इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की सलाह- बुखार के मामले बढ़ रहे, लेकिन लोग एंटीबायोटिक्स से बचें
अगर आप एंटीबायोटिक का उपयोग वायरल में कर रहे हैं, तो आपको सावधान होने की जरूरत है। Indian Medical Association ने नई एडवाइजरी जारी की है।

पूरे देश में मौसम बदल रहा है। धीरे-धीरे सर्दियां जा रहीं और गर्मी का मौसम दस्तक दे रहा। इस वजह से लोगों में बुखार, सर्दी-जुखाम के मामले बढ़ रहे हैं। भारत में ज्यादातर लोग ये समस्या होने पर बिना डॉक्टरी सलाह के ही दवा खानी शुरू कर देते हैं। जिसको लेकर अब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने एडवाइजरी जारी की है। साथ ही उन्हें एंटीबायोटिक्स से बचने की सलाह दी।
IMA ने कहा कि खांसी, मतली, उल्टी, गले में खराश, बुखार, शरीर में दर्द और दस्त के लक्षण वाले रोगियों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। ये संक्रमण आमतौर पर लगभग पांच से सात दिनों तक रहता है। बुखार तीन दिनों में खत्म हो जाता है, लेकिन खांसी तीन हफ्ते तक बनी रह सकती है। एनसीडीसी की जानकारी के मुताबिक इनमें से अधिकांश मामले एच3एन2 इन्फ्लुएंजा वायरस के हैं। ऐसे में आईएमए ने डॉक्टरों को सलाह दी कि वे एंटीबायोटिक्स देने से परहेज करें।
IMA के मुताबिक कई अन्य एंटीबायोटिक दवाओं का कुछ शर्तों के लिए दुरुपयोग किया जा रहा और रोगियों के बीच प्रतिरोध विकसित हो रहा है। उदाहरण के तौर पर डायरिया के 70% मामले वायरल डायरिया हैं, जिसके लिए एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता नहीं है। फिलहाल सबसे ज्यादा दुरुपयोग एंटीबायोटिक्स एमोक्सिसिलिन, नॉरफ्लोक्सासिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन, ओफ्लॉक्सासिन, लेवफ्लॉक्सासिन का हो रहा है।
स्वास्थ्य संगठन ने आगे कहा कि हमने पहले ही कोविड के दौरान एजिथ्रोमाइसिन और आइवरमेक्टिन का व्यापक उपयोग देखा है। इससे भी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ गई थी। एंटीबायोटिक दवाओं को निर्धारित करने से पहले ये पता लगाना आवश्यक है कि इंजेक्शन बैक्टीरिया है या नहीं।
एंटीबायोटिक्स से ये नुकसान
एंटीबायोटिक्स को लेकर पहले कई रिपोर्टस आ चुकी हैं। जिनमें कहा गया कि इसको ज्यादा लेने से किडनी पर असर पड़ता है। इसके अलावा ये पेट से जुड़ी दिक्कतों को भी बढ़ावा देती हैं। ऐसे में एक्सपर्ट्स इनके ज्यादा यूज की सलाह नहीं देते हैं। अगर आप किडनी, हार्ट या लीवर के मरीज हैं, तो इसको लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।












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