'बंदूकधारी ने पूछा- तुम हमारी जंग में शामिल क्यों नहीं होते': स्वदेश लौटे छात्र ने बयां किया यूक्रेन का मंजर

कीव, 03 मार्च। यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को युद्धग्रस्त देश से बाहर निकालने के लिए भारत सरकार पूरी कोशिश कर रही है। अब तक हजारों की संख्या में भारतीय यूक्रेन से अपने देश पहुंच चुके हैं तो वहीं कई लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। यूक्रेन में सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए छात्र रेलवे स्टेशन पर पहुंच रहे हैं, लेकिन आरोप है कि यूक्रेनी सैनिक उन्हें ट्रेन में चढ़ने नहीं दे रहे और मार पीट कर रहे हैं। इस बीच एक छात्र ने बताया कि यूक्रेनी गार्ड उनसे युद्ध में शामिल होने के लिए पूछ रहे हैं।

भारत लौटे यूक्रेन में फंसे छात्र

भारत लौटे यूक्रेन में फंसे छात्र

यूक्रेन के उजहोरोड नेशनल यूनिवर्सिटी में दो साल से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे कोलकाता निवासी हमजा कबीर ने यूक्रेन के हालात बयां किए। उन्होंने कहा, 'वहां के लोग बहुत अच्छे हैं।' शायद यही कारण है कि उन्हें उस 'बैर भाव' के लिए कभी भी तैयार नहीं था जिसका उन्होंने सामना किया जब वह हंगरी की सीमा के माध्यम से बस में देश छोड़ रहे थे। इन बसों का इंतजाम उन्हीं के विश्वविद्यालय ने किया था।

हमारे साथ जंग क्यों नहीं लड़ते?

हमारे साथ जंग क्यों नहीं लड़ते?

कबीर ने कहा, 'बॉर्डर पर चेकिंग हो रही थी, हम बस में इंतजार करते रहे। यूक्रेनी गार्ड ने हमसे कहा कि आप खाना खरीद सकते हैं, वॉशरूम का इस्तेमाल कर सकते हैं...'। इन सब के बीच हमें करेंसी चेंज कराने में दिक्कत हो रही थी। फिर, जैसे ही हम देश छोड़ने लगे, हथियारबंद बंदूकधारी हमारे पास आए और कहा, 'तुम देश क्यों छोड़ रहे हो? भारत ऐसा क्यों कर रहा है? आप हमारे साथ क्यों नहीं जुड़ जाते और जंग क्यों नहीं लड़ते?'

यूक्रेनी सेना से कहा ‘टोबो बचीनो'

यूक्रेनी सेना से कहा ‘टोबो बचीनो'

बता दें कि ये सब उस समय हुआ जब पिछले सप्ताह रूस-यूक्रेन युद्ध पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव से भारत ने खुद को अलग कर लिया। दोनों देशों के बीच युद्ध को 7 दिन से भी अधिक समय हो चुका है, इससे दुनिया पर सुरक्षा का खतरा भी मंडराने लगा है। भारतीय छात्र कबीर ने कहा, 'मैं उनके साथ बहस में नहीं उलझना चाहता था। मैंने अपनी टूटी-फूटी यूक्रेनियन भाषा में 'टोबो बचीनो' कहा।'

दोस्तों से सीखी थी यूक्रेनी भाषा

दोस्तों से सीखी थी यूक्रेनी भाषा

कबीर ने बताया कि उन्होंने बास्केटबॉल खेलने के दौरान कुछ दोस्ते से यूक्रेनी भाषा सीखी थी, फिलहाल वो दोस्त यूक्रेनी सेना का साथ दे रहे हैं। यूक्रेनियन भाषा में 'टोबो बचीनो'का अर्थ होता है 'अलविदा'। कबीर भारत सरकार द्वारा यूक्रेन से निकाले गए छात्रों के कई बैचों में से एक हैं। पश्चिम बंगाल के छात्र वर्तमान में दिल्ली के बंगा भवन में अपने घर वापस जा रहे हैं, और घर वापस आने के लिए राज्य सरकार द्वारा उन्हें फ्लाइट टिकट सौंपने का इंतजार कर रहे हैं।

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