IMF की चीफ इकोनॉमिस्‍ट गीता गोपीनाथ ने देश की अर्थव्‍यवस्‍था के लिए दिए दो सुझाव

नई दिल्‍ली। अंतरराष्‍ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) में भारतीय मूल की चीफ इकोनॉमिस्‍ट गीता गोपीनाथ ने देश की लगातार बिगड़ती अर्थव्‍यवस्‍था के लिए दो रास्‍ते सुझाए हैं। मंगलवार को गीता की तरफ से न सिर्फ देश के आर्थिक विकास की दर को लेकर संभावनाएं जताई गई हैं बल्कि उन्‍होंने देश में ढांचागत सुधारों को लेकर भी अहम बातें कही हैं। आपको बता दें कि लगातार गिरती विकास दर की वजह से केंद्र सरकार विपक्षी और अर्थशास्त्रियों के निशाने पर है। गीता को पिछले वर्ष ही चीफ इकोनॉमिस्‍ट की जिम्‍मेदारी दी गई है।

क्‍या करना होगा भारत को

क्‍या करना होगा भारत को

आईएमएफ ने मंगलवार को भारत के आर्थिक विकास की दर को इस वित्‍तीय वर्ष के लिए सात प्रतिशत से घटाकर 6.1 प्रतिशत तक कर दिया है। जुलाई में संस्‍था की तरफ से सात प्रतिशत की विकास दर का अनुमान लगाया गया था। गीता ने मंगलवार को कहा है कि भारत को दरों में कटौती करनी होगी और साथ ही अर्थव्‍यवस्‍था को बहाल करने के लिए और ज्‍यादा सुधारों की जरूरत होगी। उन्‍होंने मीडिया से कहा, 'सरकार ने कुछ जरूरी कदम जरूर उठाए हैं लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। इसमें कमर्शियल बैंकों की बैलेंस शीट को ठीक करना और वित्‍तीय असंवेदनशीलता से लेकर विकास पर नकरात्‍मक असर को भी कम करना होगा।'

सरकार को करना होगा बहुत कुछ

सरकार को करना होगा बहुत कुछ

गीता ने आगे कहा, 'राजस्‍व की तरफ से अगर बात करें तो कॉरपोरट टैक्‍स को खत्‍म करने जैसे कुछ कदम सरकार ने उठाए हैं। लेकिन अभी तक इस बात का कोई ऐलान नहीं हुआ है कि इसे अब कैसे पूरा किया जाएगा। ऐसे में राजस्‍व के बारे में अनुमान है कि यह आशावादी है। लेकिन भारत को अभी राजकोषीय घाटे को काबू में रखना होगा।' गीता गोपीनाथ ने बताया है कि इस समय दुनिया के कुछ और देशों में भी अर्थव्‍यवस्‍था की दर में गिरावट देखी गई है। गीता की मानें तो भारत में साल 2019 में आर्थिक दर कमजोर हो गई है क्‍योंकि कॉरपोरेट और पर्यावरणीय नियामक अनिश्चितता व्‍याप्‍त है। नॉन-बैंक फाइनेंशियल सेक्‍टर को लेकर भी चिंताएं हैं और मांग पर भी दबाव बढ़ रहा है।

क्‍या है गीता की जिम्‍मेदारी

क्‍या है गीता की जिम्‍मेदारी

गीता को पिछले वर्ष आईएमएफ के रिसर्च डिपार्टमेंट में इकोनॉमिक काउंसलर और डायरेक्‍टर के तौर पर नियुक्‍त किया गया था। इस विभाग का रोल संस्‍था में सबसे अहम है। आईएमएफ का रिसर्च डिपार्टमेंट दुनिया भर की अर्थव्‍यवस्‍थाओं पर अध्‍ययन करके सदस्‍य देशों के लिए जरूरी नीतियां तैयार करता है। साथ ही साथ उन मुद्दों पर रिसर्च को अंजाम देता है जो आईएमएफ के लिए अहम होते हैं। इसके अलावा दुनिया की अर्थव्‍यवस्‍था अगले कुछ वर्षों में कैसी होगी इस बारे में भी अनुमान लगाना या भविष्‍यवाणी करना आईएमएफ का ही काम है। गीता, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन के बाद दूसरी भारतीय हैं जिन्‍हें इस विभाग की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है।

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