Jagdeep Dhankhar: धनखड़ को कभी ममता बनर्जी ने बांधी थी राखी, जानिए क्या करती हैं पत्नी सुदेश ?
Jagdeep Dhankhar Profile and Family: आज सुबह से ही राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ सुर्खियों में बने हुए हैं। संसद के शीतकालीन सत्र में वो हुआ है जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। मालूम हो कि इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है क्योंकि ये सभी धनखड़ के काम से नाराज हैं।
इन्होंने जगदीप धनखड़ पर सदन में पक्षपात का आरोप लगाया है और इसी कारण इन सभी ने अनुच्छेद 67(बी) के तहत अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है।

विपक्ष का दावा है कि इस प्रस्ताव पर 70 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। ये सभी नेता कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और अन्य कई छोटे दल के हैं।
जगदीप धनखड़ का अब तक का सियासी सफर काफी रोचक रहा है
आपको बता दें कि अपने बेबाक बयानों औरर विनोद प्रिय स्वभाव के लिए मशहूर जगदीप धनखड़ का अब तक का सियासी सफर काफी रोचक रहा है। उपराष्ट्रपति बनने से पहले वो बंगाल के गर्वनर हुआ करते थे। साल 2019 में वो जब बंगाल के राज्यपाल बने थे और राजभवन पहुंचे थे तो सीएम ममता बनर्जी ने उनकी कलाई पर राखी बांधकर उनका स्वागत किया था।
लेकिन अपने कार्यकाल के दौरान जब उन्होंने ममता बनर्जी के कामकाज पर सवाल उठाने लग गए थे तो दोनों के बीच में इस कदर तनाव पैदा हो गया था कि ममता ने राष्ट्रपति को पत्र लिख कर धनखड़ को पद से हटाने की मांग की थी।
धनखड़ का झुंझुनूं जिले से है खास रिश्ता
11 अगस्त 2022 को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति बनने वाले जगदीप धनखड़ का जन्म 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनूं जिले के किठाना गांव में हुआ था इसलिए उनके मन में हमेशा ही झुंझुनूं और राजस्थान खास स्थान रखता है। एक साधारण किसान परिवार से आने वाले बालक जगदीप धनखड़ को शुरू से ही पढ़ने का काफी शौक था और इसी शौक ने उन्हें राज्य का नामी वकील बना दिया था।
मिडिल स्कूल तक की पढ़ाई गांव के ही सरकारी स्कूल में करने वाले धनखड़ ने सैनिक स्कूल से 10-12वीं की शिक्षा प्राप्त की और इसके बाद राजस्थान यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई पूरी की। 1987 में राजस्थान हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी चुने गए।
धनखड़ का राजनीतिक करियर 1989 में शुरू हुआ
धनखड़ साल 1989 में पहली बारझुंझुनूं से लोकसभा सांसद चुने गए थे लेकिन वे तब जनता दल पार्टी से जुड़े थे।वे 1991 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और अजमेर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से 1991 के भारतीय आम चुनाव में चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।
साल 2019 में धनखड़ बंगाल के राज्यपाल बने थे
धनखड़ 2003 में भाजपा में शामिल हुए और 2008 के विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की अभियान समिति के सदस्य थे। 2016 में, उन्होंने भाजपा के कानून और कानूनी मामलों के विभाग का नेतृत्व किया। साल 2019 में, उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया। साल 2022 में वो देश के उपराष्टपति बने।
देश की सेंकड लेडी सुदेश धनखड़ भी काफी पढ़ी-लिखी हैं
अगर धनखड़ के निजी जीवन की बात करें तो उन्होंने साल 1979 में सुदेश धनकड़ से की थी, देश की सेंकड लेडी सुदेश धनखड़ भी काफी पढ़ीलिखी हैं। वो वनस्थली विद्यापीठ से पढ़ी हुई हैं, उन्होंने अर्थशास्त्र में एमए किया है औ र ऑर्गेनिक खेती और ट्रैवलिंग का शौक रखती हैं और सोशल वर्कर हैं। इन्होंने पर्यावरण और बेटियों की शिक्षा के लिए काफी काम किया है।
इकलौती बेटी के पिता हैं धनकड़
राजनीति के इस पॉवर कपल को एक बेटी कामना है, जिनकी शादी देश के जानेमाने वकील कार्तिकेय वाजपेयी से हुई है। कार्तिक सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं और लाइमलाइट से काफी दूर रहते हैं।












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