दौलत बेग ओल्डी के पास चीन ने तैनात किए 17 हजार जवान, जवाब में भारत ने उतारा टी-90 टैंक दस्ता

नई दिल्ली: लद्दाख में जारी सीमा विवाद को तीन महीने से ज्यादा का वक्त हो गया है। भारत की तमाम चेतावनी के बाद भी चीन सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार चीनी सेना की ओर से विवादित इलाकों के आसपास तैनाती बढ़ाई जा रही है। अब भारत ने भी चीन को करार जवाब देने का मन बना लिया है। जिस वजह से लद्दाख में टैंक रेजीमेंट की तैनाती की जा रही है। इसके अलावा 35 हजार जवान ऐसे तैनात किए गए हैं, जो सर्दियों में लड़ने में एक्सपर्ट हैं।

काराकोरम दर्रे के पास तैनाती

काराकोरम दर्रे के पास तैनाती

न्यूज एजेंसी एएनआई ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि चीन ने दौलत बेग ओल्डी (DOB) और देपसान्ग प्लेन्स में 17 हजार के करीब जवानों की तैनाती कर दी है। खबर सामने आते ही भारतीय सेना भी हरकत में आई और वहां पर टी-90 टैंक रेजीमेंट को तैनात कर दिया। ये तैनाती काराकोरम दर्रे के पास पेट्रोलिंग प्वाइंट 1 से लेकर देपसान्ग प्लेन्स तक की गई है। न्यूज एजेंसी के मुताबिक चीन ने तैनाती अप्रैल से मई के बीच में की थी। इसके बाद से वो इस इलाके में पीपी-10 से पीपी 13 तक भारतीय सेना को निगरानी से रोक रहे हैं।

टैंक देख हिमाकत नहीं करेंगे चीनी

टैंक देख हिमाकत नहीं करेंगे चीनी

सूत्रों के मुताबिक डीओबी और देपसान्ग प्लेन्स के दूसरी तरफ जब चीन ने इलाके में विकास कार्य शुरू किए थे, तो भारतीय सेना की माउंटेन ब्रिगेड और आर्मर्ड ब्रिगेड निगरानी करती थी, लेकिन अब सेना ने अपना प्लान बदल लिया है। अब वहां पर 15 हजार से ज्यादा जवानों और टैंक रेजीमेंट की तैनाती कर दी गई है। टैंक रेजीमेंट की तैनाती के चलते चीन इलाके में कोई भी हिमाकत करने से पहले सैकड़ों बार सोचेगा, क्योंकि चीनी सैनिकों के लिए इस हालात में ऑपरेट करना मुश्किल है।

क्या है चीन का प्लान?

क्या है चीन का प्लान?

सूत्रों ने बताया कि चीन TWT बटालियन हेडक्वार्टर से काराकोरम दर्रे को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण करना चाहता है। अगर वो इसमें कामयाब हो गया तो उसे अपने जवानों को इस इलाके में पहुंचाने में चंद घंटे लगेंगे, जबकि अभी उसे जी-219 हाईवे के जरिए आने में 15 घंटे से ज्यादा का वक्त लग जाता है। चीन पहले भी पीपी-7 और पीपी-8 के पास सैनिकों की तैनाती कर चुका है, लेकिन उस दौरान भारतीय सेना ने उसे पीछे जाने पर मजबूर कर दिया था। भारतीय सेना को पता है कि चीन सर्दियों में भी इस इलाके में घुसपैठ करने की हिमाकत कर सकता है, जिस वजह से 35 हजार जवानों की तैनाती की गई है। ये जवान सर्दियों में लड़ने में पूरी तरह से ट्रेंड और उससे संबंधित उपकरणों से लैस हैं।

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