गलवान घाटी में भारतीय सेना पर नजर रखने के लिए पोस्ट तैयार कर रहे थे चीनी, कर्नल बाबू ने था रोका!
नई दिल्ली। 15 जून की रात लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के हमले ने भारत और चीन के संबंधों को अंधकार में धकेल दिया है। इंग्लिश अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स की मानें तो पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिक उस समय भड़क गए थे जब उन्हें भारत की तरफ पेट्रोलिंग प्वाइंट पर बन रही एक ऑब्जर्वेशन पोस्ट के निर्माण से रोका गया। इसकी वजह से दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसक टकराव की नौबत आ गई।

काराकोरम तक रखता भारतीय जवानों पर नजर
जिस पोस्ट को लेकर चीन के जवान भड़के थे, उसकी मदद से न सिर्फ काराकोरम तक चीन भारतीय जवानों की गश्त पर नजर रख सकता था बल्कि वह अपने सैन्य वाहनों को दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) रोड की तरफ भी मोड़ सकता था। जो बात सबसे अहम है वह है कि चीन की सेना इस पोस्ट को भारत के हिस्से वाली एलएसी पर बना रही थी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस मुद्दे पर अपनी बातचीत को अपने समकक्ष वांग वाई के साथ बात की है। इससे कहीं न कहीं यह बात भी साबित होती है कि चीन के सैनिक पहले से ही इस योजना के साथ आए थे कि वह एलएसी की स्थिति को बदलने की कोशिश टकराव की आड़ लेकर करेंगे।

1978 में भारत ने बनाई थी पोस्ट
उनकी योजना इंडियन आर्मी को पेट्रोलिंग प्वाइंट (पीपी) 14 पर धकेलने की भी थी। सन् 1978 में इंडियन आर्मी की तरफ से पीपी 14 को स्थापित किया गया था। यह पोस्ट गलवान नदी घाटी और गलवान नाले के ऊपरी हिस्से पर है। गलवान नाना श्योक नदी में मिलता है जिसके किनारे पर डीएसबीओ रोड का निर्माण इंडियन आर्मी के इंजीनियर्स कर रहे हैं। छह जून को मिलिट्री कमांडर्स की मीटिंग हुई थी और उसके बाद चीनी सैनिकों को पीपी 14 से जाना था। लेकिन चीनी जवान अड़े रहे और पोस्ट छोड़ने के लिए राजी नहीं हुए।

कर्नल बाबू ने किया था विरोध
डि-एस्कलेशन जारी था और चीनी जवान इसके बाद भी पीपी 14 के करीब एक वॉच पोस्ट सेट करना चाहते थे। वो इस पोस्ट से भारतीय जवानों पर नजर रखना चाहते थे। इस बात का 16 बिहार रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) कर्नल संतोष बाबू ने कड़ा विरोध किया। कर्नल बाबू समझ गए थे कि चीनी जवानों ने डिसइंगेजमेंट के नियमों को तोड़ा है। सोमवार को कर्नल बाबू और उनके कंपनी कमांडर पीपी 14 तक गए। यहां पर उन्होंने अपने चीनी समकक्ष से उस ढांचे को हटाने के लिए कहा। इसके बाद दोनों के बीच गर्मागर्म बहस हो गई। दोनों तरफ से बहस के बीच ही घूसे चल लगे। चीनी जवान जो गलवान नदी के करीब मौजूद थे पीपी 14 के करीब सड़क पर पहुंच गए।

दोनों तरफ से चले लात-घूंसे
यहां पर भारतीय जवान मौजूद थे लेकिन पीएलए जवानों की संख्या कहीं ज्यादा थी। चीन की तरफ से पीपी 14 पर जो भारतीय हिस्सा है, वहां पर जिस पोस्ट को तैयार किया जा रहा था, उससे पीएलए को बड़ी मदद मिल सकती थी। इस पोस्ट की मदद से इंडियन आर्मी के मूवमेंट पर जो चीन नजर रख सकता था। साथ ही पोस्ट की मदद से इंडियन आर्मी डीबीओ कैंप से आगे तक अभी जो सप्लाई आसानी से कर लेती है, पोस्ट के बनने के बाद उसे चीन की दया पर निर्भर रहना पड़ता। 600 से ज्यादा सैनिक सोमवार को हैंड-टू-हैंड कॉम्बेट और घूंसेबाजी में शामिल थे। दोनों तरफ के जवान गलवान नाला और नदी में गिरे हैं। गलवान नाले पर बहने वाला पानी काफी ठंडा होता है और यहां का तापमान भी जीरो से नीचे रहता है। ऐसे में भारतीय जवान जो नाले में गिरे उनके बचने की संभावना भी काफी कम थी।












Click it and Unblock the Notifications