Coronavirus: कोविड-19 टास्क फोर्स के डॉक्टर ने कहा, भारत में स्टेज 3 आने का डर

नई दिल्ली। भारत में कोरोना वायरस (कोविड-19) के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। केवल एक दिन में ही 100 से ज्यादा पॉजिटिव मामलों की पुष्टि हो गई है। जिसके बाद भारत में संक्रमित लोगों की कुल संख्या 904 हो गई है, जबकि इस महामारी से 21 लोगों की मौत भी हुई है। इस बीच भारत में कोरोना वायरस के स्टेज 3 आने का डर बढ़ गया है। द क्विंट की रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 हॉस्पिटल टास्क फोर्स के संयोजक डॉक्टर गिरधर ज्ञानी ने कहा है, 'इसे हम स्टेज 3 कह रहे हैं। आधिकारिक तौर पर हम ऐसा नहीं कह सकते। ये तीसरी स्टेज की शुरुआत है।'

महामारी पर रोक लगाने के लिए अगले 5-10 दिन अहम

महामारी पर रोक लगाने के लिए अगले 5-10 दिन अहम

रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. गिरधर ज्ञानी ने 24 मार्च को प्रमुख डॉक्टरों और हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स की उस बैठक में हिस्सा लिया था जिसकी अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। द क्विंट को दिए इंटरव्यू में डॉ. गिरधर ज्ञानी ने कहा कि आने वाले पांच से 10 दिन इस महामारी पर रोक लगाने के लिए काफी अहम हैं क्योंकि फिलहाल जिन लोगों में बीमारी के लक्षण दिख नहीं रहे हैं, उनमें ये दिख सकते हैं।

क्या है कम्युनिटी ट्रांसमिशन?

क्या है कम्युनिटी ट्रांसमिशन?

बता दें कम्युनिटी ट्रांसमिशन इंसान से इंसान में बीमारी के बढ़ते प्रसार को कहा जाता है। जो किसी भी बीमारी के लिए सबसे अहम पड़ाव होता है। इस स्टेज में महामारी तेजी से फैलती है और ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लेती है। डॉ. गिरधर ज्ञानी का कहना है, 'हमारे पास कोविड-19 अस्पताल बनाने के लिए काफी कम समय बचा है। ऐसा इसलिए क्योंकि आने वाले किसी भी दिन भारत में इस बीमारी का विस्फोट हो सकता है। इसके साथ ही हमारे पास जरूरी तादाद में प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ और कोविड-19 अस्पताल भी नहीं हैं।'

'सभी लोगों की जांच नहीं हो रही'

'सभी लोगों की जांच नहीं हो रही'

कोरोना वायरस की जांच को लेकर उन्होंने कहा, 'सरकार केवल उन लोगों की जांच कर रही है, जिनमें (खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ) तीन लक्षण ही दिख रहे हैं। अगर किसी मरीज में इनमें से एक लक्षण भी दिख रहा है तो उसकी जांच नहीं हो रही है।' उन्होंने कहा कि अगर किसी इंसान को केवल बुखार है तो डॉक्टर किसी निजी या फिर सरकारी अस्पताल में जाकर इलाज कराने की सलाह देंगे।

'पर्याप्त जांच नहीं हो पा रही है'

'पर्याप्त जांच नहीं हो पा रही है'

डॉक्टर गिरधर ने कहा कि ऐसा हो सकता है कि जिसमें एक ही लक्षण दिखे वो संक्रमित हो। लेकिन सरकार को डर है कि अगर हर किसी का इलाज किया गया तो टेस्टिंक किट खत्म हो जाएंगी। जिसके कारण पर्याप्त जांच नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि बीमार लोगों में सभी लक्षण दिखने का इंतजार करना बंद करना होगा। सरकार ने जांच के लिए 118 लैब तैयार की हैं, जिनमें रोजाना 15 हजार जांच करने की क्षमता है। इसके अलावा 16 निजी लैब भी शुरू हो चुकी हैं, साथ ही इसमें रोज नई लैब शामिल हो रही हैं।

निजी अस्पतालों की मदद

निजी अस्पतालों की मदद

रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली बैठक में ये फैसला लिया गया कि सरकारी अस्पतालों को कोविड-19 अस्पतालों में बदला जाएगा, जिसमें निजी अस्पतालों की सहायता भी ली जाएगी। ताकि स्वास्थ्य उपकरण, प्रशिक्षित डॉक्टर और अन्य सहायता मुहैया कराई जा सके।

'कोविड-19 अस्पताल की पहचान करने की जरूरत'

'कोविड-19 अस्पताल की पहचान करने की जरूरत'

डॉ. गिरधर ने कहा, 'मेरे अनुसार सबसे पहले कोविड-19 अस्पताल की पहचान करने की जरूरत है। उसके बाद नर्स, मेडिकल स्टाफ और लोगों को प्रशिक्षण देना होगा। कुछ मेडिकल कॉलेज हॉस्टल्स को खाली कराने को कहा गया था, जिसपर प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें क्यों खाली कराया जाए, जो फाइनल ईयर के छात्र हैं, उन्हें कॉलेज में रुककर इमरजेंसी की हालत में सहायता करनी चाहिए। जो फाइनल ईयर के छात्र हैं, उन्हें सर्टिफिकेट दिए जा सकते हैं। इसके साथ ही उन्हें प्रशिक्षण देकर कोविड-19 अस्पतालों में काम पर लगाया जा सकता है।'

दिल्ली में तीन हजार बेड वाला अस्पताल

दिल्ली में तीन हजार बेड वाला अस्पताल

डॉ. गिरधर ने आगे कहा कि दिल्ली की आबादी 3 करोड़ है, इसलिए हमारी सलाह थी कि यहां कम से कम तीन हजार बेड वाला अस्पताल तैयार रखा जाए। साथ ही कोविड-19 केंद्रों की भी जरूरत होगी, जहां उन लोगों को रखा जा सकेगा, जो क्वारंटीन में होंगे या फिर बीमारी से ठीक हो चुके होंगे। इसके लिए अस्पतालों और गेस्ट हाउस को ऐसे केंद्रों में तब्दील किया जा सकेगा। वहीं गांवों और छोटे शहरों में बीमारी को नियंत्रित करने को लेकर उन्होंने कहा कि बिजनौर जैसे इलाके की आबादी के हिसाब से वहां 600 बेड वाले अस्पताल की जरूरत होगी लेकिन वहां के अस्पताल छोटे हैं। ऐसी स्थिति में कई अस्पतालों को एक साथ जोड़ना होगा।

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