित संस्थानों को समर्पित कर दिया है।

मीनाक्षी देवी भवानी '' अम्माजी'' के नाम से लोकप्रिय हैं। वह योगगुरु के साथ-साथ भरत नाट्यम भी जानती हैं। मीनाक्षी देवी भवानी उर्फ अम्माजी को आधुनिक योग आंदोलन का प्रमुख माना जाता है।

5. बाबा रामदेव

5. बाबा रामदेव

योगगुरु बाबा रामदेव एक प्रसिद्ध योग शिक्षक हैं। बाबा रामदेव ने योग को सभी लोगों के लिए बहुत आसान बना दिया है। दुनियाभर में योग को बाबा रामदेव ने काफी बढ़ावा भी दिया है। उनके योग शिविरों में हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं। रामदेव का जन्म हरियाणा में हुआ है और उनका जन्म के बाद नाम रामकृष्ण यादव था। बाबा रामदेव संन्यासी का जीवन जीते हैं।

योगगुरु बाबा रामदेव ने उत्तराखंड के हरिद्वार से गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में प्राचीन भारतीय शास्त्रों का अध्ययन किया है। योग को बढ़ावा देने के लिए बाबा रामदेव ने 1995 में दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की। बाबा रामदेव के इस प्रयास में आचार्य करमवीर और आचार्य बालकृष्ण भी उनके साथ आगे आए। दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट का मुख्यालय हरिद्वार के कृपालु बाग आश्रम में है। बाबा रामदेव इस आश्रम में मुख्य रूप से योग सिखाते हैं।

6. स्वामी भारत भूषण

6. स्वामी भारत भूषण

स्वामी भारत भूषण का 30 अप्रैल 1952 को हुआ है। स्वामी भारत भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षाविद् पंडित बिशंबर सिंह के बेटे हैं। योग गुरु स्वामी भारत भूषण ने दुनियाभर में योग के मानवीय पहलू का प्रचार-प्रसार किया है। उनकी पहल "भारत योग" ने अमेरिका, चीन, जापान, ऑस्ट्रिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका समेत 70 देशों में योग का ज्ञान देता है।

21 साल की उम्र में स्वामी भारत भूषण ने 1973 में 'मोक्षयतन अंतर्राष्ट्रीय योगाश्रम' की स्थापना की। स्वामी भारत भूषण को 1991 में योग में उनके योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा उन्हें आधुनिक विवेकानंद, योग चक्रवर्ती, योग मार्तंड, भारत राष्ट्र रत्न, अर्जुन श्री, प्रताप श्री, योग के वैश्विक रत्न कई सम्मानों से नवाजा गया है।

7. सद्गुरु जग्गी वासुदेव

7. सद्गुरु जग्गी वासुदेव

सद्गुरु जग्गी वासुदेव एक भारतीय योगी और रहस्यवादी हैं। इसके अलावा सद्गुरु जग्गी वासुदेव एक लेखक, प्रेरक प्रवक्ता और आध्यात्मिक शिक्षक भी हैं। इनका जन्‍म 5 सितंबर को 1957 में कर्नाटक के मैसूर में हुआ है। सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने 'ईशा फाउंडेशन' की स्थापना की है। 'ईशा फाउंडेशन' एक गैर-लाभकारी संगठन है। ईशा फाउंडेशन दुनियाभर में योग कार्यक्रम कराता है। 'ईशा फाउंडेशन' विभिन्न सामाजिक और सामुदायिक विकास गतिविधियों में भी शामिल है।

8. बी.के. आशा उर्फ दीदी आशा

8. बी.के. आशा उर्फ दीदी आशा

बी.के. आशा एक आध्यात्मिक शिक्षिका हैं। जो दुनियाभर में आध्यात्म और योग का प्रचार कर चुकी हैं। वर्तमान में आशा दीदी दिल्ली-एनसीआर में स्थित ब्रह्मा कुमारियों के 'ओम शांति रिट्रीट सेंटर' की निदेशक हैं। ये सेंटर 30 एकड़ के परिसर में है। आशा दीदी राजयोग एजुकेशन रिसर्च फाउंडेशन की मेंबर भी हैं। इस संस्थान की मासिक पत्रिका 'प्यूरिटी' की एसोसिएट एडिटर भी हैं।

9. गुरुदेव श्री श्री रविशंकर

9. गुरुदेव श्री श्री रविशंकर

गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का जन्म 13 मई 1956 को दक्षिणी भारत में हुआ था। इन्हे एक मानवतावादी नेता और आध्यात्मिक शिक्षक के तौर पर जाना जाता है। उन्होंने आर्ट ऑफ लिविंग संस्था की स्थापना की है। इस संस्था की सेवा परियोजनाओं और कार्यक्रमों ने दुनिया भर के लाखों लोगों को एकजुट किया है।

कहा जाता है कि चार साल की उम्र में रविशंकर प्राचीन संस्कृत ग्रंथ भगवद गीता के कुछ हिस्सों को पढ़ लेते थे। छोटी उम्र से ही वह योग और ध्यान करते थे। गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के पहले शिक्षक सुधाकर चतुर्वेदी का महात्मा गांधी से काफी जुड़ाव था। 1973 में सिर्फ 17 साल की उम्र में रविशंकर ने वैदिक साहित्य और भौतिकी दोनों में डिग्री के साथ स्नातक किया था।

10. हंसाजी जयदेव योगेंद्र

10. हंसाजी जयदेव योगेंद्र

हंसाजी जयदेव योगेंद्र का जन्म 1947 में हुआ था। योगगुरु हंसाजी जयदेव योगेंद्र दुनिया के सबसे पुराने योग संस्थान जो कि सांताक्रूज मुंबई में है, उसकी निदेशक हैं। इस योग संस्थान की स्थापना हंसाजी जयदेव के ससुर योगेंद्र ने की थी। हंसाजी ने "योग फॉर ऑल" नामक एक पुस्तक भी लिखी है। हंसाजी एक शानदार प्रेरक वक्ता भी हैं।

हंसाजी जे योगेंद्र देश की पहली और एकमात्र महिला योग गुरु हैं, जिन्हे भारत सरकार आयुष मंत्रालय ने अंतराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर नई दिल्ली राजपथ में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था।

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