IndiGo Flight Inside Story: इंडिगो फ्लाइट के 227 यात्रियों ने कैसे दी मौत को मात! आसमान में क्या-क्या हुआ?
IndiGo Flight Inside Story: 21 मई 2025 (बुधवार) की शाम दिल्ली से श्रीनगर की ओर जा रही इंडिगो की फ्लाइट IGO262E में सवार 227 यात्री बिल्कुल अनजान थे कि उन्हें एक ऐसा हादसा झेलना पड़ेगा, जो उनकी जिंदगी में डर और हिम्मत दोनों का असली मतलब समझा देगा।
दरअसल, उस शाम दिल्ली के मौसम का मिजाज बदला हुआ था। धूलभरी आंधी व बारिश के साथ ओले गिर रहे थे। खराब मौसम की वजह से यह फ्लाइट उस दिन भयंकर एयर टर्बुलेंस (आसमान में) की मार से घिर गई, जिसने एक मिनट से भी कम वक्त में विमान को 1200 मीटर यानी करीब एक किलोमीटर नीचे गिरा दिया। यह सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि उस उड़ान के अंदर के उन पलों की कहानी है जब मौत और जिंदगी के बीच की लड़ाई चल रही थी।

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जब अचानक आसमान ने छीना सुकून
शाम के 5:57 बजे यह फ्लाइट भारत के आसमान में 35,825 फीट की ऊंचाई थी। यात्रियों को लग रहा था कि वे अपनी मंज़िल के करीब हैं, लेकिन अचानक एक जोरदार झटका लगा। अगले ही मिनट यानी 5:58 बजे विमान की ऊंचाई गिरकर 31,950 फीट पर आ गई। यानी विमान एक मिनट में करीब 3,875 फीट नीचे जा गिरा था। इस बीच यात्रियों के चेहरों पर डर साफ झलकने लगा।
यात्रियों ने इस डरावने पल को वीडियो में रिकॉर्ड किया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। उसमें देखा जा सकता है कि तब किसी ने चिल्लाना शुरू किया, किसी की सांसें तेज हो गईं, और केबिन में अचानक सन्नाटा छा गया। सीट बेल्ट की घंटी बज उठी, और कई लोग कुर्सियों से ऊपर झूल गए। पायलटों को पता था कि यह सामान्य टर्बुलेंस नहीं, बल्कि भयानक हेलस्टॉर्म की मार है। मतलब फ्लाइट भयंकर तूफान में फंस चुकी थी।
पायलटों की जंग और हिम्मत
विमान की नीचे गिरने की रफ्तार इतनी तेज थी कि आम तौर पर एयरबस 321 नियो विमान को सुरक्षित माना जाने वाला डिसेंट रेट लगभग 1500 से 2000 फीट प्रति मिनट होता है, लेकिन उस वक्त ये 8500 फीट प्रति मिनट तक पहुंच गया था। ऑटोपायलट सिस्टम को तुरंत बंद करके पायलटों ने खुद मैन्युअली नियंत्रण संभाला।

फ्लाइट कैप्टन और को-पायलट के बीच बत्तियां जलने लगीं, तेज आवाजें आईं, और उस हवा के बीच विमान को स्थिर करना आसान नहीं था। उन्होंने लगातार भारतीय वायुसेना के नियंत्रण केंद्र से संपर्क बनाए रखा। कई बार विमान को झटके लगे, लेकिन वे हर बार हिम्मत से विमान को संभालते रहे।
रास्ता बदलने की बेशुमार कोशिशें
पायलटों ने खराब मौसम से बचने के लिए भारत के उत्तरी नियंत्रण केंद्र से पाकिस्तान की सीमा की तरफ मार्ग बदलने की अनुमति मांगी, लेकिन सुरक्षा कारणों से मना कर दिया गया। इसके बाद लाहौर एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने भी भारतीय विमान को हवाई क्षेत्र में प्रवेश की इजाजत नहीं दी।
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दरअसल, बात यह थी कि हाल ही में पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था, जिसके बाद पाकिस्तान ने अपने हवाई क्षेत्र को भारत के लिए बंद कर रखा था। इस वजह से कोई वैकल्पिक रास्ता न मिल पाने की दुविधा में पायलट उलझे हुए थे।
शुरू में उन्होंने दिल्ली लौटने की योजना बनाई, लेकिन खराब मौसम के बावजूद उन्होंने हिम्मत दिखाई और श्रीनगर के लिए उड़ान जारी रखने का साहसिक फैसला लिया।
भारतीय वायुसेना ने संभाला मोर्चा
इसी बीच भारतीय वायुसेना ने विमान की नेविगेशन में मदद की। उन्होंने दिल्ली एयर कंट्रोल सेंटर के माध्यम से लाहौर एयर कंट्रोल की फ्रीक्वेंसी उपलब्ध कराई, ताकि पायलट वहां से संपर्क कर सकें।
जब लाहौर ने अनुमति न दी तो भारतीय वायुसेना ने विमान को सही दिशा में मार्गदर्शन दिया। वे लगातार पायलटों को रफ्तार और दिशा की जानकारी देते रहे। यह एक जीवंत लड़ाई थी, जहां न केवल मौसम से, बल्कि मानवीय और राजनीतिक बाधाओं से भी जूझना पड़ रहा था।
आखिरकार सुरक्षित लैंडिंग और राहत की सांस
बेशक, विमान में लगे तेज झटकों और असामान्य नीचे आने की गति ने यात्रियों की हिम्मत तो डगमगा दी, लेकिन चालक दल की काबिलियत और एयरफोर्स की त्वरित सहायता ने अंततः विमान को सुरक्षित श्रीनगर एयरपोर्ट पर उतारा। 227 यात्री जिनकी जान जोखिम में थी, सभी सकुशल उतरे। इस आपदा के बाद DGCA ने बताया कि पायलटों ने विमान को मैन्युअली नियंत्रित किया और सुरक्षा को प्राथमिकता दी।

इंडिगो फ़्लाइट 6E-2142 का आगे का हिस्सा टूटा
जब इंडिगो फ़्लाइट 6E-2142 भंयकर ओलों में फंसी तो उसके आगे का हिस्सा टूट गया था। उसके बाद Indigo ने प्लेन को AOG घोषित कर दिया है। AOG यानि एयरक्राफ्ट ऑन ग्राउंड का मतलब है कि प्लेन तकनीकी समस्याओं के कारण ग्राउंडेड है और उड़ान भरने में समक्ष नहीं है।
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु का बयान
इस घटना पर नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने कहा कि "हम इस घटना की जांच कर रहे हैं। DGCA की टीम मामले की पूरी छानबीन कर रही है। मैं पायलटों और क्रू की बहादुरी और दक्षता की सराहना करता हूं। यह खुशी की बात है कि कोई घायल नहीं हुआ। जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि कोई लापरवाही पाई गई तो उचित कार्रवाई की जाएगी।"
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