मोदी सरकार का सबसे बड़ा दांव, समंदर में चारों खाने चित हो जाएगा चीन

टीओआई में छपी खबर के मुताबिक नवंबर 2007 में पहली बार इस डील की जरुरत महसूस की गई थी। उस समय देश में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी।

नई दिल्ली। चीन के साथ लगातार बढ़ते विवाद और सीमा पर तनातनी के बीच मोदी सरकार ने अहम फैसला लिया है। भारत की समुद्री सीमा को और मजबूत करने के लिए करीब 10 साल की देरी के बाद मोदी सरकार बड़ी डील को लेकर पहल की है। इस डील के तहत भारतीय शिपयार्ड में 70 हजार करोड़ की लागत से 6 अत्याधुनिक स्टेल्थ पनडुब्बी का निर्माण किया जाएगा। फ्रांस, जर्मनी, रुस, स्वीडन, स्पेन और जापान के सहयोग से इन 6 पनडुब्बियों को निर्माण का काम शुरू होगा।

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      India China standoff : China threatens India with war on dokalam controversy । वनइंडिया हिंदी

      10 साल बाद लिया गया अहम फैसला

      पनडुब्बी निर्माण को लेकर मोदी सरकार के इस रक्षा कार्यक्रम को प्रोजेक्ट-75 (इंडिया) नाम दिया गया है। टीओआई में छपी खबर के मुताबिक नवंबर 2007 में पहली बार इस डील की जरुरत महसूस की गई थी। उस समय देश में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी। हालांकि उस समय से ये डील लालफीताशाही की चलते मुकाम तक नहीं पहुंची थी। इस साल मई में रक्षा मंत्रालय ने इस डील को अंतिम रूप देने के लिए नई "सामरिक साझेदारी" नीति अपनाई।

      6 शिपबिल्डर्स को भेजा गया रिक्वेस्ट फॉर इन्फोर्मेशन

      6 शिपबिल्डर्स को भेजा गया रिक्वेस्ट फॉर इन्फोर्मेशन

      टीओआई में छपी रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार ने हाल के दिनों में पनडुब्बी बनाने के लिए 6 शिपबिल्डर्स को रिक्वेस्ट फॉर इन्फोर्मेशन (आरएफआई) भेजा है। इनमें नवल ग्रुप-डीसीएनएस (फ्रांस), थाइसेनक्रुप मरीन सिस्टम (जर्मनी), रोसोबोरोनएक्सपर्ट रुबीन डिजाइन ब्यूरो (रूस), नवानतिया (स्पेन), साब (स्वीडन) और मित्सुबिशी-कावासाकी हेवी इंडस्ट्रीज कम्बाइन (जापान) शामिल हैं। अधिकारी ने बताया कि इन कंपनियों से 15 सितंबर तक जवाब देने के लिए कहा गया है।

      6 देशों से सहयोग बनाई जाएगी खास पनडुब्बी

      6 देशों से सहयोग बनाई जाएगी खास पनडुब्बी

      इन कंपनियों की ओर से आरएफआई का जवाब दिए जाने के बाद नेवी आगे की प्रक्रिया शुरू करेगी। कंपनियों को नवल स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट (एनएसक्यूआर) के लिए भेजा जाएगा। जिसमें इन विदेशी सहयोगियों के साथ बातचीत के जरिए रणनीतिक समझौते के लिए भारतीय शिपयार्ड का चुनाव किया जाएगा। रक्षा विभाग के अधिकारी के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में करीब दो साल का समय लग सकता है। वहीं डील पर सभी पक्षों के आखिरी फैसले के बाद पहली पनडुब्बी करीब सात-आठ साल में तैयार हो सकेगी।

      6 डीजल-बिजली इंजन से चलने वाली पनडुब्बियां बनाने की योजना

      6 डीजल-बिजली इंजन से चलने वाली पनडुब्बियां बनाने की योजना

      फिलहाल रिपोर्ट में पता चला है कि भारतीय रक्षा मंत्रालय इस पूरी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने की कोशिश में जुटा हुआ है। भारतीय नौसेना इस प्रोजेक्ट के जरिए 6 डीजल-बिजली इंजन से चलने वाली पनडुब्बियां बनवाना चाहता है। इन पनडुब्बियों में धरती पर मार करने वाली क्रूज मिसाइल, एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्सन, पानी के अंदर ज्यादा देर तक रहने की क्षमता, भारतीय हथियार और सेंसर जैसी सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी। प्रोजेक्ट-75 (इंडिया) के तहत 18 डीजल-बिजली पनडुब्बियां, 6 परमाणु हमले में सक्षम हमलावर पनडुब्बियां (एसएसएन) और 4 परमाणु ऊर्जा से चलने पनडुब्बियां जिनमें लम्बी दूरी की परमाणु मिसाइल (एसएसबीएन) लगी हों, बनाने की योजना है।

      13 पुरानी पनडुब्बियां हैं भारत के पास

      13 पुरानी पनडुब्बियां हैं भारत के पास

      आपको बता दें कि भारतीय नौसेना के पास फिलहाल केवल 13 पुरानी पनडुब्बियां हैं, इनमें से आधी हरदम सक्रिय रहती हैं। हालांकि इन पनडुब्बियों में से कम से कम 10 ऐसी हैं जो 25 साल से ज्यादा पुरानी हैं। इनमें अभी भारत के पास दो परमाणु क्षमता संपन्न पनडुब्बियां हैं। वहीं आईएनएस अरिहंत (एसएसएसबीएन) और आईएनएस चक्र (एसएसएन) भी भारतीय नौसेना के पास हैं।

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