मिस्र में 21 दिनों तक भारतीय वायुसेना दिखाएगी दम, कई लड़ाकू विमान लेंगे युद्धाभ्यास में हिस्सा
भारतीय वायुसेना ने साझा युद्धाभ्यास के लिए पहली बार मिस्र में वायुसेना के दस्ते को भेजा है। इस युद्धाभ्यास में वायुसेना के 5 मिग-29 लड़ाकू विमान, छह परिवहन विमान और विशेष बल के जवान हिस्सा ले रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि यह 21 दिन चलने वाले इस बहुपक्षीय युद्धाभ्यास में भारत के अलावा अमेरिका, सऊदी अरब, ग्रीस और कतर की सेनाएं हिस्सा ले रही हैं। इस युद्धभ्यास में पहली बार भारत की वायुसेना हिस्सा ले रही है। यह युद्धाभ्यास रविवार को शूरू हो गया है।

वायुसेना की ओर से कहा गया है कि मिस्र के एयरबेस कायरो पर दस्ता पहुंच गया है। अगले तीन हफ्तों के लिए हमारा घर यही रहेगा। वायुसेना इस युद्धाभ्यास में अन्य देशों के साथ हिस्सा लेगा। रक्षा मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि यह युद्धाभ्यास 16 सितंबर तक चलेगा।
वायुसेना के दस्ते में 5 मिग 29, 2 आईएल-78, दो सी-130, दो सी-17 लड़ाकू विमान हिस्सा ले रहे हैं। वायुसेना के गार्ड स्पेशल फोर्स के जवान भी इसमे हिस्सा ले रहे हैं। ये जवान स्क्वाड्रन नंबर 28, 77, 78 और 81 के हैं जो जो युद्धाभ्यास में हिस्सा ले रहे है। वायुसेना का ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भारतीय सेना के 150 जवानों को एयरलिफ्ट करने में भी अपनी मदद करेगा।
भारतीय वायुसेना इस साझा युद्धाभ्यास में ना सिर्फ वैश्विक रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए हिस्सा ले रहा है बल्कि साझा ऑपरेशन के लिए योजना और इसे कैसे पूरा किया जाए इसका भी अभ्यास कर रही है।
इस अभ्यास से इस युद्धाभ्यास में हिस्सा ले रहे देशों के साथ रणनीतिक संबंध भी मजबूत होंगे। वायुसेना की ओर से किए जा रहे इस युद्धाभ्यास को यूनिफॉर्म में डिप्लोमैट के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत और मिस्र के बीच संबंध काफी मजबूत और गहरे हैं, दोनों देश साथ मिलकर एयरो इंजन और एयरक्राफ्ट को तैयार करने में 1960 से काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच संबंध हाल ही में एयरफोर्स चीफ के मिस्र दौरे से और मजबूत हुए हैं। इसके साथ ही रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री ने भी मिस्र का दौरा किया था।












Click it and Unblock the Notifications