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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन लॉन्च के लिए तैयार, कितना होगा किराया, आखिर कैसे बनेगा रेलवे के लिए गेमचेंजर?

Indian Railways First Hydrogen Train: भारत अब पर्यावरण-अनुकूल परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग लगाने जा रहा है। जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन जैसे विकसित देशों की कतार में खड़े होकर भारतीय रेलवे देश की पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन (First Hydrogen Train) लॉन्च करने की तैयारी में है। यह कदम सिर्फ तकनीकी प्रगति का प्रतीक नहीं होगा, बल्कि यह भारत के ग्रीन ट्रांसपोर्टेशन मिशन को नई ऊर्जा देगा।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने हाल ही में इस प्रोजेक्ट की पहली झलक साझा करते हुए बताया कि ट्रेन का निर्माण पूरी तरह मेड इन इंडिया (Made in India) तकनीक से किया गया है। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में इसका परीक्षण जारी है, और जल्द ही यह ट्रेन हरियाणा के जिंद से सोनीपत के बीच अपनी पहली यात्रा शुरू करेगी।

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यह सिर्फ एक ट्रायल रूट नहीं, बल्कि एक शून्य-उत्सर्जन युग की शुरुआत होगी, जिसमें डीजल की जगह स्वच्छ हाइड्रोजन ईंधन का इस्तेमाल होगा और हवा में केवल जल वाष्प निकलेगा।

Hydrogen Train Launch: ये ट्रेन इनती खास क्यों है?

दुनिया की सबसे शक्तिशाली और सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन का खिताब पाने जा रही यह परियोजना भारतीय रेलवे के "हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज" कार्यक्रम का हिस्सा है, जो न केवल प्रदूषण कम करेगा बल्कि शिमला-कालका, दार्जिलिंग और ऊटी जैसे हेरिटेज रूट्स को भी एक नई पर्यावरणीय पहचान देगा।

इस ट्रेन में 1,200 HP का इंजन होगा, जो 2,600 यात्रियों को ले जाने की क्षमता रखेगा। यह पहल भारत को वैश्विक हरित क्रांति के मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगी और 2070 तक नेट-जीरो कार्बन एमिशन लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।

रेल मंत्री ने दी पहली झलक

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी खुद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में ट्रायल पर चल रही हाइड्रोजन ट्रेन की पहली झलक दिखाई गई।

वित्त वर्ष 2023-24 में रेलवे मंत्रालय ने 2,800 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था, ताकि 35 हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेनें विकसित की जा सकें। इन ट्रेनों के तकनीकी विनिर्देश रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) द्वारा तैयार किए गए हैं, जिससे यह पूरी तरह 'मेड इन इंडिया' तकनीक का उदाहरण बनती है।

Hydrogen Train Route India: क्या होगा इसका पहला रूट?

इस ट्रेन का पहला परिचालन हरियाणा के जिन्द और सोनीपत के बीच किया जाएगा। यह रूट लंबाई और इंफ्रास्ट्रक्चर की दृष्टि से उपयुक्त माना गया है। इस मार्ग पर देश की पहली जीरो-एमिशन ट्रेन दौड़ेगी, जो भविष्य में अन्य गैर-विद्युतीकृत और हेरिटेज रूट्स पर तैनाती के लिए एक टेस्ट मॉडल बनेगी।

दुनिया की सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेन

भारतीय रेलवे के अनुसार, यह आने वाली ट्रेन दुनिया की सबसे ताकतवर और सबसे लंबी हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन होगी। इसमें 1,200 हॉर्सपावर का इंजन होगा और यह एक बार में 2,600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगी।

ट्रेन को एक पुराने डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) से बदलकर हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से लैस किया गया है। यह भारतीय नवाचार और अत्याधुनिक ग्रीन टेक्नोलॉजी का बेहतरीन संयोजन है।

क्या है ग्रीन मिशन और 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' प्रोग्राम?

यह पहल भारतीय रेलवे के महत्वाकांक्षी "हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज" कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण-संवेदनशील और दर्शनीय मार्गों पर रेल यात्रा को डीकार्बोनाइज करना है। इसमें शिमला-कालका, दार्जिलिंग और ऊटी जैसे रूट शामिल हैं। कार्यक्रम के तहत:

  • 35 हाइड्रोजन ट्रेनें बनाई जाएंगी।
  • प्रति ट्रेन लागत 80 करोड़ रुपये होगी।
  • प्रति रूट हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग और रखरखाव सुविधाओं के लिए 70 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे।

पर्यावरण के लिए बड़ा कदम

हाइड्रोजन-संचालित ट्रेनें केवल जलवाष्प उत्सर्जित करती हैं, जिससे यह डीजल इंजन वाली ट्रेनों के लिए एक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प बन जाती हैं। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां अभी तक बिजलीकरण नहीं हुआ है, यह एक सस्ती और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था प्रदान करेगी। यह तकनीक पहाड़ी इलाकों और दूरदराज के क्षेत्रों में भी बेहद उपयोगी होगी।

जिन्द-सोनीपत रूट के बाद, इन ट्रेनों को पर्यटक और हेरिटेज रेलवे पर भी चलाया जाएगा। इससे यात्रा अनुभव न केवल बेहतर होगा, बल्कि भारत के नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य (2070) की दिशा में भी तेजी आएगी। यह कदम भारत की ग्रीन ट्रांसपोर्टेशन प्रतिबद्धता को मजबूत करता है और भारतीय रेलवे को वैश्विक स्तर पर क्लीन रेल टेक्नोलॉजी इनोवेशन के अग्रणी पायदान पर पहुंचाता है।

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