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भारतीय रेलवे ने बनाया विश्व रिकॉर्ड, इलेक्ट्रिक लाइन पर दौड़ी पहली डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन

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नई दिल्ली- देश के नेशनल ट्रांसपोर्टर ने एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। पश्चिम रेलवे ने सफलतापूर्वक डबल-स्टेक कंटेनर ट्रेन का संचालन कर लिया है। यह एक ऐसी कामयाबी है, जिसे अभी तक विश्व के बड़े से बड़े विकसित देश भी हासिल नहीं कर सके हैं। डबल-स्टेक कंटेनर ट्रेन के कई फायदे हैं। यह पर्यावरण के तो अनुकूल है ही, इसका संचालन कहीं ज्यादा किफायती भी है और इसमें समय की भी दोगुने से ज्यादा की बचत हो सकती है। यह एक बड़ी कामयाबी इसलिए भी है क्योंकि इसे इलेक्ट्रिक लाइन के जरिए चलाया जाता है, जिसकी ऊंचाई सीमित रहती है। भारतीय रेलवे इस बात से भी गदगद है कि लॉकडाउन के दौरान उसने नेशनल ट्रांसपोर्टर होने की जिम्मेदारी बखूबी निभाई है, जिसके चलते कभी देश में सप्लाई चेन टूटने नहीं पाया है।

इलेक्ट्रिक लाइन पर दौड़ी पहली डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन

इलेक्ट्रिक लाइन पर दौड़ी पहली डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन

भारतीय रेलवे ने बिजली लाइन पर पहली डबल-स्टेक कंटेनर ट्रेन सफलतापूर्वक चलाकर एक वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया है। ऐसी पहली डबल-डेकर कंटेनर ट्रेन पश्चिम रेलवे की इलेक्ट्रिफाइड सेक्शनों गुजरात में पालनपुर और बोटाड के बीच चलाई गई है। ये पूरे विश्व में अपनी तरह की पहली उपलब्धि है। रेलवे के इस प्रयास से ग्रीन इंडिया के महत्वाकांक्षी मिशन को बहुत ज्यादा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। रेल मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि भारतीय रेलवे बड़े गर्व के साथ डबल-स्टेक कंटेनर ट्रेन चलाने वाला पहला रेलवे बन गया है। 10 जून को यह ऑपरेशन गुजरात के पालनपुर और बोटाड स्टेशनों के बीच कामयाबीपूर्वक संपन्न किया गया। रेल मंत्रालय के मुताबिक इस तरह की पहल से माल ढुलाई में इनोवेशन, स्पीड और कस्टोमाइजेशन को बढ़ावा मिलेगा। रेल मंत्रालय का कहना है कि नोवल कोरोना वायरस के संकट की वजह से देशभर में जारी रहे राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बावजूद देश का नेशनल ट्रांसपोर्टर माल ढुलाई के मामले में पिछले वर्ष के आंकड़े को भी पार कर जाने पर अपना ध्यान फोकस कर रहा है।

भारतीय रेलवे की बड़ी कामयाबी- रेल मंत्री

भारतीय रेलवे की इस बड़ी कामयाबी पर रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि 'हाई राइज ओवरहेड इक्वीपमेंट (OHE) से इलेक्ट्रिफाइड स्टेशनों के बीच पहली डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन को सफलतापूर्वक चलाकर रेलवे ने एक नया वर्ल्ड बेंचमार्क स्थापित किया है। नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार ने माल ढुलाई के क्षेत्र में इनोवेशन, स्पीड और कस्टोमाइजेशन को प्रेरित किया है।'

लॉकडाउन में माल ढुलाई का टूटा रिकॉर्ड

लॉकडाउन में माल ढुलाई का टूटा रिकॉर्ड

इस मौके पर भारतीय रेलवे ने बताया है कि चालू वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से 10 जून के बीच उसने 178.68 मिलियन टन सामानों को मालगाड़ियों के जरिए पूरे देश में ढुलाई की है। यही नहीं, लॉकडाउन के दौरान सप्लाई चेन टूटने न पाए इसके लिए इस साल 24 मार्च से 10 जून के बीच 32.40 लाख वैगनों के जरिए सप्लाई का काम पूरा किया गया है। इनमें से भी 18 लाख वैगनों के जरिए तो सिर्फ जरूरी सामानों की देशभर में ढुलाई की गई है, जिसमें खाद्यान, नमक, चीनी, दूध, खाने वाले तेल, प्याज, फल-सब्जियां, पेट्रोलियम पदार्थ, कोयला और खाद शामिल हैं। लॉकडाउन में रेलवे ने देश की कितनी बड़ी सेवा की है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 1 अप्रैल से 10 जून के बीच इसने 12.74 मिलिटन टन अनाजों की ढुलाई कि है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में उसने महज 6.79 मिलियन टन खाद्यान ढोए थे। रेलवे ने ये भी बताया है कि 22 मार्च से 10 जून के बीच देशभर में 3,897 पार्सल ट्रेनें चलाई गईं, जिनमें 3,790 समय-सारिणी आधारित स्पेशल पार्सल ट्रेनें थीं, जिनके जरिए 1.39 लाख टन कंसाइमेंट की ढुलाई की गई।

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English summary
Indian Railways set world record, first double-stack container train ran on electric line
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