भारी हंगामे के बीच राज्यसभा में भी पास हुआ भारतीय अंटार्कटिक विधेयक 2022

नई दिल्ली, 1 अगस्त: मोदी सरकार संसद के मानसून सत्र में भारतीय अंटार्कटिक विधेयक 2022 लेकर आई थी, जो सोमवार को उच्च सदन यानी राज्यसभा में पास हो गया। इस विधेयक का मकसद दक्षिणी ध्रुव की रक्षा करना है। साथ ही ये भी सुनिश्चित करना है कि कोई भी भारतीय नागरिक/शोधकर्ता अंतरराष्ट्रीय संधि का उल्लंघन ना करे, जिसमें भारत एक पक्ष है। इससे पहले 22 जुलाई को इसे लोकसभा में पारित किया गया था।

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दरअसल संसद का मानसून सत्र काफी हंगामेदार जा रहा है। सोमवार को भी विपक्षी दलों ने जीएसटी में बढ़ोतरी, महंगाई, रोजगार, गुजरात शराब कांड को लेकर हंगामा किया। इस दौरान शिवसेना सांसद संजय राउत के खिलाफ ईडी की कार्रवाई का भी मुद्दा सदन में उठा, जिस वजह से कई बार कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। हालांकि इतने हंगामे के बीच भी ये विधेयक ध्वनि मत से पारित हो गया और राज्यसभा की कार्यवाही मंगलवार तक स्थगित हो गई।

भारत के दो केंद्र
आपको बता दें कि अंटार्कटिका पृथ्वी के सबसे दक्षिणी हिस्से में स्थित महाद्वीप है। वैसे तो इस जगह पर हमेशा बर्फ जमी रहता है, लेकिन ये इंसानों के लिए काफी अहम है। यहां पर होने वाले बदलाव सीधे तौर पर दुनियाभर की जलवायु को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा इस महाद्वीप से संबंधित अभी बहुत सी खोज बाकी है। ऐसे में कई देशों ने यहां पर अपने रिसर्च केंद्र स्थापित कर रखे हैं। भारत के भी वहां दो सक्रिय अनुसंधान केंद्र हैं- शिरमाकर हिल्स में मैत्री ( 1989 में कमीशन) और लार्समैन हिल्स में भारती ( 2012 में कमीशन)।

इस विधेयक से क्या होगा?
अभी अंटार्कटिक क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून लागू होता है, लेकिन इस विधेयक के कानून में बदलने के बाद भारतीय क्षेत्र में और उसके मिशन से जुड़े लोगों पर भारतीय कानून लागू होगा, जिसकी सुनवाई भारतीय अदालतों में होगी। मतलब, भारतीय मिशन के क्षेत्र या उसके लिए गए लोगों से हुई गलतियों, अपराधों, अनियमितताओं पर कार्रवाई भारतीय कानूनों के तहत होगी।

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