India China: पैंगोंग इलाके समेत लद्दाख में 4 नए एयरपोर्ट और 37 हेलीपैड बनाने की योजना, ड्रैगन का बढ़ेगा टेंशन
लेह, 18 जुलाई: भारत लद्दाख में एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने की कोशिशों में जुटा हुआ है। यह इसलिए खास है कि पिछले करीब 15 महीने से लद्दाख के कई इलाकों में भारत का चीन के साथ मसला अभी भी नहीं सुलझा है। जबकि, दूसरी तरफ चीन तिब्बत के इलाके में अपने एयरबेस को लगातार बढ़ाने में लगा हुआ है। उनका अत्याधुनिकीकरण कर रहा है और छोटे-मोटे एयरस्ट्रिप्स को भी मिलिट्री के जंगी हवाई जहाजों और मिलिट्री साजो-सामान ढोने लायक विमानों को उतारने वाले रनवे में तब्दील कर रहा है। अब भारत भी पूरे लद्दाख क्षेत्र में 4 नए एयरपोर्ट और 37 हेलीपैड बनाने की योजना पर काम कर रहा है, जो कि इस केंद्र शासित प्रदेश में टूरिज्म को तो बढ़ावा देगा ही, साथ ही प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी वहां तक राहत सामग्री पहुंचाने में बड़ा काम आ सकता है।

लद्दाख में 4 नए एयरपोर्ट और 37 हेलीपैड बनाने की योजना
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट चीन को टेंशन में डाल सकता है। इसके मुताबिक भारत ने लद्दाख में चार नए एयरपोर्ट बनाने के लिए जमीन तलाश ली है, जिनपर भारी-भरकम हवाई जहाज भी उतारे जा सकते हैं। इनके अलावा लद्दाख में 37 हेलीपैड के भी निर्माण का काम अभी चालू है। ये हेलीपैड उन दर्जनों मिलिट्री इंस्टॉलेशन के अलावा हैं, जो दशकों से काम कर रहे हैं। नए हेलीपैड लद्दाख के उन दूर-दराज इलाकों में भी बनाए जा रहे हैं, जहां पहुंचना अभी तक बहुत ही मुश्किल रहा है। नए हेलीपैड विशाल चिनूक सीएच 47 हेलीकॉप्टर को भी सहजता से लैंड कराने में सक्षम होंगे। इससे आपदा और आपात स्थिति या सैन्य अभियानों में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है। इनमें से ज्यादातर हेलीपैड तो इसी साल से शुरू होने जाने की संभावना है।
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पैंगोंग इलाके में भी एयरपोर्ट बनाने की तैयारी
लद्दाख में जो चार नए एयरपोर्ट बनाने की योजना है उनमें से एक लेह में भी है, जो कि मौजूदा एयरपोर्ट के अलावा एक वैकल्पिक एयरफिल्ड के रूप में होगी। साथ ही जंस्कार वैली में भी एक एयरफिल्ड बनाने की योजना है। सबसे अहम बात ये है कि भारत की इस एयर कनेक्टिविटी योजना में लद्दाख का मशहूर चांगथंग का इलाका भी शामिल है, जिसके नजदीक ही पैंगोंग झील है। गौरतलब है कि पैंगोंग झील के किनारे की चोटियों पर पिछले साल भारतीय सैनिकों ने ऐसा दम दिखाया था कि चीन की सेना को आखिरकार बातचीत के टेबल पर आना पड़ा और फिर दोनों सेनाएं उस इलाके से पीछे हटने के लिए तैयार हुईं। नई योजना के तहत कारगिल में भी एक वैकल्पिक एयरपोर्ट बनाने की तैयारी है, जिसके लिए जमीन तलाश ली गई है। वहां मौजूदा वक्त में जो एयरपोर्ट है, वह मिलिट्री एयरफिल्ड है और उसपर यात्री विमानों को उतरने की मंजूरी नहीं है।

एयरपोर्ट के लिए जमीनों की हुई पहचान
जानकारी के मुताबिक नए एयरपोर्ट के लिए जमीनों की पहचान करने के साथ-साथ प्रारंभिक चर्चा पूरी हो चुकी है। इसके बाद डीजीसीए, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और इंडियन एयरफोर्स जैसे संगठनों की ओर से एक साझा रिपोर्ट दी जाएगी। जानकारी के मुताबिक असल योजना ये है कि लद्दाख की सभी महत्वपूर्ण घाटियों में बड़े विमानों के उतरने और उड़ान भरने लायक एयरफिल्ड हमेशा तैयार रहे। इस समय लेह के अलावा नुब्रा वैली के थोइसे में ही बड़े यात्री विमान और सभी तरह के सैन्य विमानों को उतारा जा सकता है। लद्दाख को बेहतर एयरकनेक्टिविटी देने की यह योजना बेहतरीन ऑल-वेदर लिंक रोड के अलावा है, जिसमें जंस्कार वैली वाली सड़क भी शामिल है, जो कि मनाली-लेह हाइवे का वैकल्पिक मार्ग है।

भारत की तैयारियों से बढ़ेगा ड्रैगन का टेंशन
गौरतलब है कि पिछले साल लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर कई जगहों पर चीन की ओर से पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के तनाव भड़काने वाले कदमों के बाद से ही चीन तिब्बत में तेजी से अपना एयरबेस बढ़ाने में जुटा हुआ है और कई छोटे रनवे को भारी सैन्य विमानों को उतारने वाले रनवे में बदलने की कोशिश कर रहा है। एलएसी के उसपार यानी तिब्बत में चीन जिस तरह की तैयारियों में जुटा है, उनमें रनवे का विस्तार, सैनिकों के लिए ठोस ठिकानों के निर्माण के साथ ही नया रडार और एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती शामिल है। यह खेल ड्रैगन पूरे पूर्वी लद्दाख में कर रहा है। हालांकि, उसकी यह हरकत वास्तविक नियंत्रण रेखा के उसपार लगभग ज्यादातर इलाकों में जारी है।












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