इराक संकट के बीच सोशल साइट्स पर भी कड़ी निगरानी

एजेसियों के अनुसार फेसबुक और ट्वीटर जैसी कुछ सोशल साइट्स तमाम ऐसे शब्दों और तथ्यों का प्रयोग कर रही है, जिससे लोगों की संवेदनाओं को ठेस पहुंच सकती है। साथ ही इससे दंगा और युद्ध जैसी स्थिति बनने की भी संभावनाएं तेज हो जाती है।
इराक एक बेहद ही संवेदनशील मुद्दा है, लिहाजा सारे सोशल साइट्स पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। उनके तथ्य और कटेंट पर खास तौर से एजेंसियों द्वारा नजर रखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक भारत के साथ साथ अन्य देशों में भी कई ऐसे समूह हो सकते हैं जो सोशल साइट्स का इस्तेमाल कर के लोगों के बीच संवेदनाओं और उत्तेजना को भड़काने का काम कर सकते हैं।
खुफियो विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, विभाग नहीं चाहता कि इराक युद्ध का भारत की एकता औक अखंडता में किसी भी तरह का कोई प्रभाव पड़े। और इसके लिए तमाम सोशल साइट्स पर भी पैनी नजर रखी जा रही है।
भारत में रह रहे शिया समुदाय ने इराक में सुन्नियों के इस्लामिक संगठन आईएसआईएस द्वारा किए जा रहे अत्याचार पर चिंता जताई है, और साथ ही अपने डर को जाहिर किया है। यहां तक की ये लोग समूह बना कर लोगों को इराक चल कर शियाओं की मदद करने के लिए उत्तजित कर रहे हैं।
लखनऊ में भी इराक युद्ध का एक प्रभाव देखने को मिला, जब शिया समुदाय के लोगों ने इराक में हो रही हिंसा के खिलाफ जम कर आवाज उठाई। जिसके बाद सुन्नियों ने भी हमला करने की कोशिश की। बदले में शिया मुस्लिमों ने भी फायरिंग शुरू कर दी। हालांकि पुलिस ने लाठी चार्ज कर इस मुठभेड़ को शांत किया।












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