1 कमरा और 9 महिलाएं, बेहद पावरफुल मैसेज देती है काजोल की फिल्म 'देवी'

नई दिल्ली। जहां एक ओर पूरा देश निर्भया के दोषियों की फांसी का इंतजार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) की तैयारियां चल रही हैं। तीन बार फांसी टालने वाले इन दरिंदो से निर्भया की मां आशा देवी बीते 7 सालों से लड़ रही हैं। इस बीच अभिनेत्री काजोल की एक शॉर्ट फिल्म रिलीज हुई है। छेड़छाड़ और रेप जैसी खबरों को एक आम खबर समझने वालों की आंखें खोलने के लिए ये फिल्म काफी है।

9 महिलाओं की कहानी बताई जाती है

9 महिलाओं की कहानी बताई जाती है

फिल्म एक कमरे में शूट की गई है, जिसमें 9 महिलाओं की कहानी बताई जाती है। हालांकि कमरे में और भी कई महिलाएं मौजूद रहती हैं। करीब 13 मिनट की ये फिल्म हमारे समाज की वो तस्वीर पेश करती है, जिसे शायद ही कोई देखना चाहे। महिला केंद्रित इस फिल्म को प्रियंका बनर्जी ने डायरेक्ट किया है। फिल्म में काजोल के अलावा नेहा धूपिया, नीना कुलकर्णी, श्रुति हसन, शिवानी रघुवंशी, संध्या म्हात्रे, रमा जोशी, मुक्ता बार्वे, रश्विवनी दयामा जैसी अभिनेत्रियों ने काम किया है।

अलग-अलग पृष्ठभूमि से आई महिलाओं का संघर्ष

अलग-अलग पृष्ठभूमि से आई महिलाओं का संघर्ष

फिल्म 9 महिलाओं की कहानी दिखाती है, जिन्हें परिस्थितियों के चलते एक ही कमरे में समय बिताना पड़ रहा है। इस फिल्म के सहारे 9 अलग-अलग पृष्ठभूमि से आई महिलाओं के संघर्ष को दिखाया गया है। फिल्म की शुरुआत में काजोल पूजा का थाल हाथ में लिए दिखाई देती हैं, वहीं एक मानसिक तौर पर बीमार लड़की टीवी देख रही है। वो बार-बार अपने हाथ से रिमोट को झटकती है। बुजुर्ग महिलाओं में एक को मटर छीलते हुए दिखाया गया है और बाकियों को ताश खेलते हुए। एक शांति से दीवार से लगकर बैठी है, जबकि एक पढ़ाई कर रही है।

अमीर-गरीब सभी तरह की महिलाओं का किरदार

अमीर-गरीब सभी तरह की महिलाओं का किरदार

तभी टेलीविजन पर रेप की घटना दिखाई जा रही होती है और दरवाजे की घंटी बजती है। घंटी बजते ही सभी महिलाएं आपस में बहस करने लगती हैं कि एक कमरे में और कितनी महिलाओं को रखा जाएगा। फिर सभी एक-एक कर अपनी कहानी बताती हैं। कोई महिला मराठी बोलती है, तो कोई अंग्रेजी, एक महिला बुर्के में भी दिख रही है। फिल्म में अमीर-गरीब सभी तरह की महिलाओं के किरदार को दिखाया गया है। सभी एक-एक कर बताती हैं कि उनके साथ क्या हुआ था।

फिल्म क्या संदेश देती है?

फिल्म क्या संदेश देती है?

आखिर में फिल्म यही संदेश देती है कि रेप कभी भी किसी के भी साथ हो सकता है। चाहे फिर महिला की पृष्ठभूमि, उम्र, कपड़े, आर्थिक हालात, पहचान कुछ भी हो। फिल्म में दरवाजे की घंटे बजने से बताया गया है कि एक नया सदस्य दरवाजे के बाहर खड़ा है और अंदर आना चाहता है। महिलाएं इस एक कमरे को ही अपने लिए सुरक्षित मान रही हैं और बाहर नहीं जाना चाहतीं।

फिल्म का नाम देवी क्यों है?

फिल्म का नाम देवी क्यों है?

फिल्म का नाम 'देवी' इसलिए रखा गया है क्योंकि एक ओर तो हमारे देश में देवी की पूजा की जाती है और दूसरी ओर महिलाओं के साथ अत्याचार होता है। हालांकि फिल्म के आखिर में जो होता है, वो किसी का भी दिल तोड़ सकता है। क्योंकि जब दरवाजा खोला जाता है तो एक छोटी बच्ची अंदर आती है। जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है।

हर दिन रेप के 90 मामले

हर दिन रेप के 90 मामले

फिल्म के खत्म होने के बाद मैसेज में ये बताया जाता है कि भारतीय अदालतों में रेप के एक लाख से भी अधिक मामले निलंबित पड़े हैं। हर दिन रेप के 90 मामले दर्ज किए जाते हैं। रेप के मामलों में सजा दर केवल 32 फीसदी ही है। फिल्म के आखिर में ये बताया जाता है कि उस देश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की दर सबसे ज्यादा है, जहां 80 फीसदी से भी ज्यादा लोग देवी की पूजा करते हैं।

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