भारत ने रैनिटिडीन पर लगाया प्रतिबंध, रैंटेक-जिनेटेक की बिक्री पर रोक, जानिए क्यों है यह खतरनाक
नई दिल्ली, 15 सितंबर। स्वास्थ्य मंत्रालय ने रैनिटिडीन पर बड़ी कार्रवाई की है और इसे जरूरी दवा की लिस्ट से बाहर कर दिया है। गौर करने वाली बात है कि अमेरिका सहित कई देशों ने पहले ही इस दवा के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इसे जरूरी दवा की लिस्ट से बाहर कर दिया है। इन देशों की राह पर चलते हुए भारत ने भी रैनिटिडीन को जरूरी दवाओं की लिस्ट से बाहर कर दिया है। बता दें कि रैनिटिडीन एक साल्ट है जिसका इस्तेमाल रैंटेक, जिन्टैक जैसी दवाओं को बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। इस दवा से कैंसर होने का खतरा बढ़ता है, जिसके बाद से इसके खिलाफ दुनियाभर के देश कार्रवाई कर रहे हैं।
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26 दवाओं पर बैन
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से मंगलवार को एक रिलीज जारी करके इसकी जानकारी दी गई है। रिलीज में कहा गया है कि न्यू नेशनल लिस्ट ऑफ इसेंशियल मेडिसिन यानि NLEM में कुल 384 दवाएं हैं। जबकि 26 दवाओं को इस लिस्ट से बाहर कर दिया गया है, अब यह दवाएं भारत में नहीं मिलेंगी, जिसमे रैनिटिडीन भी शामिल है। गौर करने वाली बात है कि इस दवा को भारत में अब प्रतिबंधित किया गया था, लेकिन अमेरिका ने इसपर 2019 में ही प्रतिबंध लगा दिया था।

क्या है रैनिटिडीन
रैनिटिडीन एक तरह का सॉल्ट है, जिसका इस्तेमाल एसिडिटी, पेट में अल्सर सीने में जलन जैसी दिक्कत के लिए किया जाता है। यह मेडिकल स्टोर पर इंजेक्शन, टैबलेट आदि के रूप में उपलब्ध होती है। मरीज की स्वास्थ्य की जानकारी लेने के बाद उसकी उम्र, लिंग आदि के आधार पर यह दवा दी जाती है। यह सॉल्ट एसिलॉक, जिनेटेक, रैंटेक आदि नाम से कंपनियां बाजार में बेचती हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार इस सॉल्ट का इस्तेमाल गैस से संबंधित समस्या के इलाज के लिए किया जाता है।

इस दवा से जुड़ा विवाद
इस दवा को लेकर लंबे समय से कुछ विवाद भी चल रहा है। दरअसल जांच में यह बात सामने आई थी कि इसके इस्तेमाल से कैंसर की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इस सॉल्ट को ग्लैक्सो होल्डिंग्स ने तैयार किया था, इसे पहली बार 1983 में अमेरिका में अनुमति दी गई थी। इसके बाद दुनिया के 31 देशों में भी इस सॉल्ट को अनुमति दी गई थी। लेकिन बाद में यह बात सामने आई कि इसमे नाइट्रोसोडिमेथिलैमीन है जिससे पेट, ब्लैडर आदि में कैंसर हो सकता है। शोध में यह बात भी सामने आई कि इस सॉल्ट के ऊर्जा के संपर्क में आने या फिर मिलावट से कैंसर हो सकता है।

क्या आपको होना चाहिए चिंतित?
जिस तरह से शोध में यह बात सामने आई है कि इस दवा के इस्तेमाल से कैंसर का खतरा होता है। उसके बाद लोगों के मन में यह चिंता जरूर है कि अगर उन्होंने इसका इस्तेमाल किया है तो क्या उन्हें भी खतरा है। अमेरिकी एफडीए ने अपने आंकलन में कहा है कि अगर आपने इसे कम मात्रा में इस्तेमाल किया है तो इसके दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। एडवायजरी में कहा गया है कि अगर मरीज इसे लंबे समय तक और अधिक मात्रा में इस्तेमाल करते हैं तो इससे खतरा है।












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