बेहतरीन कोविड मैनेजमेंट के लिए भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय को मिला 'पोर्टर पुरस्कार'
स्वास्थ्य मंत्रालय को इस साल का पोर्टर पुरस्कार मिला है। ये पुरस्कार अच्छे कोविड मैनेजमेंट के लिए दिया गया।

साल 2019 के अंत में दुनिया के सामने एक नई मुसीबत आई, जहां चीन के वुहान में कोरोना वायरस फैला। जब तक दूसरे देश कुछ समझ पाते, तब तक इस वायरस ने महामारी का रूप ले लिया था। इससे भारत भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ। हालांकि भारत सरकार ने काफी अच्छे से कोविड मैनेजमेंट किया, जिसकी तारीफ स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय ने की है। इसके अलावा भारत को इस काम के लिए पोर्टर पुरस्कार 2023 से सम्मानित किया।
मामले में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में Institute for Competitiveness (IFC) और यूएस एशिया टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट सेंटर (USATMC) ने "द इंडिया डायलॉग" कार्यक्रम आयोजित किया था। जिसमें कोविड-19 के बेहतरीन मैनेजमेंट के लिए भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय को ये पुरस्कार दिया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया और स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण कार्यक्रम में वर्जुअली जुड़े थे। उन्होंने सम्मान के लिए सभी का आभार जताया।
मंत्रालय के मुताबिक कोरोना महामारी के वक्त सरकार ने अच्छे ढंग से लोगों तक मदद पहुंचाई। इसके साथ कोविड की 2.5 अरब से ज्यादा खुराक वितरित की गई। जो अपने आप में बड़ी बात है। इसके अलावा देश में कोविड से निपटने के लिए कई अहम और कड़े कदम उठाए गए थे। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने माना कि कोविड-19 पर भारत की रणनीति काफी ज्यादा सफल रही। वायरस के प्रसार पर नियंत्रण, लोगों को राहत पैकेज और टीका समय पर मिला। ये तीनों उपाय काफी अहम थे। वहीं मामले में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को प्राप्त करना वास्तव में सम्मान और सौभाग्य की बात है। हम इसे एक मील का पत्थर के रूप में देखते है।
किसके नाम पर है ये पुरस्कार?
आपको बता दें कि पोर्टर पुरस्कार का नाम अमेरिकी नागरिक माइकल ई पोर्टर के नाम पर रखा गया है, जो एक अर्थशास्त्री, शोधकर्ता, लेखक, सलाहकार, वक्ता और शिक्षक हैं। इस पुरस्कार को देने के लिए एक खास पैनल होता है, जिसमें कई एक्सपर्ट शामिल होते हैं।












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