2040 तक इंसान चांद पर भेजेगा भारत, जानिये 'गगनयान मिशन' से जुड़ी ये जरूरी बातें...
Gaganyaan mission: डर के आगे जीत है... गगनयान मिशन के क्रू मॉड्यूल की लॉन्चिंग का आज पूरा देश इंतजार कर रहा था। दुआओं का दौर भी जारी था। जैसे ही रॉकेट क्रू मॉड्यूल को लेकर आसमान की ओर उड़ा, तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा भारत गूंज उठा। आगे के अपडेट्स इसरो ग्राफिक्स या फिर ट्वीट के जरिये लोगों को देता रहा और आगे भी देता रहेगा। अपने आप में ये मिशन बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इस मिशन के जरिये पहली बार भारत का कोई शख्स चांद पर पहुंचेगा।
जी हां! चांद तारे तोड़ लाने की बातें तो आपने फिल्मों में खूब सुनी होंगी। लेकिन जिस चांद को तोड़ लाने की बात सुनकर हम खुश हो जाते थे उसी चांद पर पहुंचने के लिए गगनयान मिशन पर काम किया जा रहा है। इस मिशन के चलते वो दिन दूर नहीं जब अमेरिका और अन्य विकसित देशों की तरह हम भी चांद पर कदम रख पाएंगे।

चंद्रयान 3 की सफलता के बारे भारत की ओर से पूरी दुनिया को ये संदेश पहुंचा कि भारत अब रुकने वाला नहीं है। अब भारत का परचम और भी ऊंचा लहराएगा। आदित्य एल 1, मंगलयान 2 और शुक्रयान जैसे मिशन के बीच गगनयान को इसरो के अब तक का सबसे बड़ा मिशन या यूं कहें कि सबसे बड़ा चैलेंज माना जा रहा था।
सिर्फ तीन देशों से ही चांद पर पहुंचे लोग
गगनयान मिशन के अंतर्गत इसरो द्वारा बनाए गए स्पेसक्राफ्ट के जरिये भारत के एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष की सैर पर जाने वाले हैं। बताते चलें कि ये बात अपने आप में काफी अहम है क्योंकि अभी तक स्पेस में भेजे जाने वाले लोग सिर्फ तीन देशों के ही रहे हैं। यानि कि 'मैन्ड स्पेस मिशन' को पूरा करने की काबीलियत अभी तक सिर्फ तीन देशों के पास ही है और ये तीन देश हैं- अमेरिका, चीन और रूस।
गगनयान मिशन की सफलता भारत को चौथा ऐसा देश बना देगी, जो मैन्ड स्पेस मिशन करने में सफल रहा है।

कैसे चांद पर कदम रखेंगे भारतीय?
अब बात करते हैं कि आखिर कैसे भारत इस गगनयान मिशन के जरिये चांद तक अपने लोगों को लेकर जाएगा? सबसे पहले तो इस बात को समझ लेते हैं कि भारत के लिए अभी एस्ट्रॉनॉट्स का चयन कर इस मिशन के लिए उन्हें तैयार करना सबसे बड़ा चैलेंज है। इंडियन एयरफोर्स के चार ऑफिसर्स का नाम इस लिस्ट में शामिल है। उनके साथ दो अन्य लोग, जो इस मिशन में अपना योगदान देंगे, उनके नामों की भी चर्चा हो रही है। ये दो नाम हैं- स्पेस में जाने वाले पहले भारतीय एस्ट्रोनॉट राकेश शर्मा और स्पेश मिशन के लिए ट्रेनिंग पूरी कर चुके रिटायर्ड एयर कमांडर रविश मल्होत्रा।
क्या है अहम चुनौतियां?
अब दूसरा चैलेंज स्पेस मिशन में काम आने वाले स्पेस सूट को बनाना है। इस मामले में रूस की Zvezda कंपनी दुनिया के नंबर 1 नंबर पर आती है। 1952 में बनी ये कंपनी एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट क्रू के लिए पोर्टेबल लाइट सपोर्ट सिस्टम को डिजाइन, डेवलप और प्रोड्यूस करती है। ये कंपनी पहले भी कई स्पेससूट्स बना चुकी है। इसमें साल 1961 में स्पेस में ट्रैवल करने वाले पहले इंसान यूरी गैगरिक द्वारा इस्तेमाल किया गया स्पेससूट भी शामिल है।
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