लद्दाख: भीषण ठंड में भी चीन से निपटने के लिए भारत तैयार, अमेरिका से खरीदा युद्ध का सामान

नई दिल्ली: चीन के साथ पिछले पांच महीनों से भारत का विवाद लद्दाख में जारी है। विशेषज्ञों ने दावा किया है कि इस बार ठंड में भी दोनों देशों के बीच सीमा विवाद जारी रहेगा। ऐसे में भारतीय जवानों की तैनाती ऊंचाई वाले इलाकों में करनी पड़ेगी। इसकी तैयारी भी भारतीय सेना ने शुरू कर दी है, जिसके तहत अमेरिका से उच्च पर्वतीय क्षेत्रों वाले युद्धक किट खरीदे गए हैं।

2016 के समझौते के तहत हुई खरीद

2016 के समझौते के तहत हुई खरीद

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने अमेरिका के साथ 2016 में लॉजिस्टिक एक्सचेंज मेमोरेंडम समझौता किया था। जिसके तहत दोनों देशों के युद्धपोत, विमान एक दूसरे के बेस का इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही स्पेयर पार्ट्स, लॉजिस्टिक सपोर्ट, सप्लाई समेत कई अन्य चीजें भी इस समझौते के तहत आती हैं। इसी समझौते के तहत अब भारत ने अमेरिका से उच्च पर्वतीय क्षेत्रों वाले युद्धक किट खरीदे हैं। जिसमें माइनस 50 डिग्री तक तापमान को झेलने वाले तंबू, कपड़े और युद्धक किट समेत अन्य चीजें शामिल हैं, जो लद्दाख में सर्दियों के वक्त जवानों के काम आएंगी।

चीन से खरीद की बंद

चीन से खरीद की बंद

अब तक भारत अपने जवानों के लिए ऊंचाई वाले क्षेत्रों की किट यूरोप या फिर चीन से खरीदता था, लेकिन इस बार विवाद ही चीन से है, जिस वजह से भारत ने यूरोप और अमेरिका को चुना है। मौजूदा वक्त में भारतीय सेना के सेकेंड इन कमांड लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी यूएस आर्मी पैसिफिक कमांड के दौरे पर हैं। सीमा विवाद के बीच इस खरीद को भारतीय सेना के लिए काफी अहम माना जा रहा है। हालांकि अभी तक अमेरिकी दूतावास की ओर से इस बार में कोई भी टिप्पणी नहीं की गई है।

लगातार लद्दाख भेजा जा रहा सामान

लगातार लद्दाख भेजा जा रहा सामान

चीन से सीमा विवाद को देखते हुए लद्दाख में जवानों की संख्या करीब दोगुनी हो गई है। हर साल नवंबर तक लद्दाख में रसद, हथियार, गोला-बारूद का 6 महीने के लिए स्टॉक रख लिया जाता है, क्योंकि बर्फबारी शुरू होते ही सड़क मार्ग का संपर्क लेह से कट जाता है। ऐसे में लगातार श्रीनगर और मनाली के रास्ते भारतीय सेना के ट्रक रसद लेकर लद्दाख की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही परिवहन विमान सी-17 ग्लोब मास्टर और चिनूक को भी सप्लाई के काम में लगाया गया है। वहीं भारतीय वायुसेना ने भी अपनी कमर कस ली है, जिस वजह से सुखोई, मिराज, मिग, राफेल जैसे विमानों को अग्रिम एयरबेसों पर उतारा जा रहा है।

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