Rupee vs Dollar: ईरान-इजराइल जंग की भारत पर पड़ी जोरदार मार! ऑल टाइम लो पर पहुंचा रुपया, क्या है आज का रेट?
Indian Rupee at Record Low: भारत में आर्थिक मोर्चे पर शुक्रवार का दिन काफी हलचल भरा रहा। विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये की सेहत इस कदर बिगड़ी कि इसने पहली बार 93 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया। शुरुआती कारोबार में भारी दबाव के चलते रुपया डॉलर के मुकाबले फिसलकर 93.15 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। पिछले कुछ दिनों से जारी यह गिरावट अब एक गंभीर संकट का रूप लेती दिख रही है, जिससे निवेशकों में घबराहट का माहौल है।
इस भारी गिरावट के पीछे मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में गहराता युद्ध का संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी को जिम्मेदार माना जा रहा है। इन वैश्विक परिस्थितियों ने घरेलू बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे भारतीय मुद्रा की चमक फीकी पड़ गई है।

कच्चे तेल की कीमतों का चौतरफा दबाव
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 85% हिस्सा आयात करता है। जब तेल महंगा होता है, तो आयात बिल चुकाने के लिए डॉलर की मांग अचानक बढ़ जाती है। डॉलर की इसी बढ़ती मांग ने रुपये की वैल्यू को रिकॉर्ड निचले स्तर पर धकेल दिया है।
ये भी पढ़ें: Aaj Ka Chandi ka Bhav: अमेरिका-ईरान जंग के बीच चांदी धड़ाम! ₹38,000 सस्ती, आपके शहर का लेटेस्ट Silver Rate
सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशक
दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक अब जोखिम लेने से बच रहे हैं। वे भारतीय शेयर बाजार जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर अमेरिकी डॉलर और सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों (Safe Haven) में लगा रहे हैं। डॉलर की इस वैश्विक मजबूती ने रुपये सहित अन्य विकासशील देशों की मुद्राओं पर भारी दबाव डाल दिया है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली
भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर पूंजी की निकासी (Outflow) जारी है। मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने अरबों रुपये के शेयर बेचे हैं। जब ये निवेशक अपना पैसा निकालते हैं, तो वे रुपये को बेचकर डॉलर खरीदते हैं, जिससे बाजार में रुपये की तरलता बढ़ती है और उसकी कीमत गिरती जाती है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त नीति
अमेरिकी केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' ने ब्याज दरों को लेकर अपना रुख सख्त (Hawkish) बनाए रखा है। फेड ने संकेत दिए हैं कि महंगाई पर लगाम कसने के लिए दरें फिलहाल ऊंची बनी रहेंगी। इससे वैश्विक स्तर पर डॉलर और ज्यादा ताकतवर हो रहा है, जिससे भारत जैसे देशों के लिए विदेशी फंड जुटाना और अपनी मुद्रा को संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
रुपये के कमजोर होने का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।
महंगाई: कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे माल ढुलाई महंगी होगी और खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ेंगी।
कॉरपोरेट लागत: जो कंपनियां विदेशों से कच्चा माल मंगाती हैं, उनकी लागत बढ़ जाएगी, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर ही आएगा।
विदेशी शिक्षा और यात्रा: विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों और वहां घूमने जाने वालों को अब ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे।
आगे की राह और बाजार की नजर
आने वाले दिनों में बाजार की चाल पूरी तरह से मिडिल ईस्ट के घटनाक्रमों और कच्चे तेल की सप्लाई पर निर्भर करेगी। निवेशकों की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हस्तक्षेप पर है। यदि आरबीआई अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर की बिक्री कर रुपये को सहारा नहीं देता है, तो गिरावट का यह दौर और लंबा खिंच सकता है।
With AI Inputs












Click it and Unblock the Notifications