रूस के साथ एक मेगा प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करेगा भारत
नई दिल्ली। अमेरिका इस समय रक्षा खरीद के मामले में भारत का सबसे बड़ा साझीदार बनकर उभर रहा है। लेकिन रूस हमेशा से ही भारत का एक अहम रणनीतिक और रक्षा साझीदार रहा है और शायद आगे भी रहेगा। रूस के साथ भारत रक्षा साझीदारी को और मजबूत करते हुए अब उस रुके हुए प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने के लिए बेकरार है जिसके तहत इंडियन एयरफोर्स के लिए पांचवीं पीढ़ी के सुखोई फाइटर जेट्स का निर्माण होना है।

भारत की जरूरतों को पूरा करेगा यह जेट
इन जेट्स को सुखोई टी-50 या फिर पीएके-एफए के तौर पर जाना जाता है। इंग्लिश डेली टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुातबिक रक्षा मंत्रालय रूस के साथ फिफ्थ जनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट को डेवलप करने के मकसद से फाइनल डिजाइन कांट्रैक्ट को सील करने की दिशा में काम कर रहा है।
भारत का मानना है कि पाकिस्तान और चीन की ओर से बढ़ते हुए खतरों को देखते हुए फिफ्थ जनरेशन का फाइटर जेट सारी जरूरतों को पूरा कर सकता है।
25 बिलियन डॉलर में 127 जेट्स का निर्माण
भारत और रूस मिलकर 127 एडवांस सुखोई का निर्माण करेंगे जिनकी लागत करीब 25 बिलियन डॉलर आएगी। रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने कहा है कि भारत इस बात को सुनिश्चित करेगा कि यह किसी भी ऑपरेशन के समय इन जेट्स की उपलब्धता ज्यादा से ज्यादा हो ताकि फाइटर जेट्स की कमी से जूझती इंडियन एयरफोर्स को और ताकत मिल सके।
सुखोई बनेंगे सुपर सुखोई
इस प्लान के तहत भारत वर्तमान में सुखोई की स्क्वाड्रन को एडवांस्ड रडार और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस कर, उसे सुपर सुखोई बना देंगे। इस बीच भारत फ्रांस के साथ 36 रफाल जेट्स की डील को फाइनल करने के करीब पहुंच चुका है। यह डील 7.8 बिलियन डॉलर की है।
स्क्वाड्रन की कमी से जूझती एयरफोर्स
इंडियन एयरफोर्स में इस समय सिर्फ 33 फाइटर स्क्वाड्रन हैं जिसमें से 11 मिग-21 और मिग-27 की हैं। जबकि इंडियन एयरफोर्स को 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है।












Click it and Unblock the Notifications