India-China Ladakh standoff: चीन के विरोध के बाद भी नहीं रुकेगा लद्दाख में बनी रही सड़क का काम
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख के गलवान इलाके में जारी टकराव सोमवार रात को हिंसक हो गया। सोमवार रात दोनों सेनाओं के बीच टकराव हिंसक हो गया। इस टकराव में इंडियन आर्मी के एक ऑफिसर समेत दो जवानों के शहीद हो गए हैं। चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से भारत को वॉर्निंग दी गई है। चीन ने भारत से कहा है कि वह किसी भी तरह से एकपक्षीय कार्रवाई के बारे में न सोचे। इस तनाव के बाद भी भारत ने तय कर लिया है कि किसी भी सूरत में उस सड़क का निर्माण कार्य बंद नहीं किया जाएगा, जो चीन की आंखों में चुभ रही है।
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जम्मू पहुंचे झारखंड के मजदूर
भारत और चीन के बीच जारी टकराव एक माह से ज्यादा समय से चल रहा है। पूर्वी लद्दाख में अब 1600 से ज्यादा मजदूर झारखंड से लेह के रास्ते पर हैं। ये मजदूर बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) की तरफ से लद्दाख में तैयार हो रही सड़क के निर्माण कार्य में मदद करने वाले हैं। भारत और चीन के कमांडर्स के बीच बॉर्डर पर स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए लगातार मीटिंग्स जारी हैं। सोमवार रात हुए ताजा घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच वार्ता जारी है ताकि हालात को नियंत्रित किया जा सके। 15 जून को भी हिंसा से पहले ब्रिगेड कमांडर स्तर की वार्ता हुई है।

अक्साई चिन के ठीक सामने है सड़क
एक सरकारी अधिकारी की तरफ से बताया गया है कि झारखंड से मजदूरों को लेकर स्पेशल ट्रेन जम्मू के उधमपुर पहुंची है। अब मजदूरों को लेह और लद्दाख के दूसरे एरिया में ले जाया जाएगा। गलवान घाटी में चीन को दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) रोड से खासी दिक्कतें हो रही हैं। यह सड़क देपसांग, गलवान घाटी और काराकोरम पास तक रास्ता मुहैया कराएगी। इस सड़क को बीआरओ ने एक साल पहले पूरा कर लिया था। अब इसके दूसरे हिस्सों पर काम जारी है। यह सड़क अक्साई चिन के बिल्कुल सामने है जिस पर चीन ने कब्जा कर रखा है। सड़क की वजह से गलवान नदी एक बार फिर से तनाव के केंद्र में आ गई है।

दो सड़कों का निर्माण जारी
अहम इलाके को बाकी हिस्सों से जोड़ने के लिए अग्रिम इलाके (फॉरवर्ड एरिया) जिसे मिलिट्री सब-सेक्टर नॉर्थ (एसएसएन) कहती है, वहां दो सड़कों को निर्माण कार्य जारी है। पहली सड़क रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण दारबुक-श्योक-दौलब बेग ओल्डी (डीएस-डीबीओ) रोड है और दूसरी सड़क को ससोमा से सासेर ला तक तैयार किया जा रहा है। दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड लद्दाख के एकदम किनारे पर स्थित इलाके को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ती है। दूसरी सड़क डीबीओ के लिए एक विकल्प के तौर पर है और काराकोरम पास के करीब स्थित है। ससोमा-सासेर ला रोड डीबीओ के दक्षिण-पश्चिम में है। दोनों ही प्रोजेक्ट्स बीआरओ की तरफ से पूरे किए जा रहे हैं। इस समय करीब 11,815 मजदूर लद्दाख में चीन बॉर्डर के करीब लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में सड़कों के निर्माण कार्यों में लगे हुए हैं।

BRO पर 61 सड़कों का जिम्मा
लद्दाख में बन रही इस सड़क को बीआरओ ने HARDNESS III नाम दिया है। पिछले वर्ष रक्षा मंत्रालय की तरफ से संसद की स्टैंडिंग कमेटी को बताया गया था कि ससोमा-सासेर ला सड़क एक चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट है। सरकार के मुताबिक इस प्रोजेक्ट की विलक्षणताएं इसे एक मुश्किल प्रोजेक्ट बनाती हैं। सड़क निर्माण में सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआआरआई) की मदद भी ली गई है। सरकार के मुताबिक सीआरआरआई की तरफ से की गई सिफारिशों के बाद एक प्रस्ताव का निर्माण किया जा रहा है। बॉर्डर पर जारी टकराव के बीच ही बीआरओ पर 61 रणनीतिक सड़कों को पूरी करने की जिम्मेदारी है।












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