चीन के OBOR प्रोजेक्ट को काउंटर करने के लिए भारत-जापान ने बनाया प्लान
नई दिल्ली। दक्षिणी एशिया में अपनी धाक जमाने के लिए चीन अपनी हर कोशिश कर रहा है। चीन अपने वन बेल्ट वन रोड़ (OBOR) प्रोजेक्ट के जरिए क्रॉस बॉर्डर कनेक्टिवीटि को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास में जुटा है। इस प्रोजेक्ट में भारत को छोड़कर सभी दक्षिणी एशियाई देश शामिल है। इस प्रोजेक्ट पर भारत लंबे समय से अपनी निगाहे जमाए बैठा है, इस बीच मोदी सरकार ने काउंटर बैलेंस की रणनीति अपनाई, जिससे कि शी जिनपिंग के OBOR प्रोजेक्ट को जवाब दिया जा सके।

भारत ने दिया ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी पर जोर
चीन के OBOR को टक्कर देने के लिए भारत ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी पर दिया जोर दे रहा है, जिसमें जापान भी शामिल है। इसी महीने 11 और 12 दिसंबर को आसियान-इंडिया कनेक्टिविटि समिट का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें आसियान देशों के साथ-साथ जापान भी शामिल होगा। इस समिट का उद्देश्य दक्षिण पूर्वी एशिया में आर्थिक और औद्योगिक रिश्तों को मजबूत कर इस पर नए काम शुरू करना है। भारत और जापान दो एशियाई पॉवरफुल देश चीन के OBOR प्रोजेक्ट को टक्कर देने के लिए तैयार है।

भारत-जापान मिलकर कर रहे हैं काम
विशेषज्ञों की मानें तो चीन का OBOR प्रोजेक्ट कई एशियाई देशों को कर्ज में डुबा सकता है। भारत और जापान चाहते हैं कि इन देशों में विकास और औद्योगिक क्षेत्रों को बढ़ावा देकर नजदीक लाया जाए। इसके लिए भारत और जापन दोनो ही मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे कि चीन के OBOR प्रोजेक्ट को काउंटर किया जा सके।

भारत को क्यों है OBOR से आपत्ति
भारत को सबसे बड़ी दिक्कत चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) पॉलिसी से है, जो कि OBOR के प्रोजेक्ट में आता है। चीन अपने वन बेल्ट वन रोड प्रॉजेक्ट के तहत चीन-पाक आर्थिक गलियारा जम्मू-कश्मीर के उस इलाके से होकर गुजरता है, जिसे भारत अपना मानता है। भारत का कहना है कि आपसी कनेक्टिविटि का समर्थन करता है, लेकिन किसी दूसरे देश के संप्रभुता का भी सम्मान
किया जाना चाहिए, जोकि चीन-पाकिस्तान की तथाकित CPEC पॉलिसी इस क्षेत्र में बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।












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