लेफ्टिनेंट नरेंद्र प्रताप: 6 बार हुए फेल, 7वीं बार गोल्ड मेडल के साथ सेना में अफसर बना किसान का बेटा

नई दिल्ली: कहते हैं कि अगर इंसान के अंदर हौसला हो तो वो क्या कुछ नहीं कर सकता है। इस बात को सच कर दिखाया है उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में रहने वाले किसान के बेटे नरेंद्र प्रताप सिंह ने। घर के हालात सही नहीं थे, जिस वजह से वो बहुत अच्छी शिक्षा तो नहीं हासिल कर पाए लेकिन हार नहीं मानी। अब किसान का बेटा अपनी मेहनत के दम पर तमाम मुश्किलों को पार कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन हुआ है।

पढ़ाई के साथ करते रहे तैयारी

पढ़ाई के साथ करते रहे तैयारी

नरेंद्र प्रताप सिंह प्रतापगढ़ के कतरौली गांव में पले बढ़े। उनके पिता सूर्य प्रकाश सिंह एक साधारण किसान थे, जिस वजह से उन्होंने अपनी 12वीं तक की पढ़ाई घर के पास ही आदर्श इंटर कॉलेज, मैलहन से पूरी की। अब वक्त का गया था बचपन के सपने को साकार करने का, लेकिन घर में बड़ा होने की वजह से जिम्मेदारियां बहुत थीं। साथ ही पढ़ाई छोड़ तैयारी करने का वक्त भी नहीं था। जिस वजह से उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से B.Sc. करना शुरू कर दिया। साथ ही सेना में जाने की तैयारी करने लगे।

पहले बतौर जवान सेना में हुए भर्ती

पहले बतौर जवान सेना में हुए भर्ती

दो साल बाद ही उन्होंने पहला मुकाम हासिल कर लिया और 2006 में भारतीय सेना में जवान (जनरल ड्यूटी) के रूप में भर्ती हुए, लेकिन उनका सपना अभी साकार नहीं हुआ था। सेना में भर्ती होने की वजह से उनको B.Sc. आखिरी साल में छोड़नी पड़ी थी। जिस वजह से नौकरी के साथ ही उन्होंने पढ़ाई फिर से करने की ठानी। उन्होंने पहले कानपुर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और फिर 2012 में इंग्लिश से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। इसके बाद 2014 में सिक्किम मनी पाल यूनिवर्सिटी से एमबीए (HR) पूरा किया। घर की जिम्मेदारियों का बोझ ज्यादा था, इसलिए वो नौकरी के साथ ही पढ़ाई करते गए।

कई बार SSB से हुए बाहर

कई बार SSB से हुए बाहर

सेना में भर्ती होने के बाद उनको अफसर बनने का सपना साकार करना था। जिस वजह से वो तैयारी करते रहे। इस दौरान 2008 में इंटर्नल एक्जाम पास कर एसएसबी तक पहुंचे। उनको अफसर बनने के लिए एसएसबी क्लियर करना था, उन्हें पूरा यकीन था कि इस बार वो पास हो जाएंगे, लेकिन वो बाहर हो गए। इसके बाद दो बार 2011 और 2013 में उन्होंने ACC (आर्मी कैडेड कॉलेज) का एग्जाम क्लियर कर लिया, लेकिन दोनों बार एसएसबी में फेल हो गए।

आखिर मिल गई कामयाबी

आखिर मिल गई कामयाबी

ACC मे फेल होने के बाद उन्होंने और मेहनत की, इसके बाद 2015, 2017 और 2019 में SCO (स्पेशल कमीशंड ऑफिसर) का एग्जाम दिया, लेकिन फिर उन्हें निराशा हाथ लगी। बीच में उन्होंने CDS की भी परीक्षा दी, लेकिन एसएसबी में फिर फेल हो गए। 6 बार फेल होने के बाद हौसला कमजोर पड़ गया। परिवार और साथ वालों को भी लगने लगा था कि अब नरेंद्र के अफसर बनने का सपना, सपना ही रह जाएगा, लेकिन कड़ी मेहनत के आगे एक दिन कामयाबी मिलनी ही थी। 2019 में नरेंद्र ने सेना के इंटरनल एक्जाम पीसी (एसएल) को दिया और इस बार सभी मुश्किलों को पार कर वो पास हो गए।

ड्यूटी के साथ कैसे की तैयारी?

ड्यूटी के साथ कैसे की तैयारी?

नरेंद्र के मुताबिक 2 बार ACC, 3 बार एससीओ और एक बार सीडीएस में फेल होने के बाद लोग उन्हें तैयारी छोड़ने को कहते थे, लेकिन वो अपने सपने के पीछे भागते रहे। हर बार उनका रिटेन निकल जाता था, लेकिन SSB सबसे मुश्किल था। दो बार वो पहले ही राउंड से बाहर हुए, जबकि चार बार लास्ट राउंड में वो फेल हो गए। सेना में भर्ती होने के बाद उन्होंने स्पोर्ट्स का चुन लिया, साथ ही क्रास कंट्री समेत कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। स्पोर्ट्स का फायदा भी उन्हें मिला, उनको पढ़ाई के लिए थोड़ा वक्त भी मिल जाता था। नरेंद्र ने बताया कि पीसी (एसएल) में देशभर से 19 लोगों का चयन हुआ था, जिन्हें इंडियन मेलेट्री एकेडमी, देहरादून में ट्रेनिंग दी गई। बीते 17 अक्टूबर को हुई पासिंग आउट परेड के बाद वो भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट कमीशंड हुए हैं। इस दौरान फिजिकल एक्टिविटी के लिए उन्हें गोल्ड मेडल भी मिला।

गांव के युवाओं को करते हैं प्रोत्साहित

गांव के युवाओं को करते हैं प्रोत्साहित

नरेंद्र ने सफलता के लिए तमाम मुश्किलें सहीं, उनके लिए सेना का अफसर बनना बिना कोचिंग और अच्छी तैयारी के मुश्किल था। इस वजह से उन्होंने गांव के युवाओं को एग्जाम के लिए तैयार करने का जिम्मा उठाया है। जब भी वो छुट्टियों में गांव जाते हैं, तो वहां के युवाओं को आर्मी की तैयारी से जुड़े टिप्स देते हैं, ताकी उन्हें थोड़ी मदद मिल सके। बतौर जवान उन्होंने सेना में 13 साल की सेवा दी है। लंबे वक्त तक उनकी तैनाती आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर में भी रही थी।

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