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Indresh Upadhyay: सिर पर ‘चांदी का लोटा’ रख ससुराल में दुल्हन शिप्रा की एंट्री क्यों? छुपा है बड़ा राज!

Indresh Upadhyay Wedding Bride Shipra Sharma: प्रसिद्ध भागवत कथावाचक पंडित कृष्णचंद शास्त्री ठाकुर जी के सुपुत्र और युवा कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय जी अब वैवाहिक जीवन में बंध चुके हैं। 5 दिसंबर 2025 को वैदिक विवाह हरियाणा के यमुनानगर की शिप्रा शर्मा के साथ राजस्थान की पिंक सिटी जयपुर में धूमधाम से संपन्न हुआ। दिन में पूर्ण वैदिक विधि-विधान से फेरे हुए गए, तो रात में भव्य आशीर्वाद समारोह हुआ, जिसमें देशभर से पधारे साधु-संत, कथावाचक और कई जानी-मानी हस्तियों ने नवदंपति को आशीर्वाद दिया।

लेकिन शादी के सारे वीडियो में सबसे ज्यादा वायरल हो रहा है दुल्हन शिप्रा शर्मा का ससुराल गृह-प्रवेश का दृश्य - जिसमें वे सिर पर चांदी का चमकता कलश (लोटा) रखकर, घूंघट किए, लाल-सिंदूरी बनारसी साड़ी में प्रवेश कर रही हैं। सोशल मीडिया पर लाखों लोग यही पूछ रहे हैं - 'सिर पर लोटा रखकर दुल्हन क्यों आई? ये कौन-सी रस्म है?'

Indresh Upadhyay Wedding

सिर पर कलश रखने की वैदिक परंपरा और इसका गहरा अर्थ

हिंदू संस्कृति में दुल्हन को 'गृह-लक्ष्मी' कहा जाता है। गृह-प्रवेश के समय सिर पर कलश रखवाने की यह प्राचीन परंपरा खासतौर पर उत्तर भारत, राजस्थान, हरियाणा और ब्रज क्षेत्र में प्रचलित है। इसके पीछे कई गहरे धार्मिक और आध्यात्मिक अर्थ छिपे हैं:-

Indresh Upadhyay wedding

1. दुल्हन - घर में आने वाली मां लक्ष्मी

कलश को धन-धान्य, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। सिर पर कलश रखकर दुल्हन प्रवेश करती है तो मानो स्वयं मां लक्ष्मी घर में पदार रही हों।

2. संतुलन और धैर्य का प्रतीक

सिर पर कलश रखकर चलना आसान नहीं होता। यह दर्शाता है कि नई दुल्हन जीवन की सभी जिम्मेदारियों को संतुलन और धैर्य के साथ निभाने के लिए तैयार है।

Indresh Upadhyay wedding

3. मां गौरी-परंपरा का आशीर्वाद

कलश को मां पार्वती और मां गौरी का स्वरूप माना जाता है। सिर पर कलश रखना मतलब नवविवाहिता इन देवियों का आशीर्वाद लेकर नए घर में कदम रख रही है।

4. पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार

कलश में जल, सुपारी, दूर्वा और सिक्के आदि रखे जाते हैं जो घर में शुद्धता और सकारात्मकता लाते हैं।

वीडियो में दिखा स्वर्ग जैसा गृह-प्रवेश

इंद्रेश उपाध्याय जी के घर का गृह-प्रवेश का नजारा किसी स्वर्ग के द्वार सा था:-

  • मुख्य गेट से लेकर घर तक पूरा रास्ता लाल कार्पेट से ढका था
  • ऊपर से घना फॉग (धुआं) छोड़ा गया था, जैसे नवदंपति बादलों पर चल रहे हों
  • दोनों तरफ खड़ी सखियों-सहेलियों ने नीले रंग के चमकते कमल-आकार की लाइटें थामी हुई थीं
  • जैसे ही दूल्हा-दुल्हन अंदर आए, चारों तरफ फूलों की वर्षा और आतिशबाजी शुरू हो गई
  • घर पर केसरिया ध्वजाएं लहरा रही थीं जो परिवार की आध्यात्मिक परंपरा को दर्शा रही थीं

दूल्हा-दुल्हन का पारंपरिक लुक

  • इंद्रेश उपाध्याय जी ने पीच-ऑरेंज शेड की भारी एम्ब्रॉयडरी वाली शेरवानी पहनी थी, गले पर लाल स्टोल और सिर पर केसरिया साफा
  • दुल्हन शिप्रा शर्मा गुलाबी-सिंदूरी रंग की हैवी बनारसी सिल्क साड़ी में थीं, लाल ट्रांसपेरेंट दुपट्टा, मेहरून-गोल्ड बॉर्डर, मिनिमल ज्वेलरी और घूंघट में सिर पर चांदी का चमकता कलश - पूरा लुक एकदम वैदिक गौरी स्वरूप का था।

इंद्रेश उपाध्याय जी की यह शादी न सिर्फ दो परिवारों का मिलन थी, बल्कि वेद-पुराण और भारतीय परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन भी थी। नवदंपति को ढेर सारी शुभकामनाएं!

ये भी पढ़ें- Kathavachak Indresh Upadhyay की दुल्हन कौन? घोड़े पर सवार बारात लेकर मथुरा से जयपुर पहुंचे, जानें Guest List

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