जानिए कौन हैं 6 जून को बॉर्डर पर चीनी जनरल से मिलने वाले ले. जनरल हरिंदर सिंह
नई दिल्ली। छह जून को लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर जारी विवाद को सुलझाने के मकसद से बॉर्डर पर मीटिंग होने वाली है। विवाद को शुरू होने के पूरे एक माह बाद होने वाली मीटिंग पर न सिर्फ भारत और चीन बल्कि दुनियाभर के विशेषज्ञों की नजरें टिकी हुई हैं। इस मीटिंग को बॉर्डर पर भारत और चीन की सेना के बीच जारी टकराव को टालने के लिए काफी संवदेनशील माना जा रहा है। भारत की तरफ से लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह वार्ता को लीड करेंगे। आइए आपको बताते हैं कि कौन हैं लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह। ले. जनरल सिंह ने 10 साल पहले चीन पर टिप्पणी की थी और 10 साल बाद वह चीनी सेना के साथ विवाद को सुलझाने को रेडी हैं।

लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर
ले. जनरल हरिंदर सिंह लद्दाख की राजधानी लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर हैं। इस कमांड को 'फायर एंड फ्यूरी' के नाम से भी जानते हैं और यह उधमपुर स्थित नॉर्दन आर्मी कमांड के तहत आती है। ले. जनरल सिंह को काउंटर इनसर्जेंसी का एक्सपर्ट माना जाता है। 14 कोर को कमांड करने से पहले वह सेना के कई अहम पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। 14 कोर पर आने से पहले वह डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री इंटेलीजेंस, डायरेक्ट जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस और डायरेक्टर जनरल ऑफ लॉजिस्टिक्स एंड स्ट्रैटेजिक मूवमेंट को संभाल चुके हैं। नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीएस) से पासआउट ले. जनरल सिंह अफ्रीका में यूनाइटेड मिशन के साथ भी तैनात रहे हैं।

साल 2010 में क्या कहा था चीन को लेकर
साल 2010 में ले. जनरल सिंह कर्नल के पद पर थे और उन्होंने 'इमरजिंग लैंड वॉरफाइटिंग डॉक्टराइन्स एंड केपेबिलिटीज' के टाइटल के साथ पेपर लिखा था। इसमें उन्होंने लिखा था कि भारत और चीन सन् 1962 के बाद से ही अपने सीमा विवाद को सुलझाने में लगे हुए हैं। बॉर्डर पर टकराव एक ऐसा मसला है जिसे रोका न जाए तो वह एक स्थानीय संघर्ष में तब्दील हो जाता है। 10 साल बाद अब ले. जनरल को जिम्मा दिया गया है कि वह इसी टकराव को सुलझाने का रास्ता निकालें। यह बात भी दिलचस्प है कि ले. जनरल सिंह से ले. जनरल वाइके जोशी 14 कोर को कमांड कर रहे थे और अब वह नॉर्दन आर्मी कमांडर हैं। ले. जनरल वाईके जोशी को चीन के मसलों का विशेषज्ञ माना जाता है और माना जाता है कि उन्होंने ले. जनरल सिंह को छह जून की मीटिंग के लिए बेहतर निर्देश दिए होंगे।
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जम्मू कश्मीर का अच्छा खास अनुभव
उनके पास जम्मू कश्मीर का अच्छा खासा अनुभव है। वह नॉर्थ कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन को कमांड कर चुके हैं। एनडीए से पासआउट होने के बाद ले. जनरल सिंह मराठा लाइट इंफेंट्री में कमीशंड हुए थे। इसके अलावा वह डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज (डीएसएसी) से भी ग्रेजुएट हैं। सिंगापुर स्थित एस राजारत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज और इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (आईडीएसए) में भी वह सीनियर रिसर्च फेलो रहे हैं। उन्हें लिखने का भी शौक है और उनके कई निबंध और पेपर्स पब्लिश हो चुके हैं। उनकी एक किताब जिसका टाइटल है 'एस्टैब्लिशिंग इंडियाज मिलिट्री रेडीनेस कंसर्न एंड स्ट्रैटेजी' रिलीज का इंतजार कर रही है।

हो चुकी है 10 दौर राउंड की बातचीत
भारत और चीन की सेनाओं के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर जारी विवाद को सुलझाने के मकसद से छह जून को वार्ता होगी। लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की इस वार्ता में पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव को सुलझाने के विकल्पों पर बात हो सकती है। सेना के सूत्रों की तरफ से बताया गया है कि भारत की तरफ से 14 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह मौजूद होंगे और अपने चीनी समकक्ष से मसले पर विस्तार से चर्चा करेंगे। सेना सूत्रों की मानें तो पिछले करीब एक माह से जारी विवाद को सुलझाने के लिए भारत और चीन के बीच 10 दौर की वार्ता हो चुकी है। इसमें से तीन मेजर जनरल स्तर की थी। सेना के विशेषज्ञ मान रहे हैं कि लद्दाख के हालात जून 2017 में डोकलाम में पैदा हुई स्थितियों से पूरी तरह से अलग हैं।

इस बार क्या है चीन की समस्या
भारत और चीन के बीच इस बार तनाव का केंद्र बिंदु है गलवान घाटी। कहा जा रहा है कि चीनी सेना गलवान घाटी तक आ गई है। भारत की तरफ से बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है।पिछले वर्ष बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) ने डारबुक-श्योक-डीबीओ यानी दौलत बेग ओल्डी में एक सड़क का निर्माण शुरू किया था। यह हिस्सा भारत की सीमा में पड़ता है। जिस जगह पर सड़क निर्माण हो रहा है वह भारतीय सीमा के 10 किलोमीटर के अंदर है और तकनीकी तौर पर भारत की सीमा है। लेकिन चीन इस बात को मानने पर राजी नहीं है। यह सड़क खासतौर पर गलवान नदी से होकर गुजरती है। सड़क को एलएसी से जोड़ने के मकसद से भारत इस सड़क का निर्माण करा रहा है। चीन को इस बात पर ही आपत्ति है।












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