KBC पर टीम तारिणी, इंडियन नेवी ऑफिसर लेफ्टिनेंट कमांडर स्‍वाती,एक मेड की बेटी से नौसेना में अफसर बनने तक का सफर

मुंबई। कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी 10) में शुक्रवार को इंडियन नेवी की वे छह लेडी ऑफिसर्स शामिल थीं जिन्‍होंने हाल में समंदर के रास्‍ते पूरी दुनिया को नापा है। आईएनएसवी तारिणी की टीम केबीसी के मंच पर मेगास्‍टार अमिताभ बच्‍चे की ओर से पूछे गए सवालों के जवाब दे रही थी। उत्‍तराखंड के पौड़ी की रहने वाली लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी ने इस पूरे मिशन को लीड किया। कुल्‍लू की लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जामवाल, आंध्र प्रदेश की ल‍ेफ्टिनेंट कमांडर स्‍वाती पी, मणिपुर की लेफ्टिनेंट विजया देवी, तेलंगाना की लेफ्टिनेंट बी ऐश्‍वर्या और देहरादून की रहने वाली लेफ्टिनेंट पायल गुप्‍ता इस पूरे मिशन का हिस्‍सा थीं। इन छह लेडी ऑफिसर्स ने 254 दिनों में तीन महासागर, चार महाद्वीप और पांच देशों के चक्‍कर लगाए। इनमें से लेफ्टिनेंट कमांडर स्‍वाती पी की कहानी आपको जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती है।

मार्च पास्‍ट करते देखती थीं ऑफिसर्स को

मार्च पास्‍ट करते देखती थीं ऑफिसर्स को

लेफ्टिनेंट कमांडर स्‍वाती पी आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम की रहने वाली हैं। स्‍वाती जब बच्‍ची थीं तो अपने बेडरूम की खिड़की से अक्‍सर नेवी ऑफिसर्स को मार्च पास्‍ट करते देखती थीं। यह उनके पिता का सपना था कि बेटी, नेवी ऑफिसर की यूनिफॉर्म पहने।मां रानी और पिता अधिनारायाण विशाखापट्टनम के नेवल पार्क में एक नेवी ऑफिसर के घर पर हेड कुक का काम करते थे। स्‍वाती कहती हैं कि मां के गर्भ से ही उन्‍हें सेलिंग का ज्ञान मिलने लगा था। उनकी मां जब तीन माह की गर्भवती थीं और स्‍वाती उनकी कोख में थीं तो वह याट क्‍लब पर काम करती थीं।

माता-पिता का सपना पूरा

माता-पिता का सपना पूरा

अपनी बेटी को नेवी की यूनिफॉर्म में देखकर एक बार को तो मां रानी को भी यकीन नहीं हुआ। स्‍वाती का सपना डॉक्‍टर बनने का था और उन्‍होंने एक बार अपने सबजेक्‍ट्स बदलने की भी को‍शिश की। फिर उनके पिता के सपने ने उन्‍हें ऐसा करने से रोका और वह नेवी ऑफिसर बनने के लिए पढ़ाई करने लगीं। 11 वर्ष की उम्र में स्‍वाती नेशनल कैडेट कोर की नेवी विंग का हिस्‍सा बन चुकी थीं। तीन बहनों में सबसे छोटी स्‍वाती कहती हैं कि आज भी वह जब कभी यूनिफॉर्म पहनती हैं तो उनके पिता घर से निकलने से पहले उन्‍हें देखने का इंतजार करते हैं। स्‍वाती के माता पिता ने अपनी बेटियों की शिक्षा में कोई कमी नहीं रखी। स्‍वाती की मां ने बेटियों को बेहतर भविष्‍य देने के लिए बहुत मेहनत से काम किया।

कमजोर इंग्लिश की वजह से थी घबराहट

कमजोर इंग्लिश की वजह से थी घबराहट

स्‍वाती बताती हैं कि घर में पैसों की दिक्‍कतों के बाद भी उनके माता-पिता ने मलकापुरम में किराए का घर लिया था। जब लोग शादी की बात करते तो उनके माता-पिता ने अपनी बेटियों को बेहतर शिक्षा और आत्‍मनिर्भर बनाने के बारे में सोचते थे। ग्रेजुएशन तक स्‍वाती की इंग्लिश भी अच्‍छी नहीं थी लेकिन उनके पिता उन्‍हें नेवी में देखना चाहते थे तो इसके लिए भी उन्‍होंने कड़ी मेहनत की। स्‍वाती 85 प्रतिशत तक नंबर लाती रहीं। स्‍वाती ने पहले ही प्रयास में एसएसबी क्लियर कर लिया था। इंटरव्‍यू में स्‍वाती ने बताया कि उनकी इंग्लिश अच्‍छी नहीं हे तो उन्‍हें कहा गया कि यहां पर उनका अं‍ग्रेजी का टेस्‍ट नहीं हो रहा है। साढ़े बीस वर्ष की आयु में नेवी ज्‍वॉइन करने वाली स्‍वाती सबसे कम उम्र की महिला ऑफिसर बनीं।

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