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रेलवे में बड़ी राहत: ट्रैकमैन डेथ रेट में 65% की गिरावट, जहां 196 मौतें थीं, अब सिर्फ 67! कैसे हुआ मुमकिन?

Indian Railway Good News: भारतीय रेलवे में ड्यूटी के दौरान ट्रैक मेंटेनरों की ट्रेन से कटकर मौत की घटनाओं में पिछले एक दशक में कमी दर्ज की गई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 25 जुलाई 2025 को राज्यसभा में बताया कि 2013-14 में 196 ऐसी मौतें दर्ज हुई थीं, जो पिछले पांच सालों में घटकर औसतन 67 प्रति वर्ष रह गई हैं।

यह 65% से अधिक की कमी दर्शाता है। रेलवे ने ट्रैकमैन की सुरक्षा और कल्याण के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षण और तकनीकी प्रणालियां शामिल हैं।

Indian Railway Reduces Trackman Deaths

2.13 लाख ट्रैकमैन, सुरक्षा पर जोर

रेल मंत्री ने बताया कि वर्तमान में भारतीय रेलवे में 2.13 लाख से अधिक ट्रैक मेंटेनर (कीमैन, गेटमैन, ट्रॉलीमैन आदि) कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों को खतरनाक परिस्थितियों में काम के दौरान सुरक्षित रखने के लिए कई उपाय किए गए हैं। वैष्णव ने कहा, 'ट्रैकमैन को रेट्रो रिफ्लेक्टिव सेफ्टी जैकेट, सेफ्टी शूज, दस्ताने, डिटैचेबल माइनर लाइट वाले हेलमेट, तिरंगा LED टॉर्च, रेनकोट और विंटर जैकेट जैसे सुरक्षा उपकरण दिए जा रहे हैं।'

इसके अलावा, हल्के औजार, बैटरी/हाइड्रोलिक चालित मशीनें और मशीनीकृत ट्रैक रखरखाव जैसी तकनीकों ने कर्मचारियों की शारीरिक थकान को कम किया है और उत्पादकता बढ़ाई है। नियमित प्रशिक्षण, परामर्श सत्र और मेडिकल जांच भी जोखिमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।

आधुनिक तकनीक से बढ़ी सुरक्षा

रेलवे ने ट्रैकमैन की सुरक्षा के लिए तकनीकी नवाचारों को भी अपनाया है। वैष्णव ने बताया, "VHF आधारित अप्रोचिंग ट्रेन वार्निंग सिस्टम ट्रैकमैन को ट्रेन के आने की अग्रिम चेतावनी देता है। यह सिस्टम हैंडहेल्ड VHF रिसीवर के जरिए कर्मचारियों को अलर्ट करता है।" यह तकनीक सभी रेल रूटों पर कार्यरत ट्रैकमैन को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है।

इन उपायों का असर साफ दिखता है। 2013-14 में जहां 196 ट्रैकमैन की ट्रेन से कटकर मौत हुई थी, वहीं पिछले पांच सालों में यह संख्या औसतन 67 प्रति वर्ष तक सिमट गई। यह कमी रेलवे के सुरक्षा उपायों की सफलता को दर्शाती है।

ट्रैकमैन के लिए करियर में अवसर

ट्रैकमैन के कल्याण और करियर प्रगति पर बोलते हुए, रेल मंत्री ने कहा कि योग्य कर्मचारी 20% सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (LDCE) कोटे के तहत जूनियर इंजीनियर (पार्श्वमार्ग) के पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, सामान्य विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (GDCE) के जरिए ट्रैकमैन अपने मूल कैडर या अन्य विभागों में उच्च पदों के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।

वैष्णव ने बताया, "GDCE योजना कर्मचारियों को तेजी से पदोन्नति के अवसर देती है, जिससे वे रिक्तियों और पात्रता मानदंडों के आधार पर अपने करियर को आगे बढ़ा सकते हैं।"

रेलवे की प्रतिबद्धता

रेलवे के ये प्रयास न केवल ट्रैकमैन की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं, बल्कि उनके कार्यस्थल को बेहतर बनाने और उनके भविष्य को उज्ज्वल करने में भी मदद कर रहे हैं। ट्रैक मेंटेनरों की जान बचाने और उनके कल्याण के लिए उठाए गए कदम भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। हालांकि, इन कर्मचारियों के सामने अभी भी कई चुनौतियां हैं, और रेलवे का लक्ष्य भविष्य में ऐसी घटनाओं को और कम करना है।

यह खबर उन हजारों ट्रैकमैन की मेहनत और जोखिम को भी रेखांकित करती है, जो भारतीय रेलवे को हर दिन सुचारू रूप से चलाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं।

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