Indian Railways:महिला यात्रियों के लिए कई अच्छी खबर, इन ट्रेनों में रिजर्व बर्थ की सुविधा
नई दिल्ली, 19 दिसंबर: महिला यात्रियों के लिए आने वाले दिनों में ट्रेन यात्रा का आनंद चौगुना होने वाला है। भारतीय रेलवे ने कई कदम सिर्फ महिला यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए उठाया है। इसमें महिला यात्रियों के लिए कोच में बर्थ आरक्षित करने से लेकर यात्रा के दौरान होने वाली कठिनाइयां शामिल हैं। यह जानकारी खुद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की ओर से दी गई है। रेलवे ने खासकर अकेले सफर कर रही महिला यात्रियों पर ज्यादा फोकस किया है कि उन्हें लंबी दूरी की ट्रेन यात्राओं में किसी भी तरह की असुरक्षा का अनुभव ना हो, साथ ही उन्हें रिजर्व बर्थ मिलने की भी लगभग गारंटी मिल जाए।

महिला यात्रियों के लिए 6 बर्थ आरक्षित
भारतीय रेलवे ने लंबी दूरी की ट्रेन यात्राओं के लिए महिला यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के मद्देनजर कई कदम उठाए हैं। यह जानकारी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी है। रेल मंत्रालय के मुताबिक लंबी दूरी की मेल/ एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए स्लीपर क्लास में 6 बर्थ महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे। यही नहीं गरीब रथ/राजधानी/दुरंतो/ पूर्ण वातानुकूलित एक्सप्रेस ट्रेनों में भी महिला यात्रियों के लिए 6 बर्थ आवंटित किए गए हैं। यह बर्थ किसी भी उम्र की उन महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे, जो अकेले या समूह में यात्रा कर रही होंगी।

महिलाओं को लोअर बर्थ मिलना हुआ आसान
यही नहीं, संयुक्त आरक्षण कोटा के तहत स्लीपर क्लास में प्रति कोच 6 से 7 लोअर बर्थ, 3एसी कोच में 4 से 5 लोअर बर्थ प्रति कोच और 3 से 4 लोअर बर्थ प्रति 2एसी (उस ट्रेन में लगाई गई उस श्रेणी के कोच की संख्या पर निर्भर) कोच वरिष्ठ नागरिकों, 45 साल से ऊपर की महिलाओं और गर्भवती महिलाओं के लिए चिन्हित कर दिए गए हैं। यानी 45 साल की महिलाओं को अब लोअर बर्थ मिलना ज्यादा आसान रहेगा।

महिला यात्रियों की सुरक्षा पर रेलवे का खास जोर
इसके अलावा महिला यात्रियों के बचाव और सुरक्षा के लिए भी रेलवे की ओर से नए पहल किए जा रहे हैं, जिसके तहत रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ), जीआरपी और जिला पुलिस को हर संभव सहयोग देगा। हालांकि, संविधान की सातवीं अनुसूची के मुताबिक पुलिस और कानून-व्यवस्था राज्य सूची में शामिल है, रेलवे की ओर से ट्रेनों और स्टेशनों पर महिला यात्रियों के बचाव और सुरक्षा के लिए जीआरपी के साथ तालमेल बिठाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत आरपीएफ 17 अक्टूबर, 2020 से ही देशव्यापी 'मेरी सहेली' पहल लौन्च कर चुका है, जिसके तहत खासकर उन महिला यात्रियों की सुरक्षा पर खास फोकस करना है, जो अकेली सफर कर रही हैं। इसके लिए आरपीएफ महिला अधिकारियों और स्टाफ को विशेषरूप से प्रशिक्षित कर रहा है।

संवेदनशील रूट पर एस्कॉर्ट का इंतजाम
रेल मंत्री ने यह भी जानकारी दी है कि रेलवे ने जिन मार्गों और सेक्शन को संवेदनशील के तौर पर पहचान की हुई है, उनपर चलने वाली ट्रेनों को आरपीएफ और विभिन्न राज्यों की गवर्मेंट रेलवे पुलिस फोर्स (जीआरपीएफ) रोजाना एस्कॉर्ट कर रहे हैं। परेशानी की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा संबंधी सहायता के लिए रेलवे का हेल्पलाइन नंबर 139 पूरे नेटवर्क के लिए 24x7 कार्यरत है। उन्होंने भरोसा दिया कि यात्रियों की चिंताएं अगर ट्विटर, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर भी उठाए जाते हैं तो रेलवे उनका भी समाधान करेगा।

इमरजेंसी टॉकबैक सिस्टम भी लगाए जा रहे हैं
अश्विनी वैष्णव के मुताबिक महिला आरपीएफ कर्मी लेडीज स्पेशल ट्रेनों को एस्कॉर्ट कर रही हैं। एस्कॉर्टिंग पार्टियों से कहा गया है कि वह रास्ते में अकेली यात्रा कर रही महिला यात्रियों, लेडीज कोच और ठहराव वाले स्टेशनों पर खास नजर रखें। महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बों में पुरुष यात्रियों के चढ़ने के खिलाफ अभियान भी चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा कोच और रेलवे स्टेशनों पर 4,934 सीसीटीवी कैमरा लगाए गए हैं। इनके अलावा नव निर्मित ईएमयू के महिला कोच और कंपार्टमेंट और कोलकाता मेट्रो की एसी बोगियों में इमरजेंसी टॉकबैक सिस्टम और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।












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