चीन ने बॉर्डर पर तैनात की S-400 रूसी मिसाइल, एयरक्राफ्ट को 400 किमी दूर से बना सकती है निशाना
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच टकराव के 150 दिन पूरे होने वाले हैं और टकराव के खत्म होने के आसार नहीं नजर आ रहे हैं। दोनों देशों के करीब 50,000 सैनिक इस समय लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर तैनात कर दिए हैं। 21 सितंबर को दोनों देशों के बीच छठें दौरे की कोर कमांडर वार्ता हुई थी। पहले की तरह इस बार भी वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच एक और दौर कोर कमांडर वार्ता होने वाली है जिसकी तारीख अभी तक तय नहीं है। इन सबके बीच ही पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) ने एलएसी पर एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम को तैनात कर दिया है।
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IAF को जवाब देने के मकसद से तैनाती
चीन की तरफ से एस-400 डिफेंस सिस्टम को इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) की तरफ से किसी भी कार्रवाई का जवाब देने के मकसद से तैनात किया गया है। भारत की तरफ से मोल्डो में हूई 21 सितंबर की मीटिंग में चीन से मांग की गई है कि जवानों को पूरी तरह से पीछे कर अप्रैल 2020 वाली यथास्थिति को बहाल किया जाए। इसके साथ ही दोनों देश इस बात पर भी रजामंद हुए थे कि स्थिति को और ज्यादा जटिल नहीं बनाया जाएगा। साथ ही किसी भी प्रकार की गलतफहमी से बचा जाएगा। जो बात सबसे ज्यादा परेशान करने वाली है वह एस-400 सिस्टम का तैनात होना है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि पीएलए ने चुमार इलाके के दूसरी तरफ से एस-400 को तैनात कर दिया है। साथ ही इस डिफेंस सिस्टम की एक और रेजीमेंट को देपसांग सेक्टर में तैनात किया जा रहा है।रूस में बने एस-400 मिसाइल सिस्टम 400 किलोमीटर से ज्यादा रेंज पर किसी भी टारगेट को निशाना बना सकता है।

चोटियों पर भारत का कब्जा, चीन आया दबाव में
29 और 30 अगस्त को भारत और चीन की सेनाओं के बीच पैंगोंग त्सो के दक्षिणी हिस्से में चुशुल सेक्टर में टकराव हुआ था। इसके बाद अगले 20 दिनों के अंदर भारत ने रणनीतिक चोटियों पर कब्जा कर लिया है। इस समय भारत की सेनाएं उत्तर से दक्षिण में कई अहम चोटियों जैसे मगर हिल, रेजांग ला, रेकिन ला और मुखपारी के साथ ही गुरुंग हिल पर भी तैनात हो चुकी हैं। इस पर तैनाती के साथ ही सेना चीन की किसी गतिविधि पर नजर रख सकती है। 21 सितंबर को जो वार्ता हुई थी उसमें 14 कोर के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिहं ने चीन को स्पष्ट कर दिया था कि इंडियन आर्मी अब उन चोटियों से पीछे नहीं हटेगी जहां पर उसने कब्जा कर लिया है। 21 सितंबर को हुई छठें दौर की कोर कमांडर वार्ता के दौरान चीन की तरफ कहा गया था कि वह तब तक लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर डिसइंगेजमेंट पर कोई चर्चा नहीं करेगा जब तक कि भारत चोटियों को नहीं खाली करता है।

दोनों देशों के बीच युद्ध से हालात
दोनों देशों के बीच इस समय एलएसी पर युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। इस वर्ष अप्रैल से ही पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) की तरफ से भारतीय सेना को भड़काने वाली कार्रवाई की जा रही है। पीएलए के जवान इस बात पर अड़े हैं कि जब तक इंडियन आर्मी पैंगोंग त्सो के दक्षिणी हिस्से से नहीं जाएगी, मसला नहीं सुलझेगा। भारत की तरफ से भी चीन को कहा गया है कि वह पहले डिएस्कलेशन का एक रोडमैप उसे दिया जाए ताकि यह पता लग सके कि पूर्वी लद्दाख में कैसे पीछे हटने वाली है। एक अधिकारी की तरफ से कहा गया है कि चर्चा को सिर्फ एक या दो जगहों तक ही सीमित रखा जाए जबकि एलएसी के हर हिस्से पर चीन की सेना का बड़ा जमावड़ा है। भारत ने देपसांग समेत टकराव वाले सभी इलाकों पर चर्चा करनी शुरू कर दी है।

कहां पर कितने चीनी सैनिक
भारत की तरफ से कहा जा चुका है कि एलएसी पर डिसइंगेजमेंट चर्चा के दौरान इन पर भी बातचीत होनी चाहिए। देपसांग में इस समय एक अनुमान के मुताबिक 5,000 सैनिक भारत की तरफ और करीब 5,000 सैनिक चीन की तरफ से तैनात हैं। ये सभी सैनिक टैंक्स और एयर डिफेंस गन से लैस हैं। भारत के पेट्रोलिंग प्वाइंट (पीपी) 14, पीपी 15, पीपी-17 और पीपी17ए (गोगरा पोस्ट) पर चीन के करीब 9,000 सैनिक मौजूद हैं। इसके अलावा 2,000 से 3,000 चीनी सैनिक पीपी-18 से पीपी-23 में तैनात हैं। वहीं पैंगोंग त्सो के उत्तरी हिस्से में जहां पीएलए ने अपना दावा ठोंका है, वहां पर एक अनुमान के मुताबिक करीब 2,500 चीनी सैनिक मौजूद हैं। इसके अलावा करीब 10,000 सैनिक दक्षिणी हिस्से में हैं। वहीं इससे अलग स्पांगुर झील इलाके में करीब 250 टैंक्स की भारी तैनाती भी देखी जा सकती है।
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