चीनी सैनिकों की कार्रवाई क्षणिक उत्तेजना नहीं, साजिश के तहत हमला किया

भारत को अब आगे जो भी कीमत चुकानी पड़े, उसे गलवान में बलवान होना ही पड़ेगा। 20 सैनिकों की शहादत का कर्जदार है पूरा देश। इस कर्जा को उतारना है तो अब भारत को सीमा पर डटे रहना होगा। कोई दूसरा विकल्प नहीं है। गलवान घाटी की पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 के पास भारत के वीर सैनिकों ने जिस बहादुरी का परिचय दिया वह इंडियन आर्मी का एक नया चेहरा है। भारतीय सेना अब मरने-मारने का संकल्प ले चुकी है। 'बाइलेटरल डायलॉग्स’ दिल को बहलाने की कोशिश के सिवा कुछ और नहीं। यह भी चीन का एक धोखा ही है। अब तक की बात से आखिर क्या हासिल हुआ ? कुछ होगा भी नहीं। बातचीत के दरम्यान चीन ने हमला कर इसको औचित्यहीन बना दिया है। पहले सीमा पर सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम हो फिर राजनयिक विकल्पों पर गौर किया जाना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ एश्ले टेलिस का कहना है कि लद्दाख सीमा पर चीनी सैनिकों की कार्रवाई क्षणिक स्थानीय उत्तेजना नहीं है। इसे चीन की सरकार और सेना का समर्थन हासिल है। इसलिए भारत को राजनयिक वार्ता के साथ-साथ सीमा पर सैन्य संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए।
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अब एक्शन लेने का वक्त
यह सच है कि युद्ध विनाश का कारण होता है। लेकिन जब किसी राष्ट्र की संप्रभुता खतरे में पड़ जाए तो यह आवश्यक हो जाता है। अभी तक भारत युद्ध टालने के लिए ही चीन की ज्यादतियां सहता रहा है। इस साल के पहले चार महीने में चीन ने लद्दाख में 170 बार सीमा का अतिक्रमण किया। भारत ने इसका तीखा जवाब इसलिए नहीं दिया कि इससे तनाव बढ़ेगा। भारत की इस उदारता को चीन की निरंकुश साम्यवादी सरकार ने कमजोरी समझ लिया। कुछ दिनों पहले चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में एक लेख लिखा गया था जिसमें कहा गया था, भारत सिर्फ बोल सकता है एक्शन नहीं ले सकता। लेकिन 15 जून 2020 की घटना ने भारत की विदेश नीति और रक्षा नीति को हकीकत की जमीन पर उतार दिया। भारत ने पहली बार चीन को उसकी की भाषा में जवाब दिया है। भारत के 20 वीर सपूतों ने मरते-मरते चीनी सेना के घमंड को चूर चूर कर दिया। उन्होंने एलान कर दिया कि अब अगर छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं।

चीनी चालबाजी और भारत
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत के सैनिक मारते हुए मरे हैं। इसे सरकार का आधिकारिक बयान माना जाना चाहिए। यानी प्रधानमंत्री ने कहा है है कि गलवान घाटी में पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 के पास चीनी सैनिक भी मारे गये हैं। कितने चीनी मारे गये हैं, यह स्पष्ट नहीं है। समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक चीन के 43 सैनिक हताहत हैं। लेकिन चीन इस घटना को उसी तरह छिपाने में लगा जैसे कि उसने कोरोना से मौत के आंकड़े को छिपाया था। बुधवार को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ ली जियान से जब मीडिया ने चीनी सैनिकों के मारे जाने के संबंध में सवाल पूछा तो उन्होंने कहा, मेरे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है। चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की डिक्टेटरशिप है। वहां की सरकार और सेना हर उस घटना पर पर्दा डाल देती है जिससे उनकी नाकामी उजागर होने की आशंका रहती है। मौत के आंकड़ों को छिपाने के लिए चीन अपने नागरिकों के शवों के साथ निर्मम और अपमानजनक आचरण करता रहा है। चूंकि चीन में सरकार के खिलाफ बोलने की आजादी नहीं है इसलिए उसके सभी कुकृत्य छिपे रह जाते हैं। लेकिन भारत में ऐसा नहीं है। यहां लोकतंत्र है। नरेन्द्र मोदी सरकार को बताना पड़ा कि सीमा पर कितने सैनिक शहीद हुए हैं। 20 सैनिकों की शहादत से पूरे भारत में आक्रोश की लहर है। मोदी सरकार गहरे दवाव में है। ऐसे में सरकार के पास एक ही रास्ता है कि वह सीमा पर माकूल जवाब के लिए तैयार रहे।

उठो पार्थ गांडीव संभालो
चीन ने गलवान घाटी पर दावा पेश कर यह जता दिया है कि यह तनाव अभी और बढ़ेगा। अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ एश्ले टेलिस का कहना है कि लद्दाख सीमा पर तनाव बढ़ते- बढ़ते एक दिन ऐसा रूप ले लेगा कि यह प्रत्यक्ष युद्ध में बदल जाएगा। लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास चीनी सैनिक जो भी कर रहे उसे बीजिंग में बैठे जनरलों की मंजूरी हासिल है। ऐसा नहीं है सीमा पर किसी कमांडर के भड़काने से चीनी सैनिक मारपीट करने लगे हैं। यह सब चीनी रणनीति का एक हिस्सा है। सैद्धांतिक तौर पर राजनयिक कोशिश होती रहे लेकिन भारत को सिर्फ इस पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए। चीन की अंदरुनी तैयारियों को देखते हुए भारत को मजबूत सैनिक विकल्प के लिए तैयार रहना होगा। टेलिस का यह भी मानना है कि अब भारत और चीन का रिश्ता कभी सामान्य नहीं हो सकता। सैन्य और आर्थिक शक्ति बनने की प्रतिद्वंद्विता दोनों देशों को कभी मित्र नहीं होने देगी। चीन कोई पाकिस्तान नहीं कि सैनिकों की शहादत का बदला सर्जिकल स्ट्राइक से ले सकते हैं। जरूरत पड़ी तो भारत को सीधी लड़ाई लड़नी होगी। ठीक उसी तरह जैसे महाभारत में श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था, उठो पार्थ गांडीव संभालो।












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