भारत विश्‍व में तीसरा सबसे बड़ा स्‍टील उत्‍पादक देश बना

नयी दिल्ली। भारत जनवरी 2015 में चौथे सबसे बड़े उत्‍पादक अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए विश्व में तीसरे सबसे बड़े स्‍टील उत्‍पादक के रूप में उभरा है। भारत स्‍टील उत्‍पादन और उपभोग के मामले में दुनिया में नई पहचान रखता है। भारत एकमात्र देश है जो विश्‍व में बड़े स्‍टील उत्‍पादक देशों में शुमार है। 2015 में भारत ने स्‍टील उत्‍पादन और उपभोग में जबरदस्‍त वृद्धि दर्ज की है। 2015 के पहले 11 महीने में स्‍टील उत्‍पादन में हमारा रिकॉर्ड बेहतरीन रहा है।

India overtakes US as 3rd largest steel producer
भारत ने 2.8 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की लेकिन 2014 में हमारा उत्‍पादन 2.8 प्रतिशत कम रहा। 2015 में भारत की स्‍टील उत्‍पादन क्षमता में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और उपभोग में करीब 5 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

प्रधानमंत्री ने राष्‍ट्र को समर्पित किए दो आधुनिक संयंत्र

स्‍टील मंत्रालय के अंतर्गत सीपीएसई ने आधुनिकीकरण और विस्‍तारित परियोजनाओं का काम पूरा करते हुए अपनी कच्‍चे स्‍टील की क्षमता को बढ़ाया है। प्रधानमंत्री ने सेल के दो संयंत्रों - ओडिशा स्थित राउलकेला स्‍टील संयंत्र और पश्चिम बंगाल के बर्नपुर स्थित टिस्‍को स्‍टील संयंत्र राष्‍ट्र को समर्पित किया। इन दोनों संयंत्रों से देश की स्‍टील उत्‍पादन क्षमता में करीब 5 मिलियन टन का इजाफा हुआ है। भारत का स्‍टील अनुसंधान और प्रौद्योगिकी मिशन (एसआरटीएमआई) स्‍थापित दो सौ करोड़ रूपए की प्रारंभिक लागत से स्‍टील उद्योग में राष्‍ट्रीय महत्‍व का स्‍टील अनुसंधान और प्रौद्योगिकी मिशन स्‍थापित किया गया है। मिशन का कार्य इस क्षेत्र की गतिविधियों को रफ्तार देना है।

ग्रीनफील्ड स्टील संयंत्रों के लिए विशेष उद्देश्य वाहन (एसपीयू) हेतु दो सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर

स्टील उत्पादन की घरेलू क्षमता को बढ़ाने के लिए विशेष उद्देश्य वाहन की संकल्पना शुरू की गई। इसके लिए छत्तीसगढ़ और झारखण्ड में ग्रीनफील्ड स्टील प्लांट के लिए दो सहमति पत्रों पर पहले ही हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। प्रत्येक संयंत्र में हर साल तीन मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसे बाद में छह मिलियन टन किया जाएगा। इन स्टील संयंत्रों की स्थापना के लिए 17,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया जाएगा।

कुशलता विकास पहल

स्टील मंत्रालय ने सार्वजनिक उपक्रम मंत्रालय के जरिए कुशलता विकास को सहज बनाने के लिए कुशलता विकास और मंत्रालय के साथ एक सहमति पत्र के जरिए सामरिक भागीदारी की शुरूआत की है। एसएआईएल, आरआईएनएल और एमओआईएल, इनमें से प्रत्येक ने कुशलता विकास के लिए राष्ट्रीय कुशलता विकास निगम के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

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