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औद्योगिक रूप से भी एक विकसित प्रदेश बनने की दिशा में अग्रसर हुआ हरियाणा

देश के उत्तरी भाग में स्थित, एक मज़बूत और बहुआयामी अर्थव्यवस्था वाला समृद्ध राज्य हरियाणा शुरू से ही एक कृषि प्रधान प्रदेश रहा है जिसकी 70 प्रतिशत आबादी कृषि कार्यों में लगी है लेकिन राज्य के विकास के लिए उद्योगों का भी निरंतर विस्तार किया जा रहा है।

हरियाणा देश के सबसे बड़े ऑटोमोबाईल उत्पादन क्षेत्रों में से एक है, जहां देश भर के 67 प्रतिशत कार, 60 प्रतिशत दोपहिया वाहन, 50 प्रतिशत ट्रैक्टर और 50 प्रतिशत रेफ्रिजरेटरों का उत्पादन होता है। इंडस्ट्रियल मैन्‌युफैक्चरिंग के अलावा हरियाणा, नॉलेज इंडस्ट्री का भी केंद्र है जहां कई बायोटेक्नॉलॉजी कंपनियां, आईटी पार्क और इंनफोर्मेशन टेक्नॉलॉजी एनेबल्ड सर्विसिस जैसी कंपनियां कार्यरत हैं।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही मे किए रेवाड़ी दौरे के दौरान हरियाणा राज्य को शहरी परिवहन, स्वास्थ्य, रेलवे और पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए 9750 करोड़ रुपये से भी अधिक धन-राशि की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री ने करीब 5450 रुपए की लागत से बनने वाली गुरूग्राम मेट्रो रेल परियोजना की आधारशिला भी रखी थी। इसके अतिरिक्त, देश भर में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने के लिए, केंद्र सरकार हरियाणा के रेवाड़ी में भी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी AIIMS के निर्माण कार्य शुरू करने की भी घोषणा कर चुकी है।

यही नहीं, हरियाणा सरकार ने राज्य के विकास के लिए कई इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप यानी IMT और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई क्लस्टर भी विकसित किए हैं। हरियाणा के सबसे बड़े औद्योगिक शहरों मे से एक, फरीदाबाद में भी आईएमटी विकसित किया जा रहा है, जहां कई बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां मौजूद हैं।

फरीदाबाद के अतिरिक्त, मानेसर को भी ऑटोमोटिव और इंजीनियरिंग हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। राज्य सरकार ने स्पेशल इकॉनोमिक ज़ोन में विश्वस्तरीय सुविधाएं मुहैया कराने के लिए भारी निवेश किया है।

वेस्टर्न फ्राइट कॉरीडोर से होगा हरियाणा के उद्योग जगत को लाभ

विनिर्माण क्षेत्र और उद्योगों की सफलता के लिए माल का समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचना बेहद ज़रूरी है जिसके लिए परिवहन सुविधाएं एक अहम भूमिका निभाती हैं। आर्थिक विकास और माल की सुरक्षित आवाजाही के लिए सरकार ने कुंडली-मानेसर-पलवल यानी केएमपी कॉरीडोर विकसित किया है।

इसके अलावा, केंद्र सरकार 1506 किलोमीटर पश्चिमी माल ढुलाई गलियारा यानी Western DFC भी विकसित कर रही है, जिससे उत्तर प्रदेश के दादरी को महाराष्ट्र के नवी मुंबई स्थित जवाहर लाल नेहरू बंदरगाह से जोड़ा जाएगा। इस रूट में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के अलावा हरियाणा, राजस्थान और गुजरात राज्य भी शामिल होंगे। इस कॉरीडोर के पूरा होने के बाद हरियाणा समेत अनेक राज्यों से उत्पादों का परिवहन सस्ता, सुरक्षित और आसान हो जाएगा।

पिछले दस सालों में, हरियाणा राज्य ने मानव विकास और औद्योगिक प्रगति दोनों क्षेत्रों में बहुत उन्नति की है। राज्य सरकार ने अपने लिए एक महत्वाकांक्षी एजेंडा निर्धारित किया है, जिसका लक्ष्य साल 2030 तक हरियाणा से अत्यधिक गरीबी को खत्म करना, पुरुषों और महिलाओं के बीच बेरोज़गारी के अंतर को पाटना और औद्योगिक क्षेत्र में करीब 18 लाख लोगों के लिए रोज़गार के अवसर मुहैया कराना, साथ ही 50 हज़ार दिव्यांगजनों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाना है।

केंद्र सरकार के सहयोग, समर्थन और दिशानिर्देश के साथ हरियाणा सरकार न सिर्फ राज्य को बल्कि देश को भी आर्थिक समृद्धि की ओर ले जाने में सहायक भूमिका निभा रही है।

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