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लॉकडाउन में भारतीय वायरस से कम चिंतित हैं, जानिए उनकी चिंता की बड़ी वजह क्या है?

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नई दिल्ली। गत 18 मई को भारत एक बार राष्ट्रव्यापी लॉकडान 4.0 में प्रवेश कर चुका है, जिसकी मियाद 31 मई रखी गई है, लेकिन पिछले लगभग दो महीने में लॉकडाउन में भारतीयों की मनोदशा को जानने के लिए किए गए ताजा अध्ययन में जो बात उभर कर सामने आई है, वह चौंकाने वाली हैं।

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सेंटर फॉर मार्केटिंग इन इमर्जिंग इकोनॉमीज़ (CMEE) द्वारा किए एक अध्ययन से पता चला है कि 79 फीसदी लोग चिंतित हैं और 40 फीसदी भय की मनोदशा में हैं और करीब 22 फीसदी लोगों को लॉकडाउन ने उदासी में डाल दिया है। लॉकडाउन के दौरान सार्वजनिक भावना को समझना विषय पर आयोजित अखिल भारतीय ऑनलाइन अध्ययन आईआईएम लखनऊ में किया गया।

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अध्ययन में शामिल अधिकांश लोगों की चिंता विषय संक्रमित होने की कम था, बल्कि उनके चिंता या अवसाद का सबसे बड़ा कारण लॉकडाउन में पैदा हुई आर्थिक सकंट था। इस अध्ययन के प्रतिभागियों ने 23 राज्यों और 104 शहरों को शामिल किया, इनमें महानगरों, टियर -1 और टियर -2 शहर भी शामिल थे।

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यह शोध अध्ययन आईआईएम के कर्मचारियों द्वारा क्वालिस रिसर्च एंड कंसल्टिंग के पेशेवरों के साथ-साथ डेटा इनसाइट्स कंपनी कंतार के पूर्व कार्यकारी के साथ संचालित किया गया था। अध्ययन अंग्रेजी में फेसबुक, लिंक्डइन आदि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर ऑनलाइन संचालित किया था, जिसमें लगभग 931 उत्तरदाता शामिल हुए थे।

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इस अध्ययन में भारत भर से एक निष्पक्ष प्रतिनिधि नमूना को कवर करने के लिए स्नोबॉलिंग सैंपलिंग मेथड्स का उपयोग किया गया था अध्ययन में लॉकडाउन 1.0 और 2.0 अवधि (25 मार्च से 3 मई) को ही कवर किया गया।

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आर्थिक गतिविधियों की अनुपस्थिति का सबसे अधिक कार्यबल पर पड़ेगा

आर्थिक गतिविधियों की अनुपस्थिति का सबसे अधिक कार्यबल पर पड़ेगा

नोएडा के एक 48 वर्षीय पेशेवर ने कहा कि आर्थिक गतिविधियों की अनुपस्थिति का सबसे अधिक कार्यबल पर पड़ेगा, जिससे लोगों की नौकरी जाएगी, उनकी आय में कोई सुधार नहीं होगा और कीमतें आसमान पर पहुंचेंगी।

 22 वर्षीय छात्र ने कहा, 'हम अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं'

22 वर्षीय छात्र ने कहा, 'हम अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं'

जबलपुर के एक 22 वर्षीय छात्र ने कहा, हम अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि यह महामारी कम से कम कुछ वर्षों के लिए हमारे अवसरों को पीछे कर सकती है। उसने आगे कहा, महामारी के कारण पैदा हुई परिस्थितियां वर्तमान और भविष्य के कई योग्य उम्मीदवारों के करियर को बुरी तरह से तबाह कर सकता है।

60 फीसदी ने महामारी को रोकने की भारत की क्षमता पर विश्वास जताया

60 फीसदी ने महामारी को रोकने की भारत की क्षमता पर विश्वास जताया

हालांकि चिंताओं के बावजूद करीब 60 फीसदी लोगों ने महामारी के प्रसार को रोकने के लिए भारत की क्षमता पर विश्वास व्यक्त किया। सरकार द्वारा किए गए उपायों मसलन लॉकडाउन, सोशल डिस्टेंसिंग और कांट्रेक्ट ट्रेसिंग उनके विश्वास के प्रमुख कारण थे।

लॉकडाउन 1.0 के दौरान लोगों में 57 फीसदी बढ़ा भरोसे का स्तर

लॉकडाउन 1.0 के दौरान लोगों में 57 फीसदी बढ़ा भरोसे का स्तर

लॉकडाउन 1.0 के दौरान 57 फीसदी बढ़ा भरोसे का स्तर लॉकडाउन 2.0 के दौरान बढ़कर 63 फीसदी हो गया, क्योंकि मास्क, पीपीई किट आने और बेहतर प्रोटोकॉल सेट होने की खबर के साथ स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ था।

अभूतपूर्व लॉकडाउन उपायों के कारण अन्य देशों की तुलना में हम बेहतर

अभूतपूर्व लॉकडाउन उपायों के कारण अन्य देशों की तुलना में हम बेहतर

मुंबई के एक 50 वर्षीय सॉफ्टवेयर पेशेवर का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा किए गए अभूतपूर्व लॉकडाउन उपायों के कारण कई अन्य देशों की तुलना में हमें बेहतर तरीके से Covid-19 से उबरने में सक्षम होना चाहिए।

अध्ययन के दौरान एक बड़ा हिस्सा आत्मविश्वास से नहीं भरा था

अध्ययन के दौरान एक बड़ा हिस्सा आत्मविश्वास से नहीं भरा था

अध्ययन के दौरान एक बड़ा हिस्सा (40 प्रतिशत) आत्मविश्वास से नहीं भरा था, क्योंकि उनका मानना ​​है कि सरकारी दिशानिर्देशों के साथ जनता का अनुपालन के साथ वायरस के फैलने पर देश के स्वास्थ्य ढांचे की तैयारी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ था।

भारत में सोशल डिस्टेंसिग का पालन नहीं किया जा रहा हैः अध्ययन

भारत में सोशल डिस्टेंसिग का पालन नहीं किया जा रहा हैः अध्ययन

मुंबई के एक 33 वर्षीय कामकाजी पेशेवर कहते हैं, लॉकडाउन को लेकर भले ही सरकार की मंशा अच्छी थी, लेकिन लोग स्थिति की गंभीरता को नहीं समझते हैं। मैं आसानी से लोगों को घूमते हुए देख सकता हूं। सोशल डिस्टेंसिग का पालन नहीं किया जा रहा है। राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के बाद भी हर किसी को जोखिम में डालते हुए प्रवासी एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा रहे हैं।

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English summary
A study conducted by the Center for Marketing in Emerging Economies (CMEE) showed that 79 percent of people are anxious and 40 percent are in a mood of fear and the lockdown has left about 22 percent of people depressed. During the lockdown, an all-India online study on the subject to understand public sentiment was conducted at IIM Lucknow.
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