Insha Mushtaq: कश्मीर में पैलेट गन ने छीनी थी आंखों की रोशनी, अब इंशा मुश्ताक ने 12वीं पास कर पेश की मिसाल

जम्मू-कश्मीर में जुलाई 2016 में पैलेट गन की वजह से इंशा मुश्ताक की आंखों की रोशनी चली गई थी। लेकिन अब इंशा मुश्ताक ने 12वीं में 73 प्रतिशत नंबर लाकर इतिहास रच दिया है।

Insha Mushtaq News: जम्मू-कश्मीर में पैलेट गन पीड़ितों का चेहरा बनीं इंशा मुश्ताक इन दिनों सुर्खियों में हैं। 2016 में अपनी आंखों की रोशनी गंवाने वाली इंशा मुश्ताक ने 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 73 प्रतिशत नंबर लाकर पास हुई है और लोगों के सामने मिसाल पेश की है।

इंशा मुश्ताक अब सिविल सेवा की परीक्षा देने की तैयारी करना चाहती हैं। 22 इंशा मुश्ताक ने कहा, ''जीवन में बहुत सारी चुनौतियां हो सकती हैं, लेकिन किसी को कभी हार नहीं माननी चाहिए।''

Insha Mushtaq

इंशा ने 12वीं कक्षा में समाजशास्त्र, शिक्षा, इतिहास, फिजिकल एजुकेशन और अंग्रेजी की पढ़ाई की। इंशा को 12वीं में 500 में से 367 अंक मिले हैं।

जुलाई 2016 में हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला तेज हो गया था। इसी विरोध प्रदर्शन के दौरान 9वीं क्लास में पढ़ने वाली इंशा मुश्ताक अपनी खिड़की से झांक रही थी, उसी वक्त सुरक्षा बलों द्वारा दागे गए धातु के छर्रों ने उसकी आंखों की रोशनी ले ली, उसकी खोपड़ी फ्रैक्चर हो गई। उसका चेहरा बिगड़ गया।

पांच महीने की अशांति में सैकड़ों लोगों ने पैलेट गन के घावों का सामना किया। इंशा मुश्ता ऐसे पीड़ितों की दुर्दशा का चेहरा बन गईं क्योंकि उनकी तस्वीरों की सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी।

इस घटना के बाद इंशा ने कई महीने अस्पतालों और ट्रॉमा सेंटरों के चक्कर काट कर गुजारे। इंशा ने कहा, "शुरुआत में मेरा इलाज श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल में हुआ, फिर मैं चार महीने के लिए दिल्ली के ट्रॉमा सेंटर चली गई और एक महीना मुंबई में भी बिताया।"

इन परेशानियों के बीच भी इंशा ने हिम्मल नहीं हारी। अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए उत्सुक इंशा ने डीपीएस में ब्रेल, कंप्यूटर और अंग्रेजी सीखना शुरू किया। ब्रेल पद्धति एक तरह की लिपि है, जिसको विश्व भर में नेत्रहीनों को पढ़ने और लिखने में काम आता है।

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इंशा ने कहा, ''ब्रेल मेरे लिए पूरी तरह से अजनबी था और मैं रोते हुए घर आती थी, लेकिन मेरे शिक्षकों ने मुझे प्रोत्साहित किया और मुझे सीखने में मदद की।'' इस नए जीवन के साथ तालमेल बिठाने का संघर्ष के बीच इंशा ने 2017 में अपनी कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में एक लेखक के साथ बैठी और इसे पास करने के बाद डीपीएस में शामिल हो गई।

इंशा ने कहा, ''जैसे ही परिणाम घोषित किए गए, मैं शुरू में रोई क्योंकि मुझे लगा कि मैं बेहतर प्रदर्शन करूंगी, लेकिन फिर मेरे माता-पिता ने मुझे बताया कि मैंने कई छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया है।''

इंशा ने कहा, 'मेरे परिवार वालों ने मुझे कभी भी उम्मीद नहीं खोने की प्रेरणा दी है। उन्होंने मुझे कहा, मैं ये कर सकती हूं और मैंने कर दिखाया। मुझे बहुत सी चुनौतियों और समस्याओं का सामना करना पड़ा जिसका मैंने सामना किया और आगे बढ़ी।''

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12वीं कक्षा की परीक्षा की तैयारी करते हुए, उन्होंने न केवल ब्रेल का इस्तेमाल किया, बल्कि रिकॉर्ड किए गए नोट्स का भी इस्तेमाल किया। इंशा ने कहा "मैं नोट्स रिकॉर्ड करती थी और फिर उन्हें एडिटे करने के लिए लैपटॉप पर सुनती थी।''

इंशा ने जम्मू एंड कश्मीर सेंटर फॉर पीस एंड जस्टिस की तारीफ भी की है। 2018 से ये संगठन इंशा के पढ़ाई का खर्च उठा रहा है। इंशा ने कहा, ''उन्होंने मुझे फिस से पढ़ने की हिम्मत दी क्योंकि शुरू में, मैं निराश और अनजान थी।''

इंशा ने कहा, ''मैंने एक आईएएस अधिकारी से भी मुलाकात की थी, जिसकी आंखों से रोशनी भी चली गई थी। मैं स्नातक करूंगी और फिर आईएएस कोचिंग के लिए जाऊंगी।''

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