भारतीय नौसेना में शामिल हो रहा INS Nistar, स्वदेशी DSV ड्रैगन की हर चाल पर पड़ेगा भारी, जानिए खासियत?
INS Nistar: भारतीय नौसेना (Indian Navy) के इतिहास में 18 जुलाई (शुक्रवार) को एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। विशाखापत्तनम में पहला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) INS निस्तार (INS Nistar) को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा।
स्वदेशी INS निस्तार का निर्माण हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम द्वारा किया गया है। नेवल डॉकयार्ड विशाखापत्तनम में तैयार किया गया ये पहला डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) है। आईएनएस निस्तार की कमीशनिंग रक्षा निर्माण में भारत की 'आत्मनिर्भरता' की दिशा में एक बड़ा कदम है।

हाल के दिनों में हिंद महासागर में चीनी जासूसी पनडुब्बियों की मौजूदगी की खबरें आई हैं। ऐसे स्थिति में 'INS निस्तार' दुश्मन की पनडुब्बियों की निगरानी करने में भी काफी उपयोगी होगा। यह जहाज 60 दिनों से अधिक समय तक लगातार समुद्र में रहने में सक्षम है।
INS Nistar की क्या है खासियत?
संस्कृत से लिया गया नाम 'निस्तार' मुक्ति, बचाव या मोक्ष का प्रतीक है। आईएनएस निस्तार पोत गहरे समुद्र में डाइविंग ऑपरेशन में सक्षम है और पनडुब्बी बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। INS निस्तार डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू वेसल (DSRV) के लिए 'मदर शिप' के रूप में भी काम करेगा।
यह समुद्र के भीतर पनडुब्बी में किसी भी इमरजेंसी में फंसे कर्मियों को बचाने और उन्हें निकालने में सहायक होगा। यह पोत कई डेक पर फैले एक एडवांस डाइविंग कॉम्प्लेक्स से लैस है और डाइविंग मिशन का समर्थन करने के लिए एडवांस सिस्टम है।
आईएनएस निस्तार का वजन 10,500 टन से अधिक है, और पोत लगभग 120 मीटर लंबा और 20 मीटर चौड़ा है ।एडवांस गोताखोरी उपकरणों से तैयार किया गया ये पोत 300 मीटर की गहराई तक गहरे समुद्र में सैचुरेशन डाइविंग करने में सक्षम है।
'निस्तार' में 75 मीटर की गहराई तक गोताखोरी करने के लिए एक साइड डाइविंग स्टेज भी है। इसके अलावा पानी के भीतर रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV), साइड स्कैन सोनार और 15 टन की सबसी क्रेन इसे और खास बनाती है। निस्तार में हेलीकॉप्टर संचालन की क्षमता भी है।
कमीशनिंग के बाद, यह पोत गहरे समुद्र में डाइविंग और पनडुब्बी बचाव कार्यों का समर्थन करने के लिए पूर्वी नौसेना कमान में शामिल हो जाएगा।
अपने पहले के अवतार में, यह पोत एक पनडुब्बी बचाव पोत था जिसे 1969 में पूर्व सोवियत संघ से खरीदा गया था और 1971 में कमीशन किया गया था।
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