अब हवाई खतरों का पलभर में होगा खात्मा, नेवी को जल्द मिलेगा स्वदेशी एंटी ड्रोन सिस्टम
नई दिल्ली, 31 अगस्त: भारतीय नौसेना को जल्द स्वदेशी एंटी ड्रोन सिस्टम मिलेगा, जिसको लेकर इंडियन नेवी ने भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड के साथ डील की है। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारतीय नौसेना ने मंगलवार को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के साथ भारत के पहले स्थानीय रूप से निर्मित नौसेना एंटी-ड्रोन सिस्टम (एनएडीएस) के लिए 'हार्ड किल' और 'सॉफ्ट किल' क्षमताओं के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह डील जम्मू एयर फोर्स स्टेशन को निशाना बनाने के लिए छोटे ड्रोनों के इस्तेमाल के 2 महीने बाद हुई है। 27 जून का जम्मू में पहली बार ड्रोन हमला कर भारतीय सैन्य सुविधा को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। NADS को DRDO द्वारा विकसित किया गया है और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित किया गया है। यह भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने वाला पहला स्वदेशी रूप से विकसित एंटी-ड्रोन सिस्टम है।
रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि एनएडीएस छोटे ड्रोन का तुरंत पता लगा सकता है और उन्हें जाम कर सकता है और टारगेट को खत्म करने के लिए लेजर आधारित किल सिस्टम को भी यूज कर सकता है। यह रणनीतिक नौसैनिक के लिए बढ़ते ड्रोन खतरे के लिए एक असरदार काउंटर होगा।
गणतंत्र दिवस पर किया गया था तैनात
जानकारी के मुताबिक एंटी-ड्रोन सिस्टम को गणतंत्र दिवस 2020 के दौरान वीवीआईपी सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अहमदाबाद में मोटेरा स्टेडियम की यात्रा, स्वतंत्रता दिवस 2020, गणतंत्र दिवस 2021 और स्वतंत्रता दिवस 2021 के दौरान भी सुरक्षा कवच के तौर पर मुस्तैद किया गया था। डीआरडीओ ने विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों को अपनी काउंटर-ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन किया।
NADS ऐसे करता है काम
रडार सिस्टम माइक्रो-ड्रोन का पता लगाने के साथ 360-डिग्री कवरेज प्रदान करती है, जब वे 4 किलोमीटर दूर होते हैं। इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/ इन्फ्रारेड (ईओ/ आईआर) सेंसर 2 किलोमीटर तक के माइक्रो-ड्रोन का पता लगाने के लिए और एक रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) डिटेक्टर 3 किलोमीटर तक आरएफ संचार का पता लगाने के लिए करता है। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार आरएफ/ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) जैमर 3 किलोमीटर की दूरी से कंट्रोलर और जैम सिग्नल द्वारा इस्तेमाल की जा रही फ्रीक्वेंसी का पता लगा सकता है। लेजर आधारित हार्ड किल सिस्टम 150 मीटर से 1 किलोमीटर के बीच की दूरी पर माइक्रो ड्रोन को बेअसर कर सकता है।












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