Tokyo Olympic: पहली कोशिश और घुड़सवारी ओलम्पिक के फ़ाइनल में, कौन हैं फ़वाद मिर्ज़ा जानिए कुछ ख़ास
फ़वाद मिर्ज़ा को घुड़सवारी विरासत में मिली थी, उनके पिता डॉ.हसनैन मिर्ज़ा घुडसवार पशु चिकित्सक हैं। इसी वजह से उन्हें घोड़ों से काफ़ी लगाव भी है।
बेंगलुरू, अगस्त 3, 2021। टोक्यो ओलम्पिक में हर रोज़ किसी न किसी देश के खिलाड़ी अपना हुनर दिखाते हुए इतिहास रच रहे हैं। भारतीय घुड़सवार फ़वाद मिर्ज़ा ने भी इतिहास रचने वालों के पन्ने में अपना नाम भी दर्ज करवा लिया है। घुड़सवारी के जंपिंग इवेंट में फ़वाद मिर्ज़ा ने इवेंट के फ़ाइनल के में अपनी जगह बना ली है। 6 मार्च 1992 बैंगलुरू में पैदा हुए फ़वाद मिर्ज़ा ऐसे पहले घुड़सवार हैं जो 20 वर्षों में पहली बार ओलम्पिक में देश का परचम लहरा रहे हैं। पिछले दो दशक से ज़्यादा अरसे के बाद 11.20 पेनल्टी अंक के साथ, सिर्फ़ फ़वाद मिर्ज़ा एक ऐसे घुड़सवार थे जो क्रॉस कंट्री स्पर्धा के बाद 22वें स्थान पर रहे। फ़वाद मिर्ज़ा ओलम्पिक के लिए क्वालीफ़ाई करने वाले तीसरे भारतीय घुड़सवार हैं। इनसे पहले 1996, अटलांटा में इंद्रजीत लांबा और 2000, सिडनी में इम्तियाज़ अनीस भी ओलम्पिक इवेंट में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

फ़वाद मिर्ज़ा को घुड़सवारी विरासत में मिली थी, उनके पिता डॉ.हसनैन मिर्ज़ा घुडसवार पशु चिकित्सक हैं। इसी वजह से उन्हें घोड़ों से काफ़ी लगाव भी है। यही वजह है कि उन्होंने अपने दोनों बेटों को फवाद मिर्ज़ा और अली अस्कर को भी घोड़ों से लगाव रखना सिखाया। वह एक स्टड फ़ॉर्म पर काम करते थे, यह उनका पुस्तैनी काम था। डॉ. हसनैन के दोनों बेटे फ़वाद और अली खेत पर घोड़ों के आसपास रहते हुए काफ़ी वक़्त बिताते हुए जवानी की दहलीज़ पर क़दम रखा है। स्थानीय लोग बताते हैं कि डॉ. हसनैन अपने परिवार की 6वीं पीढ़ी के घुड़सवार थे। उनके पिता 61वीं घुड़सवार सेना में सेना अधिकारी थे और अंग रक्षक का ज़िम्मा संभालते थे।
फ़वाद मिर्ज़ा ने एशियाई खेलों में भी अपने नाम का पर्चम लहराया। 1982 के बाद एशियाई खेलों में साल 2018 में 26.40 के जम्पिंग स्कोर के साथ रजत पदक जीतने वाले भारतीय फ़वाद मिर्ज़ा बने थे। रिपोर्ट के मुताबिक टोक्यो ओलम्पिक की तैयारी के दौरान फ़वाद मिर्ज़ा को मेधावी खिलाड़ियों में शुमार किया जा रहा था। उनका बेस उत्तर-पश्चिम जर्मनी के बर्गडॉर्फ में था और उन्हें प्रशिक्षण जर्मन घुड़सवारी के दिग्गज सैंड्रा औफार्थ दे रहे थे।
फ़वाद मिर्ज़ा ने 2012 के लंदन ओलम्पिक में एक स्वर्ण पदक (टीम स्पर्धा) और कांस्य पदक (व्यक्तिगत) देश के नाम किया था। 2016 रियो खेलों में एक रजत पदक (टीम स्पर्धा) भारत के खाते में डाला था। फ़वाद मिर्ज़ा की कामयाबी की लम्बी लिस्ट में में दो विश्व घुड़सवारी खेलों के स्वर्ण पदक (टीम और व्यक्तिगत स्पर्धाएं) और यूरोपीय चैंपियनशिप के चार पदक (टीम और व्यक्तिगत) शामिल हैं।












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