Indian Railways ने बनाया 160 kmph रफ्तार वाला तेजस एक्सप्रेस इंजन, जानिए खासियत
नई दिल्ली- भारतीय रेलवे के चितरंजन लोकोमोटिव कारखाने से पहले स्वदेशी तेजस एक्सप्रेस इंजन को रवाना किया गया है। यूं समझ लीजिए कि यह तेजस इलेक्ट्रिक लोकोमेटिव दो इंजनों का सेट है और आने वाले दिनों में उम्मीद है कि देश में इससे रेल सफर की दिशा में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। इस इलेक्ट्रिक इंजन की खासियत यह है कि यह तेजस एक्सप्रेस की तरह ट्रेनों को दोनों ओर संचालित कर सकती है, लेकिन इसके बीच में जरूरत के हिसाब से कोच जोड़े जा सकते हैं। आने वाले दिनों में राजधानी-शताब्दी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों में इन तेजस इंजनों का इस्तेमाल होने की संभावना है।

160 किमी की रफ्तार तक चलने में सक्षम
शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के चितरंजन लोकोमोटिव कारखाने से पहले स्वदेशी तेजस एक्सप्रेस इलेक्ट्रिक इंजन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया है। अत्याधुनिक एरोडाइनामिक डिजाइन वाला यह इंजन 'पुश-पुल' ऑपरेशन के मकसद से तैयार किया गया है। इस नए तेजस एक्सप्रेस इंजन को चितरंजन लोकोमोटिव वर्क के जनरल मैनेजर प्रवीण कुमार मिश्रा ने बाकी वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है। इसमें दो इंजन लगे हैं, जिससे यह दोनों ओर चलने में सक्षम है और इसका निर्माण खासकर भारतीय रेलवे के प्रीमियम पैसेंजर ट्रेनों के लिए किया जाना है। इसमें हर इलेक्ट्रिक इंजन की क्षमता 6,000 हॉर्स पॉवर की है और दोनों में ऐसे अत्याधुनिक सिस्टम लगाए गए हैं कि यह 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलने में सक्षम है।

ट्रेन में जेनरेट कार की आवश्यकता खत्म
इस तेजस एक्सप्रेस इंजन की एक विशेषता ये है इसमें ट्रेन में अलग से जेनरेटर कार लगाने की जरूरत नहीं है और यह ट्रेन के कोच में और पैंट्री कार में इंजनों से ही बिजली की सप्लाई करने में सक्षम है। इंजनों के एरोडाइनामिक डिजान का मतलब ये है कि इसके सामने वाला हिस्सा ऐसा बनाया गया कि यह आसानी से तेज रफ्तार पकड़ सकता है और इसी स्थिति में लगातार रह सकता है। यही नहीं इस डिजाइन की वजह से इसमें ऊर्जा की खपत भी कम होती है। ये इंजन एक साथ 16 कोच तक को लेकर चल सकते हैं। माना जा रहा है कि दोनों इंजनों की 12,000 हॉर्स पावर की क्षमता से यह लंबी दूरी की यात्रा के लिए बेहतर विकल्प दे सकता है और ज्यादा स्पीड के साथ सफर के लिए सुरक्षित भी है।

प्रदूषण मुक्त और ईकोफ्रेंडली इंजन
इस ट्रेन के इंजन में सामने बड़ा सा ग्लास लगाया गया है, जिससे लोको पायलट के लिए ट्रेन चलाना ज्यादा सुविधाजनक और सुरक्षित होगा। यही नहीं दोनों ओर इंजन होने की वजह से इंजनों को बदलने में लगने वाले समय से भी छुटकारा मिलेगा। अनुमान है कि अगर इस इंजन का इस्तेमाल राजधानी एक्सप्रेस में किया जाता है तो हावड़ा और नई दिल्ली की यात्रा में लगने वाले समय में करीब डेढ़ घंटे की बचत हो सकती है। इसके अलावा जेनरेटर की आवश्यकता खत्म होने से डीजल की भी बचत होगी और वायु एवं ध्वनि प्रदेषण से भी राहत मिलेगी। यानि ये इंजन पर्यावरण की रक्षा की जरूरतों के भी अनुकूल बनाए गए हैं। उम्मीद है कि ये इेक्ट्रिक इंजन आने वाले दिनों में प्रीमियम एक्सप्रेस ट्रेनों की रफ्तार ओर सेवा में बहुत बड़ा बदलाव ला देगी।












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