उलटी चली स्पेशल ट्रेन की सीधी कहानी

दिल्ली में किसान रैली में हिस्सा लेने महाराष्ट्र से पहुंचे 1500 किसान. लेकिन वापसी का रास्ता ट्रेन से भटक गए. ये आरोप है ट्रेन में सफर करने वाले किसानों का. हालांकि रेलवे इस घटना से इनकार कर रहा है.

18 नवंबर को कोल्हापुर से दिल्ली आने के लिए महाराष्ट्र के किसानों के लिए एक स्पेशल ट्रेन की बुकिंग कराई गई. ये बुकिंग किसानों के लिए काम करने वाली संस्था स्वाभिमानी शेतकारी संगठन ने कराई. लोकसभा सांसद राजू शेट्टी स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के अध्यक्ष हैं और महाराष्ट्र की हातकांगले लोकसभा सीट से सांसद हैं.

बीबीसी से बात करते हुए राजू शेट्टी ने कहा, "20 लाख रुपए देकर हमने इस स्पेशल ट्रेन को बुक कराया था. 18 नवंबर को ट्रेन कोल्हापुर से दिल्ली के लिए रवाना होनी थी. हमें मिरज, कराड, मनमाड़ और पुणे होते हुए दिल्ली के सफदरजंग स्टेशन पहुंचना था. हमे बुकिंग कराते समय यही रूट, स्टॉप और समय के साथ दिए गए थे. बुकिंग के कागज के मुताबिक 23 तारीख को दोपहर 12 बजे ट्रेन को कोल्हापुर पहुंचना था. लेकिन ट्रेन रास्ता भटक कर मध्य प्रदेश पहुंच गई और फिलहाल तकरीबन आठ घंटे की देरी से चल रही है."

'बुलेट ट्रेन का लोगो बनाया और ज़िंदगी बदल गई'

कैसी होती है स्पेशल ट्रेन ?

स्पेशल ट्रेन की बुकिंग की क्या प्रक्रिया होती है? इस बारे में हमने रेलवे बोर्ड के पूर्व मेम्बर ट्रैफिक श्री प्रकाश से बात की.

श्री प्रकाश के मुताबिक, "स्पेशल ट्रेन हर मामले में स्पेशल होती है. जितने दिन के लिए ट्रेन बुक कराई जाती है, उसके दोनों तरफ के सफर का रास्ता पहले से तय होता है. बुक कराने के लिए किराया 15 फ़ीसदी ज्यादा लगता है."

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रेल मंत्रालय की प्रतिक्रिया

लेकिन इस तय प्रक्रिया के बाद ट्रेन रास्ता कैसे भटक गई. ये सवाल बीबीसी ने रेल मंत्रालय के प्रवक्ता अनिल सक्सेना से पूछा. उनके मुताबिक, "ट्रेन गलत रास्ते पर चली गई, ये बात तथ्यात्मक तौर पर गलत है. किसानों की सुविधा के लिए रेलवे ने ये निर्णय लिया कि जिस रास्ते ट्रेन दिल्ली से कोल्हापुर जानी थी, उसका रास्ता बदल दिया जाए. क्योंकि पूर्व निर्धारित रूट पर गाड़ियां पहले ही काफी देरी से चल रही थी."

दरअसल ट्रेन से दिल्ली से कोल्हापुर आने-जाने के दो रास्ते हैं. एक वेस्टर्न रेलवे की तरफ से जिसमें ट्रेन कोल्हापुर, मिराज, पुणे और सूरत से कोटा होते हुए दिल्ली पहुंचती है और दूसरा रास्ता सेन्ट्रल रेलवे की तरफ से जाता है जो दिल्ली, मथुरा, आगरा, ग्वालियर और मुरैना होते हुए कोल्हापुर जाती है.

क्या है रास्ता भटकने का सच?

जिस स्पेशल ट्रेन में महाराष्ट्र के किसान सवार थे, वो ट्रेन कोल्हापुर से दिल्ली आते समय वेस्टर्न रेलवे के रास्ते आई और जाते समय सेन्ट्रल रेलवे के रास्ते गई जो स्पेशल ट्रेन का तय रूट नहीं था.

स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्टी के मुताबिक, "ट्रेन के गलत रास्ते पर जाने का पता तब चला जब ट्रेन ग्वालियर के पास पहुंची. तब किसानों ने मुझसे फोन पर सम्पर्क किया. फिर मैंने रेल मंत्री के पीए से बात की और फिर उसी रूट पर ट्रेन को आगे ले जाने का फ़ैसला लिया गया. किसानों को ट्रेन में खाने की दिक्कत तो नहीं आई क्योंकि ट्रेन में पैंट्री कार थी. लेकिन किसान रास्ते भर पानी पीने के लिए तरस गए."

राजू शेट्टी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "वो इस मामले को ऐसे ही नहीं छोड़ेंगे बल्कि रेल मंत्री और प्रधानमंत्री दोनों को चिट्ठी लिखेंगे. जो सरकार एक ट्रेन को तय रूट पर नहीं चला सकती वो सरकार बुलेट ट्रेन कैसे चलाएगी?"

रेलवे बोर्ड के पूर्व मेम्बर ट्रैफिक श्री प्रकाश के मुताबिक, "तकनीकी दिक्कतों की वजह से कई बार ट्रेन के रूट में बदलाव किए जा सकते हैं, लेकिन स्पेशल ट्रेन हो तो आयोजकों को पहले जानकारी जरूर देनी चाहिए. बिना उनको जानकारी दिए रूट बदलना उचित नहीं है."

श्री प्रकाश ने बीबीसी को बताया, "मुझे याद नहीं मेरे कार्यकाल में कभी ऐसी घटना हुई. तय रास्ते से अलग रास्ते पर ट्रेन चली जाए तो गलती ड्राइवर या स्टेशन मैनेजर की नहीं होती. ये निर्णय डिविजन या ज़ोन के लेवल पर लिया जाता है. इस घटना में यात्रियों की सुरक्षा खतरे में नहीं थी. लेकिन यात्रियों को हुई असुविधा के लिए रेलवे को जरूर सोचना चाहिए."

श्री प्रकाश के मुताबिक निश्चित तौर पर इस मामले में रेल मंत्रालय को एक जांच कमेटी का गठन कर इस बात का पता लगाना चाहिए कि आखिर चूक किसकी थी.

हालांकि पूरे मामले में रेलवे को नहीं लगता कि उनसे कोई गलती हुई है. रेल मंत्रालय के प्रवक्ता अनिल सक्सेना के मुताबिक, "स्पेशल ट्रेन की बुकिंग के दौरान जो स्टॉप दिए जाते हैं वो सिर्फ प्रस्तावित होते हैं, लेकिन हर सूरत में रेलवे को अधिकार होता है कि अंत समय में परिस्थितियों को देखते हुए ट्रेन के रूट के बदलाव किया जा सके."

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