अमेरिका के साथ इस डील में जल्दबाजी क्यों कर रही है मोदी सरकार?
नई दिल्ली। पाकिस्तान के साथ बढ़ते टकराव की वजह से भारत अमेरिका के साथ प्रीडेटर ड्रोन की डील जल्द करना चाह रहा है। मोदी सरकार चाहती है कि ओबामा के कार्यकाल के दौरान ही यह डील पक्की हो जाए।

भारत की ओर से 22 प्रीडेटर गार्जियन ड्रोन डील की शुरुआत जून में हुई थी, जो अब एडवांस स्टेज पर पहुंच चुकी है। दोनों पक्ष चाहते हैं कि डील को लेकर सारा काम अभी पूरा कर लिया जाए, ताकि ओबामा का कार्यकाल खत्म होने पर सिर्फ प्रशासनिक काम ही बचे।
सरकार से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, 'डील तेजी से आगे बढ़ रही है। हम चाहते हैं कि अगले कुछ महीनों में डील पूरी हो जाए।'
मोदी-ओबामा की दोस्ती का भी असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के आपसी संबंधों की वजह से डील में और आसानी हो रही है। ओबामा की विदेश नीति का रुझान एशिया की ओर बेहतर रहा है। अमेरिका ने भारत को हथियार सप्लाई में रूस को पीछे छोड़ा है। भारत सरकार अमेरिका के साथ यूएस न्यूक्लियर डील को लेकर भी चर्चा जारी है।
अमेरिका ने नहीं मानी भारतीय सेना की ये बात
भारतीय सेना ने प्रीडेटर ड्रोन के आर्म्ड वर्जन की भी डिमांड की है जो पाकिस्तान में स्थित आतंकी कैंप का पता लगा सकें। हालांकि अमेरिकी कानून के तहत ऐसे हथियारों की सप्लाई प्रतिबंधित है।
डोनाल्ड ट्रंप से है डील को खतरा
यह डील इस लिहाज से भी अहम है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव जीतने पर 'अमेरिका फर्स्ट' विदेश नीति वाले बयान से भारत समेत दूसरे एशियाई देशों से अमेरिका के संबंधों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। भारत-अमेरिका संबंधों के एक्सपर्ट ध्रुव जयशंकर ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो चीन एशिया में सबसे ज्यादा प्रभावशाली बन सकता है।












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